The Rig Veda (ऋग्वेद) is the oldest of the four Vedas and one of the most ancient religious texts in the world. Composed in Vedic Sanskrit by the Rishis (sages) of ancient India, it is a collection of 1,028 hymns (Suktas) organized into 10 books called Mandalas. These hymns are addressed to various deities — Agni (fire), Indra (king of gods), Soma (sacred plant), Varuna (cosmic order), Surya (sun), and many others.

Sanatana Dharm సనాతన ధర్మం  Sanatana Dharm సనాతన ధర్మం  Sanatana Dharm సనాతన ధర్మం
stroms  Srimad Bhagavad Gita  Valmiki Ramayanam/Valmiki Ramayanam

Rig Veda - ऋग्वेद


Mandalas 5 - (727 verses)


Mandala 5 · Verse 1
अबुध्म त्व इन्द्रवन्तो अग्नयो ज्योतिभंरन्त उषसो व्युष्टिषु. मही द्यावापृथिवी चेततामपोऽद्या देवानामाव वृणीमहे.. (१)

May the radiant fires, full of Indra's might, shine forth at dawn's first light. May the great Earth and Sky be aware, and may we now invoke the gods' grace.

इंद्र से संबंधित अग्नियां उषओं द्वारा अंधकारनाश के समय तेज धारण करते हुए जाग गई हैं. विस्तृत द्यावा एवं पृथ्वी भी चेतनायुक्त हों. आज मैं देवों की रक्षा का वरण करता हूं. (१)

Mandala 5 · Verse 2
दिवस्पृथिव्योराव आ वृणीमहे मातृन्नि-न्धन्यपर्वताञ्छर्येणावत्ः. अनागस्तं सूर्यमुपासमीमहे भद्रं सोमः सुवानो अद्या कृणोतु नः.. (२)

We invoke the mothers, Earth and Sky, and the mountains as our protectors. May the sun, free from fault, and Soma, the bestower of blessings, grant us well-being today.

हम द्यावा-पृथ्वी से अपनी रक्षा की प्रार्थना करते हैं. मैं माता तुल्य नदियों एवं कुरुक्षेत्र में स्थित पर्वतों से भी रक्षा की याचना करता हूं. हे सूर्य एवं उषः! मैं तुम दोनों से प्रार्थना करता हूं कि मुझे पापरहित रखो. जाने जाते हुए सोम आज हमारा मंगल करे. (२)

Mandala 5 · Verse 3
उषा उच्छन्त्यप बाधतामघं स्वस्यग्निं समिधानमीमहे.. (३)

May the rising dawn dispel all darkness and evil, as we invoke the radiant, awakened fire within.

विस्तृत एवं माता-पिता के समान धावा-पृथ्वी से हम प्रार्थना करते हैं कि वे सुख पाने के लिए हम निष्पाप लोगों की रक्षा करें. अंधकार का विनाश करती हुई उषा हमारे पापों को समाप्त करे. हम प्रज्वलित अग्नि से सुख की याचना करते हैं. (३)

Mandala 5 · Verse 4
इयं न उष्मा प्रथमा सुदेवं रेवत्स्निभ्यो रेवती व्युच्छतु. आरं मन्युं दुर्वित्स्य धीमहि स्वस्यग्निं समिधानमीमहे.. (४)

May this new dawn, radiant with divine light and prosperity, illuminate us. We invoke the ever-burning Agni, the inner fire of our being, to dispel our anger and ignorance.

धन की स्वामिनी, मुख्या एवं पापों का नाश करने वाली उषा हमें दान योग्य धन दे. हम बुरे धन वाले व्यक्ति के क्रोध से दूर रहना चाहते हैं. हम प्रज्वलित अग्नि से कल्याण की याचना करते हैं. (४)

Mandala 5 · Verse 5
प्र याः सिस्ते सूर्यस्य रश्मिभिरज्योतिर्भरन्तीरूपसो व्युष्टिषु. भद्रा नो अद्य श्रवसे व्युच्छत स्वस्यग्निं समिधानमीमहे.. (५)

May the radiant dawn, filled with the sun's light, bring us auspiciousness and renown today, as we kindle the ever-burning fire.

जो उषाएँ सूर्यकिरणों के साथ मिलती हैं एवं प्रकाश को धारण करके अंधकार का नाश करती हैं, वे आज हमें अन्न देने के लिए अनुकूल हों एवं अंधकार का नाश करें. हम प्रज्वलित अग्नि से कल्याण की याचना करते हैं. (५)

Mandala 5 · Verse 6
अनमीवा उपस आ चरन्तु न उदग्नायो जिहांता Jyotiṣā br̥hat. āyuṣāmatāmaghninā tūrtujē rath svastyagnim samidhānamīmahe.. (६)

May the dawn arrive without illness, bringing forth radiant light. We worship the ever-burning Agni, the source of life and prosperity, with offerings.

अनमीवा उपस आ चरन्तु न उदग्नायो जिहांता Jyotiṣā br̥hat. आयुषातामग्निना तूतुजिं रथं स्वस्यग्निं समिधानमीमहे.. (६)

Mandala 5 · Verse 7
रोगरहित उषाएँ हमारे पास आवें एवं विस्तृत अग्नि तेज से मिलकर ऊपर उठें. अश्विनीकुमार हमारे पास आने के लिए अपने तेज चलने वाले रथ में घोड़े जोतें. हम प्रज्वलित अग्नि से कल्याण की याचना करते हैं. (७)

May healthy dawns arrive, rising with radiant fire. May the Ashvins yoke their swift steeds and approach us. We seek well-being from the blazing Agni.

रोगरहित उषाएँ हमारे पास आवें एवं विस्तृत अग्नि तेज से मिलकर ऊपर उठें. अश्विनीकुमार हमारे पास आने के लिए अपने तेज चलने वाले रथ में घोड़े जोतें. हम प्रज्वलित अग्नि से कल्याण की याचना करते हैं. (७)

Mandala 5 · Verse 8
श्रेष्ठं नो अद्य सवितृवरिण्यं भागमा सुव स हि रत्नधा असि. Rayō janitrīṁ bhiṣaṇamupa bhuve svastyagnim samidhānamīmahe.. (८)

May the divine Savitr, the bestower of boons, grant us a glorious portion today, for He is the bestower of treasures. We invoke the radiant Agni, the source of all, for prosperity and well-being.

हे सविता देव! आज हमें श्रेष्ठ एवं वरण करने योग्य धन दो. तुम उत्तम रत्न देने वाले हो. हम धन उत्पन्न करने वाली स्तुतियां बोलते हैं. हम प्रज्वलित अग्नि से कल्याण की याचना करते हैं. (८)

Mandala 5 · Verse 9
पिषतुं मा तद्स्य प्रवाचनं देवानां यन्मनुष्या३ अमनमहि. Viśvā iduṣā: spaḷudēti sūrya: svastyagnim samidhānamīmahe.. (९)

May this offering be pleasing to the gods, for we have bowed to them. The sun shines brightly; we invoke the well-kindled fire for our well-being.

यज्ञों का देवस्तुतिरुपी भाग हमारी रक्षा करे. हम उसे जानते हैं. सूर्य प्रत्येक प्रभात में सभी वस्तुओं को स्पष्ट करते हुए आते हैं. हम प्रज्वलित अग्नि से कल्याण की याचना करते हैं. (९)

Mandala 5 · Verse 10
आ नो बर्हिः सधमादे बृहदिवा देवाँ इळे सादया सप्त होतृन्. इन्द्रं मित्रं वरुण सात्यं भर्गं स्वस्त्यग्निं समिधानमीमहे.. (१०)

We invoke the divine presence, the great and radiant, to be seated with us in this sacred assembly, along with Indra, Mitra, Varuna, and the brilliant Agni, who is ever kindled.

आ नो बर्हिः सधमादे बृहदिवा देवाँ इळे सादया सप्त होतृन्। इन्द्रं मित्रं वरुण सात्यं भर्गं स्वस्त्यग्निं समिधानमीमहे.. (१०)

Mandala 5 · Verse 11
त आदित्या आ गता सर्वतातये वृधे नो यज्मवता सजोὗषः. बृहस्पतिं पूषणमग्निं भर्गं स्वस्त्यग्निं समिधानमीमहे.. (११)

We invoke the radiant Adityas, the mighty Brihaspati, Pushan, and Agni, the brilliant and ever-burning, for our protection and prosperity.

हे प्रसिद्ध आदित्य! तुम हमारे यज्ञ के लिए आओ एवं हमारे कल्याण के लिए संयत होकर यज्ञ में बैठो। हम बृहस्पति, पूषा, अश्विनीकुमारों, भग एवं प्रज्वलित अग्नि से कल्याण की याचना करते हैं। (११)

Mandala 5 · Verse 12
तन्नो देवा यच्छत सुप्रावाचं छर्दिरादित्यः सुभरं नृपाय्यम्. पश्ये तोकाय तनयाय जीवसे स्वस्त्यग्निं समिधानमीमहे.. (१२)

May the gods grant us a clear voice and a strong, life-sustaining home. We invoke the ever-burning Agni for the well-being and long life of our children and descendants.

हे आदित्य देवो! तुम अपना यज्ञ पूर्ण करो एवं हमें मानवों की रक्षा करने वाला मनपसंद घर दो। हम प्रज्वलित अग्नि से अपने पशुओं, संतान एवं जीवन के विषय में कल्याण की याचना करते हैं। (१२)

Mandala 5 · Verse 13
विश्वे अद्य मरुतो विश्व ऊती विश्वे भवन्तुग्मनयः समिद्धाः. विश्वे नो देवा अवसा गमनन्तु विश्वमस्तु द्रविणं वाजो अस्मे.. (१३)

May the Maruts, with universal protection, be our companions, fully ignited. May all the gods come to our aid, and may abundance and strength be ours.

आज सभी मरुत् सब प्रकार से हमारी रक्षा करें एवं सभी अग्नियां प्रज्वलित हों। सभी देव हमारी रक्षा के लिए आवें तथा सब प्रकार के अन्न व संपत्ति हमें प्राप्त हों। (१३)

Mandala 5 · Verse 14
यं देवासोऽव वाजसातो यंRayadhve यं पिपृथात्यहः. यो वो गोपीथे न भयस्य वेद ते स्याम देववीतये तुरासः.. (१४)

May we, swift and strong, be ever ready for the divine feast, protected by the one whom the gods themselves sustain, guard, and fill with strength.

हे देवो! हम यज्ञ के ऐसे आतुर व्यक्ति बनें, जिसकी तुम युद्ध में रक्षा करते हो, जिनका त्राण करते हो एवं जिन्हें पापरहित करके उनकी अभिलाषा पूर्ण करते हो एवं जो तुम्हारा सहारा पाकर भय को जानते भी नहीं। (१४)

Mandala 5 · Verse 15
eṣa stomo mārutaṁ śardho acchā rudrasya sūnūm̐r yuvanyūm̐r ud aśyāḥ | kāmo rāye havate mā svasty upa stuhi pṛṣadaśvām̐ ayāsaḥ

Mandala 5 · Verse 16
praiṣa stomaḥ pṛthivīm antarikṣaṁ vanaspatīm̐r oṣadhī rāye aśyāḥ | devo-devaḥ suhavo bhūtu mahyam mā no mātā pṛthivī durmatau dhāt


Mandala 5 · Verse 17
urau devā anibādhe syāma

Mandala 5 · Verse 18
sam aśvinor avasā nūtanena mayobhuvā supraṇītī gamema | ā no rayiṁ vahatam ota vīrān ā viśvāny amṛtā saubhagāni

Mandala 5 · Verse 1
उपासानन्ता बृहती सुपेशसा द्यावाक्षामा वरुणो मित्रो अर्यमा | इन्द्रं ह्वेवे मरुतः पर्वतोँ अप आदित्यान्द्यावापृथिवी अपः स्वः.. (१)

The boundless, vast, and radiant heavens and earth are invoked, along with Varuna, Mitra, Aryama, Indra, the Maruts, mountains, waters, the Adityas, and heaven and earth again.

मैं महान् एवं शोभनरूप वाली उषः काल, रात्रि और द्यावा-पृथिवी, वरुण, मित्र, अर्यमा, इन्द्र, मरुद्गण, पर्वतसमूह, जलौँ, आदित्यौँ, अंतरीक्ष एवं अन्य देवों को यज्ञ में बुलाता हूँ। (१)

Mandala 5 · Verse 2
द्यौश्च नः पृथिवी च प्रचेतस ऋतवारी रक्षांमहंसे रिषः | मा दुर्वित्रा निर्ऋतिं ईशत् तदेवानामवो अघा वृणीमहे.. (२)

May the heavens and earth, full of wisdom and order, protect us from evil. We seek the divine aid of the gods, not the dominion of misfortune.

शोभन बुद्धि वाली एवं यज्ञ के योग्य द्यावा-पृथिवी हमें हिंसकों एवं पाप से बचावें। बुरी बुद्धि वाली मृत्यु हम पर अधिकार न कर सके. हम आज देवों की उसी रक्षा की याचना करते हैं. (२)

🔊
Mandala 5 · Verse 3
विश्वस्माद्नो अदितिः पात्वंहसो माता मित्रस्य वरुणस्य रेवतः | स्वर् juzjyotirvukं नशीमहि तदेवानामवो अघा वृणीमहे.. (३)

May Aditi, the mother of Mitra and Varuna, protect us from sin. We seek the divine light and strength, and invoke the blessings of the gods.

धन के स्वामी मित्र और वरुण की माता अदिति पाप से हमारी रक्षा करें. हम विनाशरहित ज्योति को पूर्णरूप से शीघ्र प्राप्त करें. देवों से आज हम उसी रक्षा की याचना करते हैं. (३)

Mandala 5 · Verse 4
ग्रावा वदनरूप रक्षाँसि सेधतु दुष्यवज्याँ निर्ऋतिं विश्वमत्रिणम् | आदित्स्यँ शर्म मरुतामशीमहि तदेवानामवो अघा वृणीमहे.. (४)

May the stones, like mouths, ward off evil spirits and the all-consuming death. May we attain the protection of the Maruts, and choose the divine aid that dispels misfortune.

सोमरस निचोड़ने के काम आने वाले दोनों पत्थर शब्द करते हुए राक्षसों को दूर भगावें एवं बुरे सपनों, मृत्यु और सबको खाने वाले राक्षसों को हमसे हटावें. हम आदित्यौँ एवं मरुतोँ से संबंधित सुख प्राप्त करें. हम आज देवों की उसी प्रसिद्ध रक्षा की याचना करते हैं. (४)

Mandala 5 · Verse 5
एन्द्रो बर्हिः सीदतु पिन्वतामिला बृहस्पतेः सामभिमंक्रवो अर्चतु | सुप्रकेतं जीवसे मन्म धीमहि तदेवानामवो अघा वृणीमहे.. (५)

May Indra, the divine, be seated on the sacred grass, and may the hymns of Brihaspati, the lord of prayer, be sung with joy. We shall meditate on the life-giving thoughts, and seek the divine favor for our well-being.

इंद्र भली प्रकार कुश पर बैठें. स्तुतिवचन विशेषरूप से बोले जावें. साममंत्रों द्वारा प्रशंसित बृहस्पति हमारी अभिलाषा पूरी करें. हम जीवन के लिए शोभन ज्ञान एवं धन प्राप्त करें. आज हम देवों से उसी प्रसिद्ध रक्षा की याचना करते हैं. (५)
Mandala 5 · Verse 6
दिविस्पृशं यज्मस्माकमश्विना जीराध्वरं कृणुतं सुम्नमिष्ये | प्राचीनरश्मिमाहुतं घृतेन तदेवानामवो अघा वृणीमहे.. (६)

O Ashvins, make our sacrifice, reaching to the heavens, fruitful and pleasing. We seek your divine aid, offered with ghee and the rising sun.

हे अश्विनीकुमारो! तुम हमारे यज्ञ को स्वर्ग छूने वाला, शीघ्र गतिकृत व हिंसा रहित

Mandala 5 · Verse 7
उप हव्यं सुहवं मारुतं गणं पावकपृष्ठं सख्याय शंभुवम्। रायस्पोषं सौश्रवसाय धीमहि तदेवानामवो अद्या वृणीमहे.. (७)

We meditate on the Maruts, the divine hosts, swift and auspicious, who bring prosperity and renown. We choose their divine aid today.

मैं शोभन आह्वान वाले, शुद्धिकर्ता, दर्शनीय, सुखदाता व धन के पोषक मरुद्गण को मित्रता पाने के लिए बुलाता हूं तथा विशेषरूप से अन्न पाने के लिए मैं उनका ध्यान करता हूं। हम आज देवों से विशेष रक्षा की याचना करते हैं। (७)


Mandala 5 · Verse 8
अपां पेयं जीवधन्यं भरामेहे देवाव्यं सुहवमधरश्रियम्। सुरश्मिं सोममिन्द्रियं यमीमहि तदेवानामवो अद्या वृणीमहे.. (८)

We seek the life-sustaining, divine Soma, the source of strength and prosperity, and invoke its essence for our nourishment and well-being. We choose this divine energy today for the protection and favor of the gods.

हम जल का पालन करने वाले, जीवों को धन्य करने वाले, देवों को तृप्ति देने वाले, शोभन स्तुति वाले, यज्ञ की शोभा व शोभन दीप्तिपुक्त सोम को धारण करते हैं एवं उनसे शक्ति की याचना करते हैं. आज हम देवों से वही प्रसिद्ध रक्षा मांगते हैं. (८)

Mandala 5 · Verse 9
सनेम तत्सुसनिता सन्तित्वभिवर्यं जीवा जीपुत्रा अनागसः। ब्रह्मद्धिषो विश्वगेनो भरैरत तदेवानामवो अद्या वृणीमहे.. (९)

We pray for a life of well-being, free from sin, with righteous offspring, and protected by divine grace. We choose that divine light and strength today.

हम और हमारे पुत्र दीर्घजीवी तथा अपराध रहित बनकर एवं अपनी संतान के साथ बांटकर सोम रस का पान करें. हम ब्राह्मणों से द्वेष करने वाले लोग सब प्रकार के पापों से पूर्ण हों. आज हम देवों से उसी रक्षा की याचना करते हैं. (९)

Mandala 5 · Verse 10
ये स्था मनोयज्यास्ते श्रुणोतन यद्धो देवा ईमहे तद्ददातन. जैत्रं क्रतुं रयिमद्रिवृधशस्तदेवानामवो अद्या वृणीमहे.. (१०)

O gods, hear our mental offerings and grant us what we seek. Today we choose the victorious sacrifice, wealth, and the strength that increases it, for your divine aid.

हे मनुष्यों का यज्ञ पाने के योग्य देवो! तुम हमारी स्तुति सुनो. हम तुमसे जो कुछ मांगते हैं, वह हमें दो. हमें जय प्रदान करने वाला ज्ञान व धन एवं संतान से युक्त यश दो. आज हम देवों से उसी प्रसिद्ध रक्षा की याचना करते हैं. (१०)

Mandala 5 · Verse 11
महद्य महतामा वृणीमहेऽवो देवानां बृहतामवर्णणम्। यथा वसु वीरजातं नशामहे तदेवानामवो अद्या वृणीमहे.. (११)

We seek the great, unutterable glory of the mighty gods. May we attain that divine strength, by which we may overcome all obstacles.

हम आज श्रेष्ठ, महान् और अद्वितीय देवों से अधिक रक्षा की प्रार्थना करते हैं. आज हम देवों से उसी विशेष रक्षा की प्रार्थना करते हैं, जिससे हमें धन एवं संतान प्राप्त हो सके. (११)

Mandala 5 · Verse 12
श्रेष्ठे श्याम सवितुः सवीमनि तद्देवानामो अद्धा वृणीमहे.. (१२)

We choose that divine brilliance of the Sun, the most excellent, for our nourishment and strength.

हम महान् एवं प्रज्वलित अग्नि से सुख व मित्रवरुण से पापहिनता तथा कल्याण प्राप्त करें. हम सूर्य से सर्वोत्तम सुख प्राप्त करें. आज हमें देवों से उसी विशेष रक्षा की याचना करते हैं. (१२)

Mandala 5 · Verse 13
ये सवितुः सत्यसत्य विश्वे मित्रस्य व्रते वरुणस्य देवाः। ते सौभगं वीरदगोमदं दधातनं द्रविणं चित्रमस्मे.. (१३)

May the divine powers, who are the truthful truth of the Sun, the friends of all, and upholders of Varuna's cosmic order, bestow upon us prosperity, strength, abundance, and radiant wealth.

ये सवितुः सत्य स्वभाव वाले सविता, मित्र और वरुण के यज्ञ में उपस्थित रहते हैं, वे हमें सौभाग्य, संतान एवं गायों से युक्त अन्न, पूजनीय धन एवं पुण्यकर्म दें. (१३)

Mandala 5 · Verse 14
सविता पश्त्रातासविता पुरस्तात्सवितोतरात्तासविताधरातात्। सविता नः सुवतु सर्वतातिं सविता नः रासतां दीर्घमायुः.. (१४)

May Savitr, the divine impeller, protect us from the front, from behind, from above, and from below. May Savitr grant us complete well-being and a long life.

सूर्य देव हमें पश्चिम, पूर्व, उत्तर एवं दक्षिण दिशाओं में सभी अभिलषित धन प्रदान करें एवं दीर्घ आयु दें. (१४)

Mandala 5 · Verse 15
bṛhad vayo bṛhate tubhyam agne dhiyājuro mithunāsaḥ sacanta | devo-devaḥ suhavo bhūtu mahyam mā no mātā pṛthivī durmatau dhāt

Mandala 5 · Verse 16
urau devā anibādhe syāma

Mandala 5 · Verse 17
sam aśvinor avasā nūtanena mayobhuvā supraṇītī gamema | ā no rayiṁ vahatam ota vīrān ā viśvāny amṛtā saubhagāni

Mandala 5 · Verse 1
नमो मित्रस्य वरुणस्य चक्षसे महो देवाय तद्दतं सपर्यत. दुरेद्शे देवजाताय केतवे दिवस्पुत्राय सूर्यं शंसत.. (१)

Salutations to the eye of Mitra and Varuna, the great divine light. Worship that which is given by the divine, the radiant beacon born of the gods, the son of the sky.

हे ऋत्विजों! तुम मित्र और वरुण को देखने वाले महान्, दीप्तिशाली, दूर रहते हुए भी सबको देखने वाले, देवों के वंश में उत्पन्न, संसार का ज्ञान कराने वाले एवं स्वर्ग के पुत्रतुल्य सूर्य को नमस्कार करके यज्ञ आदि से उनकी पूजा तथा प्रशंसा करो. (१)

Mandala 5 · Verse 2
सा मा सत्योक्तिः परि पातु विश्वतो धावा च यत्र ततन्नमहानि च. विश्वमन्यग्नि विशते यद्देजति विश्वहापो विश्वहोदेति सूर्यः.. (२)

May that truthful speech protect me everywhere, where heaven and earth, and the great ones are. The entire universe enters the fire, the waters, and the sun rises.

ये सत्यवचन मेरी सभी प्रकार से रक्षा करें, जिनके सहारे आकाश एवं दिन स्थित हैं, सभी प्राणी जिनके आश्रित हैं, जिनके प्रभाव से प्राणिसमूहु गति करता है, जल बहता है एवं सदा सूर्य उगता है. (२)


Mandala 5 · Verse 3
न ते अदेवः प्रतिवो नि वासते यदेतशेभिः पतरे रथ्यसि. प्राचीनम्यदनु वर्तते रज उदनेन ज्योतिष्यासि सूर्य.. (३)

You are not without a god, O Sun, as you move across the sky with your horses. You follow the ancient path, illuminating the world with your brilliance.

हे सूर्य देव! जब तुम अपने गतिशालि घोड़ों को रथ में जोड़ने की इच्छा करते हो, तब कोई भी प्राचीन राक्षस तुम्हारे समीप नहीं रहता. तुम्हारी वह प्रसिद्ध ज्योति जल के पीछे चलती है, जिसके साथ तुम उदित होते हो. (३)

Mandala 5 · Verse 4
येन सूर्य ज्योतिष बाधसे तमो जगच्च विश्वमुदियर्षि भानुना | तेनास्मदृक्षिमनिरामनाहुतिमपामीवाप दुष्यव्यं सुव.. (४)

By whom the sun dispels darkness and the universe is illuminated by His radiance, by that same divine light, may our minds be purified and our sins washed away.

हे सूर्य देव! तुम जिस ज्योति से अंधकार का नाश करते हो एवं जिस किरण से सारे संसार को चमकाते हो, उसी के द्वारा हमारा अज्ञाभाव, यज्ञहीनता, रोगसमूह एवं बुरे स्वप्न नष्ट करो. (४)

Mandala 5 · Verse 5
विश्वस्य हि प्रेषितो रश्मि व्रतमहव्यव्युच्चरसि स्वधा अनु. | यददा त्वं सूर्योप्रवामहैं तं नो देवा अनु मसीरत ऋतुम्.. (५)

O Sun, you are sent forth by the universe, your rays move with divine order. May the gods, following your rhythm, grant us sustenance and prosperity.

हे प्रेरित सूर्य देव! तुम क्रोध न करते हुए सभी यजमानों के यज्ञों की रक्षा करते हो एवं प्रातःकाल के यज्ञ के बाद उदित होते हो. आज जब हम तुम्हारा नाम लें, तभी देव हमारे यज्ञ को स्वीकार करें. (५)

Mandala 5 · Verse 6
त नो द्वावापृथिवी तन्त्र आप इन्द्रः शृणवन्तु मरुतो हवं चवः | मा शूनं भूमं सूर्यस्य सन्दृशि भद्रं जीवन्तो जरणमशीमहि.. (६)

May the divine Earth and Sky, the Waters, Indra, and the Maruts hear our call. May we, while living, attain a blessed old age, not in emptiness, but in the sight of the Sun.

द्यावा-पृथिवी, इंद्र, जल एवं मरुत् हमारा आह्वान एवं स्तुतिवचन सुनें. हम सूर्य की कृपादृष्टि पाकर दुःख प्राप्त न करें, अपितु चिरकाल तक प्राण धारण करें एवं यौवन का भोग करें. (६)

Mandala 5 · Verse 7
विश्वाहा त्वां सुमनसः सुचक्षसः प्रजावन्तो अनमीवा अनागसः. | उदन्तं त्वा मित्रमहो दिवेदिदे ज्योर्जीवाः प्रति पश्येम सूर्य.. (७)

May we, with clear vision and many offspring, free from illness and sin, behold you, O Sun, our friend and source of light, living long and well.

हे सूर्य देव! हम प्रसन्नमन, सुदर्शन, संतानयुक्त, रोगरहित एवं निष्पाप होकर सदा तुम्हारा यश करें. हे मित्रों का आदर करने वाले सूर्य! हम चिरंजीवी बनकर तुम्हें प्रतिदिन उदित होता हुआ देखें. (७)

Mandala 5 · Verse 8
महि ज्योतिर्बिभ्रतं त्वा विचक्षणं भास्वन्तं चक्षुबेचक्षुषे मयः | आरोहन्तं बृहत्ः pajassparí वर्य जीवाः प्रति पश्येम सूर्य.. (८)

May we, the wise, behold the radiant Sun, the source of light and life, as it ascends, bringing well-being to all beings.

हे विशेष दृष्टि वाले सूर्य! हम चिरंजीवी बनकर प्रतिदिन तुम्हारा दर्शन करें. तुम महान् ज्योति धारण करने वाले, दीप्तिशाली, सब देखने वालों की आँखों के लिए सुखकर एवं महान् सागर के ऊपर आरोहण करते हो. (८)

Mandala 5 · Verse 9
यस्य ते विश्वा भुवननि केतुना प्र चेरते नि च विशनते अकुभिः | अनागास्त्वेन हरिहेश सूर्याद्वा नो वस्यसावस्यसोदिहि.. (९)

By Your radiant light, all worlds move and rest, O Hariharesh. May we, free from sin, ascend to Your supreme abode, surpassing all others.

हे हरे बालों वाले सूर्य! तुम्हारी जिस पहचान के कारण सभी प्राणी विशेष रूप से गति करते हैं और रात के समय विश्राम करते हैं, तुम अपनी पहचान को लेकर प्रतिदिन उगो एवं

Mandala 5 · Verse 10
शं नो भव चक्षुषा शं नो अह्नां शं भानूनां शं हिमां शं धृणेन । यथा शमध्वच्छमसददुरोणे तत्सूर्य द्रविणो धेहि चित्रम्.. (१०)

May the Sun's gaze bring us peace, and may its light, warmth, and brilliance bestow well-being upon us. May we dwell in its radiant presence, receiving its diverse and abundant blessings.

हे सूर्य! तुम अपने तेज, दिवस, किरण, शीतलता एवं उष्णता के द्वारा हमारे लिए कल्याणकारी बनो. हम चाहे मार्ग में हों या अपने घर में, तुम हमें यह विचित्र संपत्ति दो. (१०)

Mandala 5 · Verse 11
अस्माके देवा उभायय जन्मने शर्म यच्छत द्वि पदे चतुष्पदे । अदप्तिबर्दुर्ज्यमानमाशितं तदस्मे शं योरपो दधातन.. (११)

May the gods grant us well-being for both our two-legged and four-legged beings. May they bestow upon us peace and prosperity, protecting us from harm and ensuring our sustenance.

हे देवो! तुम हमारे द्विपद और चतुष्पद दोनों प्रकार के प्राणियों को सुख दो. सब प्राणी खा-पीते एवं शक्तिशाली बनें. तुम प्राणियों को सुख एवं पापहीनता प्रदान करो. (११)

Mandala 5 · Verse 12
यद्दो देवाशकृम जिह्वया गुरु मनसो वा प्रयुती देवहेळनम् । अरावा यो नो अभि दुच्छनायते तस्मिन्द्देनो वसवो नि धेतन.. (१२)

O gods, may you place your wrath upon the one who, through speech, mind, or action, disrespects you. May you direct your anger towards him who wishes us ill.

हे निवासस्थान देने वाले देवो! हमने वचन अथवा मन के प्रयोग से तुम्हारा जो अपमान किया है, उस पाप को तुम उस पर डालो जो हम पर आक्रमण करके हमारे प्रति पाप का आचरण करता है. (१२)


Mandala 5 · Verse 13
ता वर्त्तयितं जयुषा वि पर्वतमपिवन्तं शयेने धेनुमस्थिना. वृक्स्य चिद्रतिकामन्तरास्यायुवं शचीभर्गसिताममुञ्चतम्.. (१३)

The divine couple, with their strength, rescued the cow, even from the mountain, from the wolf's jaws, and from the bird's grasp.

हे अश्विनीकुमारो! तुम उसी जयशील रथ के द्वारा पर्वत की ओर जाने वाले मार्ग पर जाओ एवं शंयु के लिए बूढ़ी गाय को पुनः दुधारू बना दो. तुमने भेड़िए के मुंह में फंसी हुई वर्तिका नामक चिड़िया को अपने कर्मों के प्रभाव से छुड़ाया था. (१३)

Mandala 5 · Verse 14
एतं वां स्तोममश्विनावकर्मार्तिक्षमं भुगवो न रथम्. न्यम्क्षमं योषणां न मर्ये न्यं सूनुं तनयं दधानाः.. (१४)

O Ashvins, we offer you this hymn, worthy of praise, like the Bhugus offered their chariot. May we, with our wives and children, be ever devoted to you.

हे अश्विनीकुमारो! भृगुवंशियों ने जिस प्रकार रथ बनाया, उसी प्रकार हमने तुम्हारे लिए यह स्तोत्र बनाया है. जिस प्रकार दामाद को देने के लिए कन्या का शृंगार किया जाता है, उसी प्रकार हमने यह रथ सजाया है. हम इस स्तोत्र को यज्ञकर्ता पुत्र के समान सदा धारण करते हैं. (१४)

Mandala 5 · Verse 15
agnir jāgāra tam ṛcaḥ kāmayante 'gnir jāgāra tam u sāmāni yanti | agnir jāgāra tam ayaṁ soma āha tavāham asmi sakhye nyokāḥ

Mandala 5 · Verse 1
रथं यन्तं कुह को ह वां नरा प्रति घुमन्तं सुविताय भूषति. प्रातर्यावाणं विश्वं विशेविशे वस्तोर्वीस्तवीर्येहमानं धिया शमि.. (१)

Who, O heroes, drives your chariot, adorned for prosperity, towards the dawn? It is the swift-moving one, who, with his might, spreads his brilliance for every home.

रथ पर चलते हुए तुम दोनों को कौन मनुष्य, जो धन से युक्त है, सुन्दरता के लिए अलंकृत करता है? प्रातःकाल यात्रा करने वाले, घर-घर में धन-धान्य से युक्त होकर, शीघ्रता से चलने वाले तुम दोनों को कौन अलंकृत करता है? (१)

Mandala 5 · Verse 2
कुह स्विद्दोषा कुह वस्तोर्अश्विना कुहाभिपृत्वं करत: कुहोषतुः. को वां शयुत्रा विधवेव देवरं मर्ये न योष कृणुते सधस्थ आ.. (२)

Where do you dwell, O Ashvins, where do you rest? Where does your chariot travel? Who, like a widow awaiting her brother-in-law, invites you to share her dwelling?

हे अश्विनीकुमारों! तुम रात में कहाँ रहते हो? तुम्हारा समय कहाँ बीतता है? तुम कहाँ निवास करते हो? जिस प्रकार विधवा अपने देवर को और सधवा अपने पति को चारपाई पर बुलाती है, उसी प्रकार मेरे अतिरिक्त कौन यजमान तुम्हें यज्ञवेदी पर अपने अनुकूल बनाता है? (२)

Mandala 5 · Verse 3
प्रातर्जग्मे जरणेव काषया वस्तीर्वीस्तोर्यजता गच्छथ्यो गृहम्. कस्य ध्क्सा भवथः कस्य वा नरा राजपुत्रेव सवनाव गच्छथः.. (३)

Like aged ones in saffron robes, you go to your homes, having performed the sacrifice. To whom do you belong, O men, that you go to the sacrificial hall like princes?

हे अश्विनीकुमारों! जिस प्रकार प्रातःकाल परम ऐश्वर्य वाले राजाओं को जगाया जाता है, उसी प्रकार तुम्हें प्रातःकाल जगाने के लिए स्तुतियाँ पढ़ी जाती हैं। हे यज्ञ के योग्य अश्विनीकुमारों! तुम प्रतिदिन यजमान के घर जाते हो। तुम किस यजमान के दोष समाप्त करते हो एवं राजकुमारों के साथ किसके यज्ञ में जाते हो? (३)

Mandala 5 · Verse 4
युवा मृगेव वारणा मृगण्यवो दोषा वस्तोर्हविषा न ह्यामहे. युवं होत्रांमृतुथा जुहते नरेषं जनाय वहथः शुभस्पती.. (४)

You, like a lion and a deer, are sought by those who desire you. We are not harmed by the night or the dawn, for you carry us with offerings.

युवा मृग की तरह शिकार करने वाले, हे अश्विनीकुमारों! तुम रात-दिन बुलाता हूँ। हे यज्ञ के नेता अश्विनीकुमारों! यजमान समय-समय पर तुम्हारे लिए आहुति देते हैं। तुम वर्षा के जल के स्वामी होने के कारण यजमानों के लिए अन्न देते हो। (४)

Mandala 5 · Verse 5
युवां ह घोषा पर्यश्विना यती राज ऊचे दुहिता पृच्छे वां नरा. भूतं मे अह्न उत भूतमkveऽश्वावते रथिने शक्मवते.. (५)

O Ashvins, you two divine beings, the daughter of the king asked you, "What has been accomplished today, and what will be accomplished for the swift horseman and the chariot-driver?"

हे अश्विनीकुमारों! राजा कक्षीवान् की पुत्री मैं घोषा इधर-उधर दौड़कर तुम्हारी बात करती हूँ एवं तुम्हारे ही विषय में पूछती हूँ। तुम रात-दिन मेरे यहाँ रहो एवं अश्व व रथ से युक्त मेरे भतीजे को यहाँ से निकाल दो। (५)

Mandala 5 · Verse 6
युवं कवी षः पर्यश्रिणा रथं विशो न कृत्सो जरितुर्नशायथः। युवोर्हक्षा पर्यश्रिणा मधासा भरत निष्कृतं न योषणा.. (६)

You two, like skilled poets, have adorned the chariot with praise, and like a singer, you have made it resound. Your strength, adorned with praise, has brought forth abundance, like a woman bringing forth offspring.

हे अश्विनीकुमारो! तुम दोनों विद्वान् हो, तुम दोनों रथ पर चढ़कर स्तोता के घर जाते हो, तुम्हारे मधु को मधुमक्खियाँ इस प्रकार अपने मुँह में भर लेती हैं, जिस प्रकार युवती संभोग में रत रहती है। (६)

Mandala 5 · Verse 7
युवं ह भुज्युं युयमश्रिणा वशं युवं शिञ्जारमुशनामुपार्थुः। युवो रारावा परि सख्यमास्ते युवो रहमवसा सुम्ना चके.. (७)

You two, with your strength, have protected Bhujyu and Ashri, and Ushanā has attained your favor. Your friendship is a source of joy, and your protection brings us happiness.

हे अश्विनीकुमारो! तुमने भुज्यु, वश, अग्नि और उशना का उद्धार किया. हव्य देने वाला यजमान तुम्हारी मित्रता प्राप्त करता है. मैं तुम्हारी रक्षा के द्वारा मिलने वाले सुख की कामना करता हूँ. (७)

Mandala 5 · Verse 8
युवं ह कृशं युयमश्रिणा शयुं युवं विघ्नन्तं विधावामुरुष्यथः। युवं सनिभ्यः स्तनयन्तम्श्रिणाप व्रजम्पूर्णः सप्तास्यम्.. (८)

You two protect the weak and the sleeping, and rescue the one who obstructs. You two protect the one who roars like thunder from the cows, filling the enclosure.

हे अश्विनीकुमारो! तुमने कृश, शंयु, अपने सेवकों और विधवा वधिमती का उद्धार किया था. तुम ही अपने यजमानों के लिए गरजते हुए तथा गतिशील द्वार वाले मेघ को भेदकर जल बरसाते हो. (८)

Mandala 5 · Verse 9
जनिष्ट योष। पतयत्कनीनको वि चारुहन्वी रुधो दंसना अनु। आस्मे रीयन्ते निवनेव सिन्धवोऽस्मा अहे भवति तत्पतिवन्म्.. (९)

The wife, whose child is born, is adorned with beauty and strength. Rivers flow to the ocean, and so does the husband's wealth belong to her.

हे अश्विनीकुमारो! तुम्हारी कृपा से मैं युवती बन गई हूँ और मेरी कामना करने वाला पति आ गया है. तुम्हारे द्वारा की गई वर्षा के बाद पेड़पौधे उग आए हैं. जिस प्रकार नीचे बहने वाली नदियाँ सागर की ओर जाती हैं, उसी प्रकार पौधे इन की ओर बढ़ रहे हैं. इस पति को ऐसा यौवन प्राप्त हो, जिसे कोई नष्ट न कर सके. (९)

Mandala 5 · Verse 10
जीवं रूदन्ति वि मयन्ते अध्वरे दीर्धायुं प्रति तिं दीधियुर्नरः। वामं पितृभ्यो य इदं समेरिरे मयः पतिभ्यो जनयः परिष्यजे.. (१०)

May the mortals, seeking long life, lament and offer sacrifices, for the mothers have adorned themselves for the fathers, bestowing prosperity.

जो लोग अपनी पत्नियों के वियोग में रोते हैं, पत्नियों को यज्ञ में अपने समीप बैठाते हैं, उन्हें अपनी विस्तृत बाहों में समेटते हैं और उनसे संतान उत्पन्न करके उन्हें पितृयज्ञ में प्रेरित करते हैं, उनकी स्त्रियाँ सुख के साथ उनका आलिंगन करती हैं. (१०)


Mandala 5 · Verse 11
न तस्य विद्म तदु षु वोचत युवा ह यद्युत्त्वाः क्षेति योनषु। प्रियोयस्य वृषभस्य रेतिनो गृहं गमेमश्रिणा तदुश्मसि.. (११)

We know not His true nature, nor can we fully describe Him, though He is the father of all. May we reach His abode, for we desire to be united with Him.

हे अश्विनीकुमारो! मैं पतिपत्नी के संसर्ग वाले सुख को नहीं जानती. मुझे उस विषय में

Mandala 5 · Verse 1
समानमु त्वं पुरुहूतमुक्थ्यं रथं त्रिचक्रं सवना गणिग्मतम्. परिऽमानं विविध्यं सुवक्तिभियं व्युष्टा उषसो हवामहे.. (१)

We invoke you, O greatly praised and worthy one, with hymns and offerings, as you arrive in your three-wheeled chariot, radiant as the dawn.

हे अश्विनीकुमारो! तुम्हारे पास एक ही प्रशंसित एवं बहुतों द्वारा आहूत रथ है. तीन पहियों वाला वह रथ यज्ञों में जाता है. हम उस चारों ओर घूमने वाले एवं यज्ञ के लिए हितकारी रथ को प्रतिदिन प्रातःकाल स्तुतियों द्वारा बुलाते हैं. (१)

Mandala 5 · Verse 2
प्रातर्युजं नास्त्याधि तिष्ठथः प्रातर्वाणणं मधुवाहनं रथम्. विशो येन गच्छथो यजवरीनरा कीरिश्रृंङ्घं होतुर्मन्तमश्विना.. (२)

O Ashvins, you who harness the dawn and ride in chariots of honey, by whose power the people advance and the priests offer hymns, we invoke you.


Mandala 5 · Verse 3
अध्वर्युं वा मधुपाणिं सुहस्तमग्निं वा धृतदक्षं दम्नमुम्, विप्रस्य वा यत्सवनानि गच्छथोऽत आ यात मधुपेयमश्र्विना.. (३)

O Ashvins, come to us, whether we call the Adhvaryu, the honey-handed one, or the fire-wielding one, or the Soma preparations of the priest; come to partake of this honeyed drink.

हे अश्विनीकुमारो! तुम मुझ हाथ में सोम धारण करने वाले, शोभा नहस्त, शक्तिशाली, दानेच्छुक एवं अग्नि का आधान करने वाले अध्वर्यु के पास आओ. यदि तुम किसी बुद्धिमान् यजमान के यज्ञों में जा रहे हो, तब भी उन यज्ञों को छोड़ कर हमारा सोम रस पीने के लिए आओ. (३)

Mandala 5 · Verse 4
त्वां जना ममसत्येष्बिन्द्र सन्तस्थाना वि ह्ययन्ते समीके. अत्रा युजं कृणुते यो हविष्मन्नासुन्वन्ता सख्युं वहि शूरः.. (४)

O Indra, those who are established in truth are protected by you, and they move forward in battle. The strong one who offers oblations and worships you, O friend, becomes victorious.

Mandala 5 · Verse 5
धनं न स्पृशं बहुलं यो अस्मै तीव्रान्त्सोमाँ आसुโนति प्रयस्वान्। तस्मै शन्नूत्सुतुकान्प्रातरहो नि स्वछन्त्युवन्ति हन्ति वृत्रम्.. (५)

He who does not covet abundant wealth, but offers to the divine the potent Soma juice with devotion, to him the dawn arrives with joy, and he conquers all obstacles.

जो द्रव्य वाला यजमान इंद्र के लिए इस प्रकार नशीला सोम रस निचोड़ता है, जिस प्रकार कोई व्यक्ति दरिद्र को देने के लिए गाय या अश्व आदि धन का संस्कार करता है, इंद्र उसके शक्तिशाली, संतानसहित एवं शोभन आयुधों वाले शत्रुओं को उससे अलग हटाते हैं एवं उसका उपद्रव शांत करते हैं। (५)

Mandala 5 · Verse 6
यस्मिन्नयं दधिमाशंसमिन्द्रं यः शिप्राय मघवा कामममसे। आराच्चित्सन्भयतामस्य शत्रुन्स्यै हन्मा जन्या नमन्ताम्.. (६)

May Indra, in whom this mortal places his faith, and for whom the powerful one offers his desires, destroy his enemies from afar, and may all beings bow down to him.

हमने जिन इंद्र की स्तुति की है, वे धनवान इंद्र हमारी इच्छा पूरी करते हैं. इंद्र के शत्रु दूर होते हुए भी डरते हैं एवं शत्रुओं के जनपद की संपत्ति इंद्र के अधिकार में आ जाती है. (६)

Mandala 5 · Verse 7
आराच्छत्रुमप बाधस्व दूरमुग्रो यः शम्बः परुहूत तेन। अस्मे धोहे यवमदगोमदिन्द्रं कृधी धियं जरित्रे वाजरत्नाम्.. (७)

O Indra, repel the distant enemy, the fierce one who attacks us. Grant us abundant grain and cattle, and bestow upon us, your worshipper, a brilliant and powerful intellect.

हे बहुतों द्वारा बुलाए गए इंद्र! तुम्हारा जो उग्र वज्र है, उससे शत्रु को हमारे पास से भगाओ. हे इंद्र! हमें जो और गायों वाला धन दो. तुम अपने स्तोता की स्तुति अन्न एवं रत्न उत्पन्न करने वाली बनाओ. (७)

Mandala 5 · Verse 8
प्र यमन्तर्वृषवा सो अगन्तीव्राः सोमा बहुलान्नास इन्द्रम्। नाह दामानं मघवा नि यंस्त्रि सुन्वते वहति भूरि वाम्.. (८)

The Soma, when drunk with fervor, invigorates Indra, who, with his mighty power, bestows abundant sustenance upon the worshipper.

अनेक धाराओं में माधुर्य बरसाता हुआ एवं तेज नशीला सोम रस विविध अन्नो से मिलकर जिस समय इंद्र के शरीर में प्रवेश करता है, उस समय इंद्र सोम रसदाता यजमान को कभी नहीं रोकते. इसके अतिरिक्त वे सोम रस निचोड़ने वाले यजमान को अधिक मात्रा में शोभन धन देते हैं. (८)

Mandala 5 · Verse 1
अच्छा म इन्द्रं मतयः स्वर्वित्: सधीचीर्विंश्वा उशतीरनुव्रत. परि ष्षजन्ते जनयो यथा पतिं मर्ये न शुन्ध्युं मधवानमूत्मे.. (१)

May my thoughts, like devoted wives, embrace the brilliant, all-knowing Indra, who is the source of bliss and strength.

मुझे अंगिरागोत्रीय कृष्ण ऋषि की सब कुछ प्राप्त कराने वाली, विस्तृत एवं अभिलाषापूर्ण स्तुतियां इंद्र की भली प्रकार स्तुति करती हैं. पत्नियां जिस प्रकार पति का स्पर्श करती हैं, उसी प्रकार मेरी स्तुतियां रक्षा पाने के हेतु धनस्वामी इंद्र के समीप जाती हैं. (१)

Mandala 5 · Verse 2
न घा त्वद्विग्गप वेति मे मनस्वे इल्काएं पुरुहूत शिष्य. राजेव दस्म नि षडोऽधि बहिष्षस्मिन्त्सु सोमेऽवपानमस्तु ते.. (२)

May my mind not be troubled by any fear, O mighty Indra, the bestower of boons. May you, the destroyer of enemies, find satisfaction in this Soma offering.

हे बहुतों द्वारा बुलाए गए एवं दर्शनीय इंद्र! तुम्हारी ओर अभिमुख मेरा मन अन्य किसी की ओर नहीं जाता है. मैं अपनी अभिलाषा तुम्ही पर स्थापित करता हूं. राजा जिस प्रकार अपने महल में बैठता है, उसी प्रकार तुम यज्ञ के कुशों पर बैठो. इस शोभन सोम के प्रति तुम्हारी पीने की अभिलाषा हो. (२)


Mandala 5 · Verse 3
विष्भूवरेन्द्रो अमतेरूत क्षुधः स इन्द्रायो मधवा वस्तु ईशते. तस्येदिमे प्रवणे सप्त सिन्धवो वयो वर्धन्ति वृष्भस्य शुष्मिणः.. (३)

Indra, the mighty lord, is the sustainer of all, the giver of strength and nourishment. The seven rivers flow to him, increasing the power of the strong and vigorous one.

इंद्र दुर्बुद्धि और भूख से बचाने के लिए हमारे चारों ओर रहें. वे ही धनस्वामी इंद्र समस्त संपत्तियों के स्वामी हैं. अभिलाषापूर्वक एवं तेजस्वी की आज्ञा से ये सात नदियां देश में अन्न बढ़ाती हैं. (३)

Mandala 5 · Verse 4
वयो न वृष्ं सुप्लाशामासदन्त्सोमास इन्द्रं मन्दनश्र्मुषद्ः। प्रैषामनीकं शक्सा दविद्युतद्दिदस्वश्शर्मनवे ज्योतिरार्यम्.. (४)

May the Soma-drinkers, joyful and strong, approach Indra, who is like a bull with beautiful leaves. His shining form flashes like lightning, bringing bright light and protection to the Arya.

पक्षी जिस प्रकार शोभन पत्तों वाले वृक्षों का सहारा लेते हैं, उसी प्रकार नशा करने वाले एवं पात्रों में भरे हुए सोम इंद्र के पास जाते हैं. सोम के नशे से इंद्र का मुख चमकने लगता है. इंद्र मनुष्यों के लिए सूर्य नामक उत्तम ज्योति दें. (४)

Mandala 5 · Verse 5
कृत्ं न शृञ्जी वि चिनोति देवने संवर्ग यन्मघवा सूर्यं जयत्। न तच्चे अन्यो अनु वीर्यं शक्रं पुराणो मघवन्नूतनः...(५)

The divine Indra, the powerful, conquers the sun, a feat no other, ancient or new, can achieve through strength.

जुआरि जिस प्रकार जुआघर में अपने को जीतने वाले दूसरे जुआरी को खोजता है, उसी प्रकार धनस्वामी इंद्र वर्षा का विरोध करने वाले सूर्य को हराने के लिए ढूंढता है. हे धनस्वामी इंद्र! कोई भी नया-पुराना व्यक्ति तुम्हारी शक्ति के अनुसार काम नहीं कर सकता. (५)

Mandala 5 · Verse 6
विशंविशं मघवा पर्यशायत जनानां धेना अवचाकशदवृषा. यस्याहं शक्रः सवनेषु रुणयति स तीर्त्रेः宋ः सहते पूतन्तः...(६)

The mighty Indra, protector of all, surveys the people, and the divine cows bestow their nourishment. He who is praised by Indra in sacrifices, with his offerings, overcomes all obstacles.

धनस्वामी इंद्र प्रत्येक मनुष्य में सोते हैं. अभिलाषापूर्वक इंद्र मनुष्यों की स्तुतियों पर ध्यान देते हैं. शक्र जिसके यज्ञों में रमण करते हैं, वह नशीला सोमरस पीकर शत्रुओं को पराजित करता है. (६)

Mandala 5 · Verse 7
आपो न सिन्धुभिमं यत्समक्षरन्सोमास इन्द्रं कुल्याइव हृदम्. वर्धन्ति विप्रं महो अस्य सादने यवं न वृश्चिदिष्येन दातुना.. (७)

As rivers flow into the ocean, so do the Soma juices fill Indra, strengthening him like grain for the sower. His greatness grows through this offering, bestowing gifts.

जब सोमरस सागर की ओर जाने वाली नदियों के समान अथवा तालाब की ओर जाने वाली नालियों के समान इंद्र के पास जाते हैं, तब মেধवी ब्राह्मण यज्ञ में इंद्र का तेज वर्षा के दिव्य जल से बढ़े हुए जौ के समान बढ़ा देते हैं. (७)

Mandala 5 · Verse 1
आ यात्विन्द्रः स्वपतिर्मदय यो धर्मणा तूतुजानस्तुविष्मान् । प्रत्यक्षणो अति विश्वा सहास्यपरेण महता वृष्णेन ।। १ ।।

May Indra, the lord of strength, come to gladden us, who is ever-increasing in power and glory, and who, with his mighty prowess, overcomes all obstacles.

वे धनस्वामी इंद्र प्रसन्नता पाने के लिए अपने रथ में बैठकर हमारे यज्ञ में आवें, जो शीघ्रता से बढ़कर शत्रु के बलों को अपनी असीमित शक्तियों से क्षीण करते हैं. (१)

Mandala 5 · Verse 2
सुक्ष्मा रथः सुयमा हरी ते मिम्यक्ष वज्रो नृपते गभस्तौ । शीभं राजन्त्सुपथा याह्यवाड् वर्धमि ते पपुषो वृष्याणि ।। २ ।।

O King, your chariot is swift and well-controlled, its horses are powerful and eager, like a thunderbolt in your grasp. May you travel swiftly on a good path, and may your strength grow ever greater.

हे मनुष्यों के पालक इंद्र! तुम्हारा रथ शोभन स्थिति वाला, तुम्हारे घोड़े वश में रहने वाले एवं वज्र तुम्हारी बाहों में रहने वाला है. हे स्वामी इंद्र! शोभन मार्ग द्वारा शीघ्र हमारे सामने आओ. हम सोमरस पिलाकर तुम्हारी शक्ति बढ़ाते हैं. (२)

Mandala 5 · Verse 3
एन्द्रावहो नृपतिं वज्रबाहुमुग्रमुग्रासस्तृविवास एनम् । प्रत्यक्षं वृष्भं सत्यशुष्मेमस्मात्रा सधमादो वहन्तु ।। ३ ।।

May Indra, the thunderbolt-armed king, and the powerful Vrishabha, with true strength, carry this ruler, who is fierce and a protector, to the highest joy.

शक्तिशाली, विशाल शरीर वाले एवं परस्पर प्रसन्न रहने वाले इंद्र के घोड़े मनुष्यों के पालक, हाथ में वज्र धारण करने वाले, शक्तिशाली, शत्रु सेनाओं को निर्बल बनाने वाले, अभिलाषापूर्वक व विवादरहित शक्ति वाले इंद्र को हमारे समीप लावें. (३)

Mandala 5 · Verse 4
अक्रन्ददग्निः स्तनयन्निव द्यौःक्षमामा रेरिहद्वीरुधः समञ्जन्. सधो जज्ञानो वि हिमीद्धो अख्यदा रोदसी भानुना भात्यन्त.. (४)

The fire roared like the thundering sky, licking the earth and adorning the plants. Born together, it blazed forth, illuminating the heavens and the earth with its brilliance.

Mandala 5 · Verse 5
प्र भूर्यजन्तमं महा विपोधां मूरा अमूरं पुरां दर्माणम्। नयन्तो गर्भा वनां थियं धुहिंरश्मश्रुं नावीणं धनर्म्.. (५)

The wise, leading the ignorant, protect the divine knowledge, like a mother protecting her child, and uphold righteousness.

हे स्तोता! तुम जयशील, महान् एवं मेधावियों को धारण करने वाले अग्नि की स्तुति करने में समर्थ बनो. सभी लोग बुद्धिमान्, पुरियों को नष्ट करने वाले, अरणि के गर्भस्वरूप, स्तुतियोग्य, हरे रंग के बालों के समान, ज्वालाओं से युक्त एवं प्रतीकर स्तोत्रों वाले अग्नि को हव्य देकर अपने कर्मों को प्राप्त करते हैं. (५)

Mandala 5 · Verse 1
जगृभ्मा ते दक्षिणमिन्द्र हस्तं वसुयवो वसुपते वसूनाम्। विद्मा हि त्वा गोपतिं शूर गोनासमस्थभ्यं चित्रं वृष्णं रयिं दाः.. (१)

O Indra, possessor of wealth and riches, we have grasped your right hand, knowing you as the lord of cows and a hero. Grant us abundant, radiant wealth.

हे बहुत से धनों के स्वामी इंद्र! हम धन की अभिलाषा से तुम्हारा दायां हाथ पकड़ते हैं. हे शूर इंद्र! हम तुम्हें बहुत सी गायों का स्वामी जानते हैं. तुम हमें वर्षक एवं विचित्र धन दो. (१)

Mandala 5 · Verse 2
स्वायुधं स्ववसं सुनीथं चतुः समुद्रं धरुणं रयीणाम्। चर्कृत्यं शंस्यं भूरवारमस्थभ्यं चित्रं वृष्णं रयिं दाः.. (२)

Grant us abundant, praiseworthy, and ever-increasing wealth, which is well-managed, self-sustaining, and a source of strength, capable of supporting all.

हे इंद्र! हम तुम्हें शोभन आयुध वाला, उत्तम रक्षा से युक्त, सुंदर नयनों वाला, चारों सागरों को यश से व्याप्त करने वाला, धनों को धारण करने वाला, बार-बार स्तुति करने योग्य एवं अनेक दुःखों का निवारक जानते हैं. तुम हमें वर्षक एवं विचित्र धन दो. (२)

Mandala 5 · Verse 3
सुब्रह्मणं देववन्तं बृहन्तमुरं गम्भीरं पृथुबुध्नमिन्द्र। श्रुतऋष्मिमुग्रमभिमातिबाहमस्थभ्यं चित्रं वृष्णं रयिं दाः.. (३)

O Indra, bestower of riches, grant us abundant wealth, you who are glorious, divine, vast, profound, and mighty, the destroyer of enemies.

हे इंद्र! तुम हमें शोभन स्तुतियों वाला, देवों को मानने वाला, महान्, विस्तृत, गंभीर, विस्तृत मूल वाला, विशिष्ट ज्ञान वाला, शक्तिशाली व शत्रुपरभकारी पुत्र दो. तुम हमें वर्षक और विचित्र धन दो. (३)


Mandala 5 · Verse 4
सनद्धाजं विप्रवीरं तरुं धनस्पृतं शृशुवांसं सुदक्षम्। दस्युहन्ं पूभिमिन्द्र सत्यमस्थभ्यं चित्रं वृष्णं रयिं दाः.. (४)

O Indra, giver of wealth, bestow upon us a strong, heroic, and wise warrior, a slayer of enemies, who is swift and powerful.

हे इंद्र! तुम हमें अन्न प्राप्त करने वाला, मेधावी, तारने वाला, धनपूर्ण करने वाला,

Mandala 5 · Verse 5
अश्वानन्तं रथिनं वीरवन्तं सहस्रिणं शतें वाजमिन्द्र. भद्र्रात विप्रवीरं स्वर्म्समभ्यं चित्रं वृषणं रयिं दाः.. (५)

O Indra, bestow upon us abundant wealth, horses, charioteers, heroes, and thousands of cattle. Grant us prosperity, heroic sons, and a glorious, powerful, and radiant fortune.

हे इंद्र! तुम हमें घोड़ों से युक्त, रथस्वामी, वीर पुरुषों वाला, सैंकड़ों और हजारों संपत्तियों वाला, कल्याणकारी सेवकों से घिरा हुआ, विप्रों व वीरों से युक्त एवं सबकी सेवा करने वाला पुत्र दो. तुम हमें वर्षक एवं विचित्र धन दो. (५)

Mandala 5 · Verse 1
अहं दां गृणते पूर्वं वस्वहं ब्रह्म कृणवं मह्यं वर्धनम् । अहं भुवं यजमानस्य चोदितायज्ननः साक्षि विश्वस्मिन्भरे.. (१)

I am the giver, the sustainer, the source of all wealth, and the creator of all. I am the inspirer of the sacrificer, the witness to all existence.

मैंने अपने स्तोता को अधिक धन दिया। मैंने अपनी वृद्धि करने वाले यज्ञों का अनुष्ठान किया. मैं अपने यजमान को धन देता हूँ तथा यज्ञ न करने वाले सभी को युद्ध में पराजित करता हूँ. (१)

Mandala 5 · Verse 2
सो चिणु सखग्रा नर्य इनः स्तुतश्रकृत्स्य इन्द्रो मावते नरे. विश्वाशु धूर्षु वा जकृत्येषु सत्वते वृत्रे वाष्पश्भि शूर मन्दसे.. (२)

O Indra, praised by many, you are the bestower of strength and wealth, the protector of the righteous. You are the mighty hero who, with your thunderbolt, destroys enemies and brings joy to the devoted.

मित्रता के कारण मनुष्यों के हितैषी, सबके ईश्वर, सबके द्वारा प्रशंसित इंद्र मुझ जैसे व्यक्ति द्वारा बार-बार सेवनीय हैं. हे सज्जनों के पालक एवं शूर इंद्र! सभी कठिन कार्यों एवं शक्ति द्वारा संपन्न होने वाले कर्मों में तथा जलप्राप्ति के लिए सब तुम्हारी पूजा करते हैं. (२)

Mandala 5 · Verse 3
के ते नर इन्द्र ये त इषे ये ते सुम्नं सधन्यश्मियक्षान्। के ते वाजायासुराय हिन्विरे के अप्सु स्वास xlsūryasūryaiḥ pautsyai.. (३)

Who are those men, O Indra, who for sustenance, for well-being, and for worship, are strengthened for the battle, and who, with the sons of Surya, are invigorated in the waters?

हे इंद्र! वे महान् लोग कौन हैं जो तुमसे अन्न, धनसहित सुख एवं कल्याण प्राप्त करते हैं? तुम्हें असुरविनाश योग्य शक्ति प्रदान करने वाला सोमरस देने वाले लोग कौन हैं? अपनी उपजाऊ भूमियों पर वर्षा का जल एवं बल पाने के लिए तुम्हें हवि देने वाले लोग कौन हैं? (३)

Mandala 5 · Verse 4
भुवस्तमिन्द्रं ब्रह्माणा महान्भवो विशेषेषु सवनेषु यजियः। भुवो नृश्शौत्सो विश्वस्मिन्भरे ज्येष्ठभ् मन्त्रो विश्वचर्चणे.. (४)

Indra, the great one, is praised by Brahma in special sacrifices. He is the most honored in all battles and the foremost in all assemblies.

हे इंद्र! तुम हमारी स्तुति से महान् बनो. तुम सभी यज्ञों में यज्ञ का भाग पाने के योग्य हो. तुम सभी युद्धों में शत्रुओं को हराने वाले बनो. हे सबके दर्शक इंद्र! तुम सर्वोत्तम मंत्र के समान हो. (४)


Mandala 5 · Verse 5
अवा नु कं ज्यायान् यजवनसो मही त ओमात्रां कृष्टयो विदुः। असो नु कमजरो वर्धाश्र विश्षदेता सवना तूतुमा कृषे.. (५)

Who indeed is greater than the sacrificer, whose greatness the people know? May this immortal, ever-growing strength be ours, to achieve our desires.

हे सर्वोत्तम इंद्र! तुम स्तोताओं की शीघ्र रक्षा करो. मनुष्य तुम्हारी महती रक्षाशक्ति को जानते हैं. तुम जरारहित होकर हवि आदि से शीघ्र बढ़ो एवं इन सभी यज्ञों को शीघ्र पूर्ण करो. (५)

Mandala 5 · Verse 1
महदुल्म्बं स्थविरं तदासीद्घ्नेनाविविष्टः प्रविवेशिष्यापः। विश्वा अपश्यद्दुधा ते अग्ने जातवेदस्तन्चो देव एकः॥ (१)

The great, ancient womb, filled with darkness, entered the waters. Then, O Agni, the all-knowing, divine one, saw all beings.

देवों ने अग्नि से कहा—"हे अग्नि! वह आवरण विशाल एवं स्थूल था, जिससे लिपटे हुए तुम जलों में प्रविष्ट हुए थे. हे जातवेद अग्नि! तुम्हारे विविध प्रकार के शरीरों को एक देव ने देखा." (१)


Mandala 5 · Verse 2
को मा દર્શ કતમઃ સ દેવો યો મે તન્વો બહુધા પર્યપશ્યત્। વાહ મિત્રાવરૂણા ક્ષિયન્ત્યનેવિર્શ્વા સમિધો દેવયાનીઃ॥ (૨)

Who is the seer, who the divine being, who saw my body in many forms? O Mitra and Varuna, you rule over the divine fires that sustain the world.

अग्नि ने उत्तर दिया—"मुझे किसने देखा था? वह कौन सा देव है, जिसने मेरे विविध शरीरों को देखा था? हे मित्र और वरुण! मुझ अग्नि की दीप्त एवं देवयज्ञ साधन देह कहाँ है? यह बताओ." (२)

Mandala 5 · Verse 3
ऐच्छाम ત્વા બહુધા જાતવેદઃ પ્રવિષ્ટમગ્ને અસ્વોષધીષુ। તં ત્વા યમો અચિકેચિત્તભાનો દશાન્તરૂપ્યાદતિરોચમાનમ્॥ (૩)

O Agni, born of many desires, you pervade all beings and herbs. Yama, the lord of death, has perceived you, shining brilliantly, as the ultimate form.

देव कहने लगे—"हे जातवेद अग्नि! जलों और औषधियों में अनेक प्रकार से घुसे हुए तुम्हें हम कहाँ खोजें? हे विचित्र किरणों वाले अग्नि! दस आवासस्थानों में अत्यंत प्रकाशमान तुम्हें यम ने पहचान लिया था." (३)

Mandala 5 · Verse 4
હોત્રાદહં વરુણં વિષ્યદાયં નેદેવ મા યુનજન્ત્ર દેવાઃ। તસ્ય મે તન્વો બહુધા નિવિષ્ટા અતમર્થં ન ચિકેતાહમગ્નિઃ॥ (૪)

I, the Hotri (offerer of sacrifice), invoke Varuna, the divine one. The gods do not bind me. My forms are spread out in many ways, and for that reason, I, Agni, do not know myself.

अग्नि बोले—"हे वरुण! मैं हव्य-वाहन के कार्य से डरकर यहाँ आ गया हूँ. मैं चाहता हूँ कि देवगण मुझे पहले के समान हव्य वाहन के कार्य में न लगावें. इसी भय के कारण मेरा शरीर अनेक प्रकार से जल में छिपा है. मैं अब यह हव्यवहन का काम स्वीकार नहीं करूँगा." (४)

Mandala 5 · Verse 5
एहि मनुદેવયુર્જકામોડરકૃત્યા તમસિ ક્ષેષ્યગ્ને। સુગાન્યપથઃ કૃણુહિ દેવયાનીન્વહ હવ્યાનિ સુમનસ્યમાનઃ॥ (૫)

O divine one, who art the source of life and the dispeller of darkness, may you lead us on the path of righteousness, carrying our offerings with a willing heart.

देवों ने कहा—"हे अग्नि! आओ, यजमान देवों का अभिलाषी एवं यज्ञ करने का इच्छुक है. तुम तेजपुंज को धारण करते हुए भी अंधकार में हो. देवों के प्रति आने वाले लोगों का मार्ग सरल बनाओ एवं प्रसन्नचित्त होकर हव्य-वाहन करो. (५)

Mandala 5 · Verse 6
तस्माद्भिर्या वरुण दूरंमयं गौरो न क्षेप्रोरविजे जयायाः (६)

Therefore, O Varuna, may we be far from that which is evil, and may we be victorious in the battle of life.

अग्नि ने कहा—“हे देवो! रथी जिस प्रकार मार्ग पर चला जाता है, उसी प्रकार मेरे तीन भाई क्रमशः हव्य-वहन करते हुए समाप्त् हो गए, हे वरुण! इसी डर से मैं दूर चला आया हूं, गौग्ग्म जिस प्रकार धनुर्धारी की ज्या से डरता है, उसी प्रकार मैं हव्य वहन कार्य से कांपता हूं.” (६)

Mandala 5 · Verse 7
कर्मस्त आयुर्जरं यदग्ने यथा युत्को जातवेदो न रिष्याः, अथा वहासि सुमनस्यमानो भागं देवेभ्यो हविः सुजात.. (७)

O Agni, the performer of actions, may your life force be strong and unhindered, so that, with a willing heart, you may carry our offerings, well-prepared, to the gods.

देवों ने कहा—“हे अग्नि! हम तुम्हें जरारहित आयु प्रदान करते हैं. हे जातवेद! इस आयु से युक्त होकर तुम नहीं मरोगे, हे शोभन जन्म वाले अग्नि! तुम प्रसन्नचित्त होकर यजमान द्वारा दिए गए हव्य का भाग देवों के पास ले जाओ.” (७)

Mandala 5 · Verse 8
प्रयाजान्मे अनुयाजांश्च केवलान्ऊर्जस्वन्तं हविषो दत्त भागम्, घृतं चापां पुरुषं चौषधीनाम्नेऽग्नं दीर्घमायुरस्तु देवाः.. (८)

May the oblations, auxiliaries, and offerings be full of vigor, and may the divine powers grant us long life, strength, and nourishment from the waters and plants.

अग्नि ने कहा—“हे देवो! तुम मुझे यज्ञ के प्रारंभ वाले, अंत वाले तथा असाधारण हव्य भाग अधिक मात्रा में दो. तुम मुझे जल का सार अंश घृत, औषधियों से उत्पन्न प्रधान भाग एवं दीर्घ आयु दो.” (८)

Mandala 5 · Verse 9
तव प्रयाजा अनुयाजाश्च केवलं ऊर्जस्वन्तो हविषः सन्तु भागाः, तवाग्ने यज्ञाऽयम्स्तु सर्वस्तुभ्यं नमन्तां प्रदिश्श्रतसः.. (९)

May all your offerings be full of vigor, O Agni, and may this entire sacrifice be yours, with all directions bowing down to you.

देवों ने कहा—“हे अग्नि! यज्ञ के प्रारंभ वाले, अंत वाले तथा असाधारण हव्य भाग अधिक मात्रा में तुम्हारे हों. यह पूरा यज्ञ तुम्हारा हो और चारों दिशाएं तुम्हारे सामने आदर से झुकें.” (९)


Mandala 5 · Verse 10
विश्वे देवाः शास्तन मा यथैह होता वृत्तो मनवै यन्त्रिषध, प्र मे भूत भागधेयं यथा वो येन पथा हव्यमा वो वहानि.. (१०)

May the divine beings in the universe protect me, so that I may perform my duties here with a pure mind. Grant me the means to offer my oblations to you through the proper path.

अग्नि ने मन ही मन कहा—“हे विश्वेदेवो! तुमने मुझे होता के रूप में वर्ण किया है. मुझे यहां बैठकर जो मंत्र पढ़ना है, वह मुझे बताओ. मेरा और तुम्हारा भाग कौन सा है, यह मुझे बताओ. मुझे वह मार्ग भी बताओ, जिससे मैं हव्य तुम्हारे पास ले जाऊं.” (१०)

Mandala 5 · Verse 11
अहं होता न्यसींदं यजीयान् विश्वे देवा मरुतो मा जुन्नन्ति, अहरहर्ग्निनाऽथर्येवं वां ब्रह्मा समिन्द्र्दवति साहूतिर्वाम्.. (११)

I am the priest, the most worthy to sacrifice; all the gods and Maruts invoke me. Daily, with Agni, I offer this oblation to you, O Indra and Soma.

Mandala 5 · Verse 12
महिम्न एषां पितरश्नेशिरे देवा देवेष्वदृरपि क्रतुम. समन्विव्यचुरत यान्यविपुरेषां तन्नूषु नि विविशुः पुनः..(१२)

The gods, having attained the greatness of these ancestors, entered into their very beings, and again, having accomplished their desires, they entered into their forms.

Mandala 5 · Verse 13
viśve devā no adyā svastaye vaiśvānaro vasur agniḥ svastaye | devā avantv ṛbhavaḥ svastaye svasti no rudraḥ pātv aṁhasaḥ

Mandala 5 · Verse 14
svasti mitrāvaruṇā svasti pathye revati | svasti na indraś cāgniś ca svasti no adite kṛdhi

Mandala 5 · Verse 15
svasti panthām anu carema sūryācandramasāv iva | punar dadatāghnatā jānatā saṁ gamemahi

Mandala 5 · Verse 1
यते यमं वैवस्वतं मनो जगाम दूरकम्. तत आ वर्तयाम्सीह क्षयाय जीवसे.. (१)

When the mind wanders far to Yama, the son of Vivasvan, it is then recalled to this world for the purpose of living.

विवस्वान् के पुत्र यम के पास, जो दूर रहते हैं, तुम्हारा जो मन गया है, उसे हम लौटाते हैं. तुम इस संसार में निवास करने के लिए जीते हो. (१)

Mandala 5 · Verse 2
यते दिवं यत्पृथिवीं मनो जगाम दूरकम्. तत आ वर्तयाम्सीह क्षयाय जीवसे.. (२)

May the mind, which has gone far to heaven or earth, be brought back here for the purpose of living in this world.

तुम्हारा जो मन दूर तक पृथ्वी या स्वर्ग के पास गया है, उसे हम लौटाते हैं. तुम इस संसार में निवास करने के लिए जीते हो. (२)


Mandala 5 · Verse 3
यते भूमिं चतुर्भिष्टि मनो जगाम दूरकम्. तत आ वर्तयाम्सीह क्षयाय जीवसे.. (३)

The mind, having wandered far across the earth, now returns here for the cessation of life.

तुम्हारा जो मन चारों ओर ढाल वाली धरती पर दूर तक गया है, उसे हम लौटाते हैं. तुम इस संसार में निवास करने के लिए जीते हो. (३)

Mandala 5 · Verse 4
यते चतस्रः प्रदिशो मनो जगाम दूरकम्. तत आ वर्तयाम्सीह क्षयाय जीवसे.. (४)

When the mind wanders far in the four directions, bring it back here for the sake of life's cessation.

तुम्हारा जो मन चारों दिशाओं में दूर तक चला गया है, उसे हम वापस लौटाते हैं. तुम इस संसार में निवास करने के लिए जीते हो. (४)

Mandala 5 · Verse 5
यते समुद्रमर्णवं मनो जगाम दूरकम्, तत आ वर्तयाम्सीह क्षयाय जीवसे.. (५)

When the mind wanders far into the ocean of worldly desires, bring it back here for the cessation of suffering and for life.

तुम्हारा जो मन जल से भरे हुए दूरवर्ती समुद्र के पास गया है, उसे हम वापस लौटाते हैं. तुम इस संसार में निवास करने के लिए जीते हो. (५)

Mandala 5 · Verse 6
यते मरीचि: प्रवतो मनो जगाम दूरकम्, तत आ वर्तयाम्सीह क्षयाय जीवसे.. (६)

The mind, like a ray of light, has wandered far away; now bring it back here for the cessation of worldly existence.

तुम्हारा जो मन दूर तक चारों ओर जाने वाली सूर्यकिरणों के पास गया है, उसे हम वापस लौटाते हैं. तुम इस संसार में निवास करने के लिए जीते हो. (६)

Mandala 5 · Verse 7
यते अपो यदोषधीर्मनो जगाम दूरकम्, तत आ वर्तयाम्सीह क्षयाय जीवसे.. (७)

May the mind that has wandered far to the waters and plants be brought back here for the sustenance of life.

तुम्हारा जो मन दूरवर्ती जल एवं औषधियों में गया है, उसे हम वापस बुलाते हैं. तुम इस संसार में निवास करने के लिए जीते हो. (७)

Mandala 5 · Verse 8
यते सूर्य यदुपस: मनो जगाम दूरकम्, तत आ वर्तयाम्सीह क्षयाय जीवसे.. (८)

O Sun, when the mind wanders far away, bring it back here for the sake of living.

तुम्हारा जो मन दूरवर्ती सूर्य एवं उषा के पास गया है, उसे हम वापस बुलाते हैं. तुम इस संसार में निवास करने के लिए जीते हो. (८)

Mandala 5 · Verse 9
यते पर्वतानृबृहो मनो जगाम दूरकम्, तत आ वर्तयाम्सीह क्षयाय जीवसे.. (९)

When your mind wanders far to the great mountains, bring it back here to live for your own well-being.

तुम्हारा जो मन दूरवर्ती पर्वतों तक गया है, उसे हम वापस बुलाते हैं. तुम इस संसार में निवास करने के लिए जीते हो. (९)

Mandala 5 · Verse 10
यते विश्वमिदं जगन्मनो जगाम दूरकम्, तत आ वर्तयाम्सीह क्षयाय जीवसे.. (१०)

When this world of minds wanders far away, bring it back here for the sake of life's cessation.

तुम्हारा जो मन इस विश्व में दूर तक चला गया है, उसे हम वापस बुलाते हैं. तुम इस संसार में निवास करने के लिए जीते हो. (१०)


Mandala 5 · Verse 11
यते परा: परावतो मनो जगाम दूरकम्, तत आ वर्तयाम्सीह क्षयाय जीवसे.. (११)

When the mind wanders far to distant realms, bring it back here to live for the sake of liberation.

तुम्हारा जो मन अतिशय परवर्ती स्थानों में दूर तक चला गया है, उसे हम वापस बुलाते हैं. तुम इस संसार में निवास करने के लिए जीते हो. (११)

Mandala 5 · Verse 12
यते भूतं च भविष्यं च मनो जगाम दूरकम्, तत आ वर्तयाम्सीह क्षयाय जीवसे.. (१२)

When the mind wanders far into the past and future, bring it back to the present for the sake of life's cessation.

हे सुबंधु! तुम्हारा जो मन किसी दूरवर्ती भू एवं भविष्य स्थान पर गया है, उसे हम वापस बुलाते हैं. तुम इस संसार में निवास करने के लिए जीते हो. (१२)

Mandala 5 · Verse 13
तदिन्नवस्य परिष्दाग्नो अगम्पुरु सदन्तो नाईर्द बिभित्सन्. वि शुष्पास्य संग्रथितमनर्वा विदत्पुरुप्रजात्यस्य गुहा यत्.. (१३)

The divine fire, the source of all, is the ultimate refuge, the sustainer of all beings, and the destroyer of all fears. It is the unmanifested, the all-pervading, and the origin of all creation, hidden within the deepest recesses of existence.

इंद्र के चारों ओर वर्तमान सेविका रश्मियां प्रकाश देने के लिए जाती हैं. इन परम शक्तिशाली इंद्रानुचरों ने नृषपुत्र शुष्ण को नष्ट करने की इच्छा की. इंद्र अनेक प्रकार से प्रादुर्भूत शुष्ण का मर्म जानते हैं. उसका जो मर्म गुहा में छिपा है, उसे भी जानते हैं. (१३)

Mandala 5 · Verse 14
भर्गो ह नामोत यस्य देवाः स्वर्शं ये त्रिष्वस्थे निषेडुः. अग्निर्ह नामोत जातवेदाः श्रुधी नो होतृऋतस्य होताधुक.. (१४)

May the divine radiance, in which the gods reside, and which is established in the three realms, hear our invocation. O Agni, knower of all beings, accept our offering as the priest of sacrifice.

जिस अग्नि संबंधी तेज के समीप कुशों पर देवगण स्वर्ग के समान बैठते हैं, अग्नि के उस तेज का नाम भर्ग है. अग्नि के तेज का नाम जातवेदा है. हे होम संपन्न करने वाले अग्नि! तुम्ही यज्ञ संबंधी देवों को बुलाने वाले हो. तुम द्रोहरहित होकर हमारी पुकार सुनो. (१४)


Mandala 5 · Verse 15
उत त्या मे रौद्रावर्चिम्न्ता नासत्याविन्द्रं गूर्तये यजध्ये। मनुष्यदृक्वृक्षर्षिे राणा मन्दृ हितप्रयसा विष्णु यज्यु.. (१५)

O Indra, with your fierce, radiant brilliance, may we worship you, the swift, the strong, the protector of men, the bestower of blessings, the divine Vishnu.

हे इंद्र! वे प्रसिद्ध रुद्रपुत्र एवं दीप्तिशाली अश्विनीकुमार मेरी स्तुति एवं यज्ञ को स्वीकार करें। वे मनु के यज्ञ के समान मेरे यज्ञ में भी प्रसन्न हों। वे प्रजाओं को धन दें तथा यज्ञ के योग्य बनें। (१५)

Mandala 5 · Verse 16
अयं स्तुतो राजा वन्दि वेधा अपश्र विप्रस्तारति स्वसेतुः स कक्षीवन्तं रेजयत्सो अग्नि नेमिं न चक्रवर्तो रहुदु.. (१६)

This praised king, the divine creator, is the self-made bridge, the one who, like a chariot wheel, moves and sustains all.

यह राजा स्तुति किया हुआ, वेदों का ज्ञाता, विप्रों द्वारा विस्तृत, अपने सेतु के समान है। कक्षीवान् अग्नि नेमि को नहीं घुमाता है। (१६)


Mandala 5 · Verse 17
स द्बिन्बधुवैतरणो यष्टा सबर्धु धेनुमस्वं दुह्यै। सं यन्मिन्त्रावरुणा वृज्ज् उक्थ्यैज्येभिरय्यंण वरुस्थैः.. (१७)

May the divine couple, Mitra and Varuna, accept our offerings and sacrifices, and may they bestow upon us abundant wealth and prosperity.

वे अग्नि दोनों लोकों का कल्याण करने वाले हैं। वे विशेषरूप से तारक एवं यज्ञकर्ता हैं। अग्नि ने दुधारू गाय को उस समय दुहने योग्य बनाया, जब वह ब्याने योग्य नहीं थी. शंयु ऋषि ने महान् एवं प्रशंसनीय मंत्रों द्वारा मित्र, वरुण और अर्यमा की स्तुति की. (१७)

Mandala 5 · Verse 1
परावनतो ये दिधिषन्त आप्यं मनुप्रीतासो जनिमा विवस्वतः। ययातेयं नहुष्यस्य बहिषि देवा आस्ते ते अधि ब्रुवन्तु नः.. (१)

May the divine beings, who were pleased by the lineage of the Sun-god and desired the celestial waters, and who sat in the sacred fire for Yayati, son of Nahusha, now speak to us.

जो देवगण दूर देश से आकर मनुष्यों के साथ मित्रता स्थापित करते हैं, मानवों द्वारा प्रसन्न होकर जो देव वैवस्वत मनु से उत्पन्न मनुष्यों को धारण करते हैं एवं जो देव नहुषपुत्र ययाति राजर्षि के यज्ञ में बैठते हैं, वे धन आदि देकर हमें पूजित करें. (१)

Mandala 5 · Verse 2
विश्वा हि वो नमस्यानि वन्द्या नामानि देवा उता यज्यानि वः। ये स्थ जाता अदिति रद्रयस्पतिं ये पृथिव्यास्ते म इह श्रुता हवम्.. (२)

O divine beings, your names are worthy of all reverence and worship, and you are deserving of all offerings. Those among you who are born, who are the lords of Rudra, and who inhabit the earth, hear my call here.

हे देवो! तुम्हारे सभी नाम नमस्कार के योग्य, वंदनीय एवं यज्ञ के योग्य हैं. जो देव अदिति, जल एवं पृथ्वी से उत्पन्न हुए हैं, वे यहां हमारी पुकार को सुनें. (२)

Mandala 5 · Verse 3
येभ्यो माता मधुमत्पिन्वते पयः पीयूषं धौरदितिरद्रिबर्हाः। उक्थशुष्मान् वृषभरान्त्वसप्रसस्तों आदित्यॉ अनु मदा स्वस्तये.. (३)

May the Adityas, who are nourished by the divine mother with sweet milk, and who possess immense strength and vigor, bestow upon us well-being and prosperity.

पृथ्वी माता जिन देवों के लिए मधुर दूध बहाती है और अदीन तथा बादलों से घिरा हुआ आकाश जिनके लिए अमृत धारण करता है, उन प्रशंसनीय शक्ति वाले, वर्षा करने वाले, शोभा कर्म वाले एवं अदितिपुत्र देवों के लिए स्तुति करो. (३)


Mandala 5 · Verse 4
नृचक्षसो अनिमषन्तो अर्हणा बृहद्देवासो अमृतत्वमानशुः। ज्योतीरथा अहिमाया अनागसो दिवो वर्षाणि वसते स्वस्तये.. (४)

The divine beings, with eyes like men and unblinking, having attained immortality through worship, and whose chariots are light, free from deceit and sin, dwell in heaven for their well-being.

बिना पलक गिराए यजकर्म के नेताओं को देखने वाले देवों ने लोक की रक्षा के लिए विस्तृत अमृत प्राप्त किया था. तेजस्वी रथ वाले, विघ्नरहित यजकर्मों वाले व पापरहित देवगण लोगों के कल्याण के लिए स्वर्ग के उन्नत प्रदेश में रहते हैं. (४)

Mandala 5 · Verse 5
सम्राजो ये सुवृधो यजमायुरपरिहृता दधिरं दिवि क्षयम्। ताँ आ विवासं नमसा सुवृक्तिभिर्महो आदितिं स्वस्तये.. (५)

May we, with reverence and praise, approach the mighty Aditi, the sustainer of the universe, who bestows enduring strength and celestial abode, for our well-being.

अपने तेज से भली-भांति सुशोभित एवं भली प्रकार उन्नत जो देव यज्ञ में आते हैं एवं किसी के द्वारा भी अहिंसित होकर स्वर्ग में रहते हैं, उन महान् देवों और अदिति की सेवा

Mandala 5 · Verse 6
को वः स्तोमं राधति यं जुजोष्व विश्वे देवा��ो मनुषो यति छन्न. को वोऽध्वरं तुविजाता अरं क��धो नः प��र्दय��हः स्वस्तये.. (६)

Who offers you praise, O all-knowing Devas, which you desire? Who, O mighty ones, prepares your sacrifice for our well-being?

हे देवो! मेरे अतिरिक्त कौन तुम्हारी स्तुति कर सकता है, जिसकी तुम सेवा करो? हे ज्ञाता देवो! तुम संतान वाले बनो. मेरे अतिरिक्त कौन यजमान स्तुतियों द्वारा तुम्हारा यज्ञ अलंकृत करता है. यज्ञ हमें पाप से बचाकर हमारा कल्याण करता है. (६)

Mandala 5 · Verse 7
येभ्यो होत्रां प्रथमामायेजे मनुः समि��द्रग्निर्मनसा स��त होतृभिः. त आदित्या अभयं शर्म यच्छ�� सुगा नः क��त सुप्रथा स्वस्तये.. (७)

May the Adityas, whom Manu first worshipped with offerings, grant us fearlessness and protection, making our path smooth and our fame auspicious for our well-being.

सबसे पहले मनु श्रद्धा��क्त मन से सात होताओं के साथ अग्नि प्रज्वलित करके स्तुतियों द्वारा जिन देवों का यजन करते हैं, वे देव हमें निर्भय करें, कल्याण दें एवं हमारी भलाई के लिए सभी मार्गों को सुगम बनावें. (७)

Mandala 5 · Verse 8
य ईशिरे भुवनस्य प्रचेत��ो विश्वस्य स्थातुर्जग��तश्च म��तवः. ते नः कृतादकृ��देनस��प��य��ा देवासः पिपृता स्वस्तये.. (८)

May the wise gods, who rule the universe and all that moves and stands, protect us from known and unknown sins, bringing us well-being.

उत्तम ज्ञान वाले एवं सर्वज्ञ देव समस्त जंगम लोक के स्वामी हैं. हे देवो! तुम हमें कृत अथवा अकृत पाप से बचाकर आज हमारे कल्याण को बढ़ाओ. (८)

Mandala 5 · Verse 9
भ��िन्द्रं सुहवं ह��महेऽ��होमुचं सुकृतं दैव्यं जनम्. अग्निं मित्रं वरुणं सातये भगं द्यावापृथिवी मरुतः स्वस्तये.. (९)

We invoke the radiant, easily invoked, sin-destroying, virtuous, divine Agni, the friend of Varuna, for prosperity, and the Earth and Sky, and the Maruts, for well-being.

हम पाप से छुड़ाने वाले, ��भन-आह्वान वाले एवं ��भन कर्म वाले देवों के संबंधी इंद्र को सब यज्ञां में बुलाते हैं. हम अन्नलाभ और अविनाशी बनने के लिए अग्नि, मित्र, वरुण, भग, द्यावा-पृथिवी और मरुतों को बुलाते हैं. (९)


Mandala 5 · Verse 10
सुत्रामाणं पृथि��ीं घामनेह��ं सुश��णमदि��ि सुप्रणी��िम. दैवीं ना��ं स्व��र��ामनाग��सम��व��न्��ीमा रुहेमा स्वस्तये.. (१०)

May we ascend to the divine boat, well-steered and safe, for our well-being, carrying us across the vast expanse.

हम भली प्रकार रक्षा करने वाली, विस्तृत, पापरहित, ��भन, सुयुक्त, क्षयरहित, सुदृढ़ गठन वाली, ��भन आचरण युक्त, निष्पाप एवं विनाशरहित द्युलोकरूपी नाव पर कल्याण के लिए चढ़ें. (१०)

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Mandala 5 · Verse 11
विश्वे यज��ा अधि वोचतोतये त्राय��ध्वं नो दु��ेवाया अभ��ुत: स��या वो देवह��त्या हु��म शृण्वतो देवा अवसे स्वस्तये.. (११)

O divine powers, we invoke you with our offerings, protect us from evil and distress. Hear our prayers, O gods, and grant us well-being and protection.

हे यज्ञ के पात्र देवो! तुम रक्षा के निमित्त हमसे कहो एवं विनाश करने वाली दु��ति से

Mandala 5 · Verse 12
अपामावामप विश्वाम्नाहुतिमपारातिं दुर्वित््रामधाययतः । आरे देवा द्वेषो अस्म्धुयोतनो रु णः शर्म यच्छता स्वस्तये.. (१२)

May the divine powers, who are the source of all sustenance and the dispellers of all obstacles, remove our hatred and grant us peace and well-being.

हे देवो! हमारे रोगों और द्वेषों का आह्वान न करने वाली दुर्बुद्धि को हमसे दूर करो. तुम लोभमय बुद्धि को हमसे अलग करो. तुम दुष्ट की पापमय बुद्धि हमसे दूर कर दो. तुम हमें विशेष सुख और कल्याण प्रदान करो. (१२)


Mandala 5 · Verse 13
अरिः स मर्तों विश्व एधते प्र प्रजाभिरजायते धर्मणस्परि. यमादि त्यासो नयथा सुनीतिभिरिति विश्वाणि दुरिता स्वस्तये.. (१३)

He who is a friend to all, thrives in the world and is born with progeny, protected by righteousness. By good guidance, the divine powers lead him, and all evils are removed for his well-being.

हे अदितिपुत्र देवो! जिन्हें तुम शोभन-मार्गों से ले जाते हो एवं सभी पापों से दूर करके कल्याण प्रदान करते हो, वे सब लोग सभी अनिष्टों से सुरक्षित रहकर वृद्धि प्राप्त करते हैं एवं धर्मकार्यों के पश्चात् संतान की उन्नति पाते हैं. (१३)

Mandala 5 · Verse 14
यं देवासोऽवथ वाजसातो यं शूरसाता मरुतो हिते धनै. प्रातर्यावाणो रथमिन्द्र सानसिमरिष्यन्तम रुहेमा स्वस्तये.. (१४)

May we, O Indra, ascend your swift chariot, protected by the gods and Maruts with their strength and wealth, to achieve victory and well-being, remaining unharmed.

हे देवो! अन्नलाभ के लिए तुम जिसकी रक्षा करते हो, हे मरुतो! युद्ध में संचित धन पाने के लिए तुम जिस रथ की रक्षा करते हो, हे इंद्र! उसी प्रातःकाल युद्ध में जाने वाले, सेवन करने योग्य एवं ध्वस्त न होने वाले रथ पर हम कल्याण के लिए चढ़ें. (१४)

Mandala 5 · Verse 15
स्वस्ति नः प थ् यासु धन्वसु स्वस्त्य १ ष्पु व जने स्वर्वति. स्वस्ति नः पुत्रकृ थेषु योनिषु स्वस्ति रायै मरुतो दधातन.. (१५)

May there be well-being for us on the paths and in the deserts, and well-being for us among people in the sunlit world. May the Maruts grant us well-being in the wombs of our children and well-being for our wealth.

स्वस्ति नः प थ् यासु धन्वसु स्वस्त्य १ ष्पु व जने स्वर्वति. स्वस्ति नः पुत्रकृ थेषु योनिषु स्वस्ति रायै मरुतो दधातन.. (१५)

Mandala 5 · Verse 16
स्वस्तिरिद्धि प्रपथे श्रेष्ठा रेक्णस्वत्याभि या वाममेति. सा नो अमो सो अरणे नि पातु स्वावेषा भवतु देवगोपा.. (१६)

May prosperity and abundance, which lead to the best path, protect us. May she, who is adorned with wealth, be our guardian and bring us auspiciousness.

स्वस्तिरिद्धि प्रपथे श्रेष्ठा रेक्णस्वत्याभि या वाममेति. सा नो अमो सो अरणे नि पातु स्वावेषा भवतु देवगोपा.. (१६)

Mandala 5 · Verse 1
अग्निरिन्द्रो वरुणो मित्रो अर्यमा वायुः पुषा सरस्वति सजोषसः। आदित्या विष्णुर्मरुतः स्वर्बृहत् सोमो रुद्रो अदितिर्ब्रह्मणस्पतिः.. (१)

The divine powers, including Agni, Indra, Varuna, Mitra, Aryama, Vayu, Pusha, Sarasvati, the Adityas, Vishnu, Maruts, Surya, Soma, Rudra, Aditi, and Brahmanaspati, all reside together in cosmic harmony.

अग्नि, इंद्र, मित्र, अर्यमा, वायु, पूषा, सरस्वती, आदित्यगण, विष्णु, मरुद्गण, स्वर्ग, विशाल स्वर्ग, सोम, रुद्र, अदिति और ब्रह्मणस्पति सब मिलकर अपनी महिमा से अन्तरिक्ष को पूर्ण करते हैं. (१)


Mandala 5 · Verse 2
इन्द्राग्नी वृत्रहत्त्येषु सत्यती मिथे हिन्वाना तन्वा३ समोक्सा. अन्तरिक्षं महाँ पप्रुरोजसा सोमो घृतश्रीर्हिमानमीरयन्.. (२)

The mighty Indra and Agni, united in their strength, slew Vritra, filling the sky with their brilliance. Soma, radiant with ghee, then brought forth the rains.

सज्जनों के पालक, युद्ध में एकत्र होकर शरीरबल से शत्रुओं का नाश करने वाले एवं महान् आकाश को अपने तेज से पूर्ण करने वाले इंद्र अग्नि के बल को घृतमिश्रित सोमरस से बढ़ाते हैं. (२)

Mandala 5 · Verse 3
तेषां हि मह्ना महतामनर्वाणां स्तोमोऽयभ्यृत्ज्ञा ऋतावृधम्. ये अप्सवमर्णव चित्रराधस्ते नो रासन्तं महये सुमित्रयाः.. (३)

May the hymns of praise, which grow stronger with the mighty and the wise, and which are filled with radiant treasures, bestow upon us abundant prosperity and true friendship.

यज्ञ का ज्ञाता मैं अपने महत्त्व से महान् शत्रुओं द्वारा अपराजये एवं यज्ञ की वृद्धि करने वाले देवों की स्तुति करता हूँ. विचित्र धन से युक्त वे देव मेघों से जल बरसाते हैं. शीघ्र मैत्री वाले वे देव हमें धन देकर मानवों में श्रेष्ठ बनावें. (३)

Mandala 5 · Verse 4
स्वर्णरम्मन्त्क्षरिणो रोचना द्यावाभूमीं पृथिवीं स्कम्भुरोअसा. पृक्षा इव मह्यन्तः सुरातयो देवाः स्तवन्ते मनुष्येण सूर्यः.. (४)

The radiant heavens and earth, like golden vessels, are sustained by the divine. The gods, in their glorious forms, praise the Sun, who is honored by humanity.

स्वर्णरन्तःक्षरिणो रोचना द्यावाभूमीं पृथिवीं स्कम्भुरोअसा. पृक्षा इव मह्यन्तः सुरातयो देवाः स्तवन्ते मनुष्येण सूर्यः.. (४)

Mandala 5 · Verse 5
मित्राय शिखं वरुणाय दाशुषे या सम्राजा मनसा न प्रयच्छत:। ययोर्धर्मं धर्णो रोचते बृहद् ययोर्‌रुदसी नाधसी वृती.. (५)

To Mitra, the radiant, and to Varuna, the giver, who are not pleased by offerings made with a reluctant mind, whose great glory shines in righteousness, and whose dominion encompasses heaven and earth.

मित्राय शिखं वरुणाय दाशुषे या सम्राजा मनसा न प्रयच्छत:। ययोर्धर्मं धर्णो रोचते बृहद् ययोर्‌रुदसी नाधसी वृती.. (५)

Mandala 5 · Verse 6
या गौर्वतनां पर्यति निष्कृत्तं पयो दुहानां व्रतनरवारत:। सा प्रब्रुवाणा वरुणाय दाशुषे देवेभ्यो दाशद्विष विवस्वते.. (६)

The cow, yielding pure milk for the observer of vows, nourishes the gods and the worshipper who offers oblations to Varuna.

मेरी जो दुधारू व यज्ञसंपादिका गाय बिना प्रार्थना के यज्ञ में आती है, वह वरुण को द्रव्य देने वाले तथा अन्न द्वारा अन्य देवों की सेवा करने वाले मेरी रक्षा करें। मैं उस गाय की स्तुति करता हूं। (६)

Mandala 5 · Verse 7
दिवक्षसोऽग्निजिह्वा ऋतावृध ऋतस्य योनिं विमृशन्त आस्ते। दां स्कम्भितव्यः १ प आ चक्रुंरोजसा यज्ञं जनित्वी तन्वी ३ नि मामुजुः.. (७)

The divine beings, with tongues of fire, nourished by truth, touch the source of cosmic order. They have established the sacrifice, born of strength, and have ascended to the heavens.

अपने तेज से आकाश को पूर्ण करने वाले, अग्नि रूपी जिह्वा वाले व यज्ञ की वृद्धि करने वाले देव यज्ञ में अपना-अपना स्थान पहचान कर बैठते हैं। आकाश को धारण करके अपनी शक्ति से जल निकालते हैं एवं यज्ञ के द्रव्यों को अपने शरीर में सुशोभित करते हैं। (७)

Mandala 5 · Verse 8
परिक्षिता पितरा पूर्वजावरी ऋतस्य योना क्षायतः समोक्सा. द्यावापृथिवी वरुणाय सव्रते घृतवत्यो महिषाय पिन्वते.. (८)

The parents of Parikshit, the ancient ones, nourished the womb of Truth, and together they flowed forth. Heaven and Earth, with Varuna, who shares their sacred vow, are full and abundant for the mighty one.

सर्वत्र व्याप्त, सबके माता-पिता के समान, सबसे पहले उत्पन्न होने वाले एवं समान स्थान वाले द्यावा-पृथिवी यज्ञस्थल में रहते हैं। समान कर्म वाले द्यावा-पृथिवी पूज्य वरुण को बहने वाले जल से सींचते हैं। (८)

Mandala 5 · Verse 9
पर्जन्यावाता वृष्भा पुरीषिणेन्द्रवायु वरुणो मित्रो अर्यमा. देवा आदित्यों अदितिं हवामहे ये पार्थिवामो दिव्यासो अप्सु ये.. (९)

We invoke the divine powers: Parjanya (rain-giver), Vayu (wind), the powerful Vrisha (bull-like strength), Indra and Vayu, Varuna, Mitra, and Aryama. We call upon the Adityas, sons of Aditi, those who dwell on earth, in the sky, and in the waters.

अभिলাষपूरक तथा जलयुक्त मेघ एवं वायु को व इंद्र, वरुण, अर्यमा, अदितिपुत्र देवों एवं देवमाता अदिति को हम बुलाते हैं। हम पृथ्वी, आकाश एवं जल में स्थित देवों को भी बुलाते हैं। (९)

Mandala 5 · Verse 10
त्वत्तारं वायुमभवो य ओहते दैव्या होतां उषसं स्वस्तये. बृहस्पतिं वृत्रखादं सुमेधसमिनद्रियं सोमं धनसा उ ईमहे.. (१०)

We invoke Indra, the slayer of Vritra, the strong, the wise, the Soma, the bestower of wealth, and Brihaspati, the divine priest who brings forth the dawn for our welfare.

हे ऋभुओ! हम उन्हीं सोम से धन की याचना करते हैं जो तुम्हारे कल्याण के निमित्त देवों को बुलाने वाले त्वष्टा, वायु एवं उषा के पास जाते हैं, जो बृहस्पति एवं शोभन मेघा वाले इंद्र के समीप पहुंचते हैं एवं इंद्र को प्रसन्न करते हैं। (१०)


Mandala 5 · Verse 11
सूर्यं दिवि रोहयन्तं सुदानव आर्यां व्रता विसृजन्तो अधि क्षमि.. (११)

The Sun, rising in the sky, bestows abundant gifts, inspiring righteous deeds.

देवों ने अन्न, गाय, घोड़े, वृक्षों, वनस्पतियों, पृथ्वी, पर्वतों और जलों को उत्पन्न किया है एवं सूर्य को आकाश में चढ़ाया है. शोभन दान वाले देवों ने धरती पर उत्तम कार्य किए हैं. (११)

Mandala 5 · Verse 12
भुज्युमहंसः पिपृथो निरश्रिन्ना श्यावं पुत्रं वधिमत्या अजिन्वत्. कमध्रुवं विमदायोह्युर्युवं विष्णांश्च विश्वकायाव सृजथः.. (१२)

You, the swans, nourish and protect the devoted, and the dark son is sustained by the mother. You two, Vishnu, create the universe with all its forms.

हे अश्विनीकुमारो! तुमने भुज्यु को उपद्रवकारी समुद्र से बचाया, वधिमती को सोने के रंग वाला पुत्र दिया, विमद ऋषि को कामोद्दीपक पत्नी दी तथा विश्वक ऋषि को विष्णुाप नामक पुत्र दिया. (१२)

Mandala 5 · Verse 13
पावीरवी तन्व्युत्तरेकपाइजो दिवो धर्ता सिन्धुराधः समुद्रियः. विश्वे देवाः शृणवन्चामसि मे सरस्वस्ती सह धीभिः पुरन्ध्या.. (१३)

The radiant, slender, and supreme daughter of the sky, the sustainer of the earth and the waters, may the divine beings and Sarasvati, with their wisdom and understanding, hear my prayer.

आयुधों वाली एवं गर्जन करने वाली मध्यम वाणी, द्युलोक को धारण करने वाले अजयकपार्, सिंधु, सागर का जल, विश्वेदेव एवं कर्मों के साथ अनेक प्रकार की बुद्धियों से युक्त सरस्वती मेरे वचनों को सुनें. (१३)

Mandala 5 · Verse 14
विश्वे देवाः सह धीभिः पुरन्ध्या मनोरजञ्जत्रा अमृता ऋतज्ञाः. रात्रिपाचो अभिशाचः स्वर्वित्ः स्वःशगिरेो ब्रह्म सूक्तं जुषेरत.. (१४)

May the divine beings, with their wisdom and understanding, delight in the sacred hymns, knowing the cosmic order. May the night-watchers, the vanquishers of evil, and those who know the heavens, embrace this divine utterance.

कर्मों एवं ज्ञानों से युक्त, मानवीय यज्ञों में सत्कार के पात्र, मरणरहित, सत्य को जानने वाले, हव्यग्रहणकर्ता, सामने से यज्ञ में सम्मिलित होने वाले एवं सब कुछ प्राप्त करने वाले इंद्रादि देव हमारी स्तुतियों एवं अन्न को ग्रहण करें. (१४)


Mandala 5 · Verse 15
देवान्वसिष्ठोऽमृतान्वन्द्वे ये विश्वा भुवानाभि प्रतस्थुः. ते नो रास्नतामुरुगायमधं यूयं पातं स्वस्तिभिः सदा नः.. (१५)

May the divine ones, who are the source of immortality and who have spread throughout all worlds, bestow upon us abundant glory. May you always protect us with well-being.

वसिष्ठ वंश में उत्पन्न ऋषि ने मरणरहित देवों की वंदना की है. वे देव सभी लोकों में स्थित हैं. वे हमें आज अधिक यशस्कर अन्न दें. हे देवो! तुम कल्याणकारी साधनों द्वारा हमारी रक्षा करो. (१५)

Mandala 5 · Verse 1
देवान्हुवे बृहच्छ्रवसेः स्वस्तये ज्योतिष्कृतेो अध्वरस्य प्रचेतसः. ये वावधुः प्रतरं विश्ववेद इन्द्रज्येष्ठासो अमृता ऋतावृधः.. (१)

We invoke the gods, the great, the radiant, the illuminators of the sacrifice, the all-knowing, the mighty, the immortal, who increase truth.

मैं अधिक अन्न वाले, आदित्यतेज के कर्ता, उत्तम ज्ञान वाले, इंद्रप्रमुख, मरणरहित व

Mandala 5 · Verse 2
इन्द्रप्रसूता वरुणप्रशिष्टा ये सूर्यस्य ज्योतिषो भागमानशुः। मरुद्गणै वृजने मन्य धिमहि माधोने यज्ञं जनयन्त सूर्यः.. (२)

Born of Indra and commanded by Varuna, they who partake of the Sun's radiant light, the Maruts, with their strength, have brought forth this sacrifice, inspired by the Sun.

इन्द्र द्वारा प्रेरित, वरुण द्वारा अनुमोदित, ज्योतिषर्मय सूर्य के मार्ग को व्याप्त करने वाले एवं शत्रुनाशक मरुतों की स्तुति करते हैं. हे विद्वान् यजमान! उन्हीं इंद्र पुत्र मरुतों के लिए हम यज्ञ की तैयारी करते हैं. (२)

Mandala 5 · Verse 3
इन्द्रो वसुभिः परि पातु नो गायमादिदैनौ अदितिः शर्म यच्छतु. रुद्रो रुद्रभिदेवो मूल्याति नस्त्वस्थ नो ग्नाभिः सुविताय जिन्वतु.. (३)

May Indra, with the Vasus, protect us; may Aditi, the mother of gods, grant us shelter and well-being. May Rudra, with the Rudras, drive away our afflictions; may the goddesses, with their blessings, invigorate us for prosperity.

इंद्र वसुओं के साथ हमारे घर की रक्षा करें. अदिति देवों के साथ हमारा कल्याण करें. रुद्रदेव मरुतों के साथ हमें सुखी करें. त्वष्टा अपनी पत्नियों के साथ हमें अभ्युदय के लिए प्रसन्न करें. (३)

Mandala 5 · Verse 4
अदितिर्द्यावापृथिवी ऋतं महदिन्द्राविष्णु मरुतः स्वर्बृहत्. देवा आदित्य अवसे ह्वामहे वसून रुद्राऽऽन्त्वितारं सुदंससम्.. (४)

We invoke Aditi, the sky and earth, the great cosmic order, Indra, Vishnu, the Maruts, and the vast heaven. We call upon the divine Vasus, Rudras, and the powerful, skillful Aditya for protection.

अदिति, द्यावा-पृथिवी, महान् सत्य, इंद्र, विष्णु, मरुत्, विस्तृत स्वर्ग, देवों, आदित्यौ, वसुओं, रुद्रों और उत्तम दान करने वाले सूर्य को हम अपनी रक्षा के लिए बुलाते हैं. (४)

Mandala 5 · Verse 5
सरस्वान्धीभिरवरुणो धृतव्रतः पुषा विष्णुंमहिमा वापुरश्विना. ब्रह्मकृतो अमृता विश्ववेदसः शर्म नो यंस्न्न् त्रिवरूस्थमहंसः.. (५)

May the divine powers, the upholders of vows, the all-knowing, the bestowers of prosperity, and the divine twins, who are the creators of the universe and possess all knowledge, grant us protection and peace from all afflictions.

बुद्धि से युक्त सागर, व्रत धारण करने वाले वरुण, पुषा, महत्त्वयुक्त विष्णु, वायु, अश्विनीकुमार व स्तोता को अन्न देने वाले, मरणरहित, सर्वज्ञ व पापनाशक देवगण हमें तीन मंजिल वाला मकान दें. (५)


Mandala 5 · Verse 6
वृषा यज्ञो वृषणः सन्तु यजञिया वृषणो देवा वृषणो हविष्कृतः. वृषणा द्यावापृथिवी ऋतावरी वृषा पर्जन्य्यो वृषतुभः.. (६)

May the sacrifice be potent, may the sacrificers be strong, may the gods and those who offer oblations be vigorous. May the heaven and earth be fertile and life-giving, and may the rain-giver, Parjanya, bestow abundant blessings.

यज्ञ हमारी कामनाएं पूरी करें. यज्ञ के पात्र देवगण हमारी अभिलाषा पूरी करने वाले हों. देवगण, द्रव्य संग्रह करने वाले, यजञयुक्त ऋतावरी, पर्जन्य और स्तोता सब हमारी कामना करें. (६)

Mandala 5 · Verse 7
अग्नीषोमा वृषणा वाजसातये पुरुषप्रशस्ता वृषणा उप ब्रुवे. यावीजिरे वृष्णो देवयज्याया ता नः शर्म त्रिवरूस्थं वि यंसत:.. (७)

O Agni and Soma, powerful and invoked by men for nourishment, may your divine offerings grant us protection and refuge.

अभिहृदात्ता एवं बहुतां द्वारा प्रशंसित अग्नि व सोम की स्तुति में अन्न पाने के लिए करता हूं. ऋत्विज् यज्र में हव्यों द्वारा उनकी पूजा करते हैं. वे हमें तीन मंजिल वाला मकान दें. (७)

Mandala 5 · Verse 8
धृतव्रताः क्षत्रिया यज्ञनिष्कृत्तो बृहदिवा अध्वराणामभिश्रियः। अग्निहोतार ऋतसापो अदृहोऽपो असृजनन् वृत्रयै.. (८)

The steadfast Kshatriyas, performers of sacrifices, the glory of great rituals, the offerers of oblations, those who uphold truth, have released waters for the destruction of Vritra.

व्रतपालन में तत्पर, शक्तिशाली, यज्ञ को अलंकृत करने वाले, महान तेजस्वी, यज्ञ में सम्मिलित होने वाले, अग्नि द्वारा बुलाए हुए एवं सत्य के पात्र देवों ने वृत्रयुद्ध के समय जल की रचना की. (८)

Mandala 5 · Verse 9
घ्वापृथिवी जनयन्ब्रभि प्रताप ओषधीर्विनानि यज्ञा. अन्तरिक्षं स्वर्रा प्रपूरुस्तये वशं देवासस्तन्व्३ नि मामुजः.. (९)

The earth and sky were born from His might, the plants and sacrifices from His essence. The heavens were filled by Him, and the gods themselves were subject to His will.

देवाओं ने द्यावा-पृथ्वी को लक्ष्य करके अपने कर्म से जल, औषधियां, यज्ञ के उपयोग में आने वाली पलाश आदि की लकड़ियां बनाकर शत्रुओं से रक्षा के लिए स्वर्ग और आकाश को अपने तेज द्वारा पूर्ण कर दिया. देवों ने अभिलषित यज्ञ को अपने शरीरों में अलंकृत किया. (९)


Mandala 5 · Verse 10
धर्तारो दिव् ऋषभवः सुहस्ता वातापर्जन्या महिषस्य तन्यतोः। आप ओषधिः प्र तिरन्तु नो गिरो भगो रातिंवाजिंनो यन्तु मे हवम्.. (१०)

May the divine bulls, the swift winds, and the thunder of the mighty ones sustain us. May waters and plants nourish us, and may the divine wealth and strength come to my call.

धरती देव, ऋभुः सुहस्ता वातापर्जन्या महिषस्य तन्यतोः। आप ओषधिः प्र तिरन्तु नो गिरो भगो रातिंवाजिंनो यन्तु मे हवम्.. (१०)

Mandala 5 · Verse 1
इमां धियं सप्तशीर्ष्णीं पिता न ऋतप्रजातां बृहतीमि विन्दत्। तुरीयं स्वजनयद्धिंऋजन्योऽयास्यं उक्थमिन्द्राय शंसन्.. (१)

May the Father, the source of truth, find this vast, seven-headed thought, born of righteous progeny. He, the divine father, generates the fourth, the hymn of Ayasya, to praise Indra.

इमां धियं सप्तशीर्ष्णीं पिता न ऋतप्रजातां बृहतीमि विन्दत्। तुरीयं स्वजनयद्धिंऋजन्योऽयास्यं उक्थमिन्द्राय शंसन्.. (१)

Mandala 5 · Verse 2
ऋतं शंसन्त ऋजुं धियाना दिवस्पुत्रासो असुरस्य वीराः। विप्रं पदमझिस्सो दधाना यज्ञस्य धाम प्रथमं मनन्त.. (२)

The heroic sons of the divine, with pure intellect, uphold the truth and the divine order, establishing the sacred fire as the primary seat of sacrifice.

ऋतं शंसन्त ऋजुं धियाना दिवस्पुत्रासो असुरस्य वीराः। विप्रं पदमझिस्सो दधाना यज्ञस्य धाम प्रथमं मनन्त.. (२)

Mandala 5 · Verse 3
हंसैरिव सखिभिवर्दद्धिंरश्मन्मयानि नहना व्यस्न्। बृहस्पतिरभिक्रनिकदद्गा उत प्रास्तौदुच्च विद्गोंAgayatu.. (३)

Like swans, the radiant rays of the sun, adorned with celestial garlands, ascend. The divine wisdom of Brihaspati, the lord of knowledge, praises and proclaims this ascent.

हंसैरिव सखिभिवर्दद्धिंरश्मन्मयानि नहना व्यस्न्। बृहस्पtirabhikranikadadga ut prastouducca vidgongAgayatu.. (३)

Mandala 5 · Verse 4
अवो द्राभ्यां पर एकया गा गुहा तिष्ठन्तीरृतस्य सेतौ। बृहस्पतिस्तमसि ज्योतिरिच्छन्नुद्स्रा आargv हि तिस्त्र आवः.. (४)

The three cows, standing in the cave of the waters, seek the light of knowledge from the great Lord, the bridge of truth.

उस अंधकारपूर्ण गुफा में स्थित गायों को नीचे एक एवं ऊपर दो द्वारों की सहायता से छिपाया गया था. बृहस्पति ने अंधकार में प्रकाश ले जाने की इच्छा करते हुए तीनों द्वारों को खोला और गायों को बाहर निकाल दिया. (४)

Mandala 5 · Verse 5
विभिद्या पुरं शयथेमपाचीं निस्त्रीणि साकमुदधेरकृन्तत्। बृहस्पतिरूपसं सूर्यं गामर्कं विवेद स्तनयनिव धौः.. (५)

The divine chariot, like a mother, pierced the city and the eastern ocean, and with the brilliance of Brihaspati, revealed the sun, the earth, and the shining celestial bodies.

बृहस्पति रात भर सोते रहे. प्रातः उन्होंने गुहा का पिछला भाग तोड़ा तथा बादल के समान राक्षस की उस गुफा के तीनों द्वार खोल दिए. बृहस्पति ने प्रातःकाल सूर्य एवं गायों को एक साथ देखा. बृहस्पति उस समय मेघ के समान गर्जन कर रहे थे. (५)

Mandala 5 · Verse 6
इन्द्रो वलं रक्षितारं दुहानां करेणोव वि चक्रर्तां रवेण. खेदाज्जिभिरशिशिर्मिच्छमानोऽरोदयत्पणिमा गा अभुष्णात्.. (६)

The divine protector, like a cowherd, milks the earth with his hand, and with his radiance, he dispels darkness. Yearning for light, he cries out, and the cows are nourished.

बृहस्पति ने दुष्टारू गायों की रक्षा करने वाले असुर को हुँकार से इस प्रकार नष्ट कर दिया, जैसे अपने हाथ के आयुध से मारा हो. उन्होंने मरुतों के साथ संयोग की इच्छा करते हुए पणियों को रुलाया और गायों को वापस ले आए. (६)

Mandala 5 · Verse 7
स ई सत्येभिः सखिभिः शुचद्दिर्गाधायसं वि धनसर्ददः. ब्रह्मणस्पतिर्बभ्रिर्वर्धहैर्मस्वदेभ्रिर्विण व्यनद्.. (७)

The Lord, with His pure, truthful companions, bestows abundant wealth, and the divine sustainer, with His radiant powers, illuminates all.

बृहस्पति ने अपने तेजस्वी, सत्यवादी एवं धन देने वाले सहायकों से मिलकर गायों को रोकने वाले राक्षस को विदीर्ण कर दिया. स्तोत्रों के स्वामी बृहस्पति ने जल बरसाने वाले, जल का आहरण करने वाले एवं दीप्त आगमन वाले मरुतों के साथ गोधन को बाहर निकाला. (७)

Mandala 5 · Verse 8
ते सत्येन मनसा गोपतिं गा इयानास् इषणयन्त धीभिः. बृहस्पतिर्मिथो अवधपेभिरुद्सिया असृजत् स्वयुभिः.. (८)

Through truth and pure thought, they nourished the Lord of cows, the divine herds. With their intellects, Brihaspati, the lord of prayer, brought forth the waters.

मरुतों ने सच्चे मन से पणियों द्वारा अपहृत गायों को अपने कर्मों से प्राप्त करके बृहस्पति को गायों का स्वामी बनाने की अभिलाषा की. बृहस्पति ने अपने सहयोगी मरुतों के साथ गायों को गुफा से बाहर किया. (८)

Mandala 5 · Verse 9
सोभामविद्दत्स स्वः सो अग्निं सो अर्केण वि बबाधे तमांसि. बृहस्पतिर्गाविपुषो वलस्य निर्मिज्ञानं न पर्णो जभार.. (९)

The radiant sun, with its brilliance, dispelled darkness, and with its hymns, the divine fire conquered gloom. Brihaspati, the lord of prayer, revealed the hidden cows of Vala, just as a leaf falls from a tree.

उसने शोभा को प्राप्त किया, वह अग्नि है, उसने सूर्य से अंधकार को दूर किया। बृहस्पति ने वृष (वृषभ) के बल से गायों को मुक्त किया, जैसे पत्तों को नहीं। (९)

Mandala 5 · Verse 1
यदीं सुमित्रा विशो अग्र इन्धते घृतेनाहुतो जरते दविद्युत्.. (१)

When Mitra, the radiant, is invoked with offerings of ghee, he shines forth like lightning, consuming all impurities.

हे सुमित्र! यदि तुम अग्नि को प्रज्वलित करते हो, तो घृत से आहुति पाकर वह शीघ्र ही प्रकाशमान हो जाता है। (१)


Mandala 5 · Verse 2
घृतमग्नेर्वर्धनं घृतमृत्स्य मेदनम्। घृतेनाहुत उर्विया वि पप्रथे सूर्य इव रोचते सर्परासुतिः.. (२)

Ghee, the fuel of Agni, nourishes and strengthens. With ghee, the earth is filled, and the sun shines brightly, bringing forth life.

घृत अग्नि को बढ़ाता है, घृत शत्रु का नाश करता है। घृत से आहुति पाकर वह विस्तृत होकर सूर्य के समान प्रकाशमान होता है। (२)

Mandala 5 · Verse 3
यते मनुर्दनीकं सुमित्रः समीधे अग्ने तद्धिं नवीनः। स रेवच्छोच स गिरो जुषस्व स वाजे दर्षि स इह श्रवो धाः.. (३)

O Agni, may Manu's offering, with Mitra's aid, be kindled by you. May you shine brightly, accept our praises, bestow strength, and grant us fame here.

हे अग्नि! मनु ने जिस प्रकार तुम्हारी किरणों को दीप्त किया था, उसी प्रकार मैं सुमित्र ऋषि भी उन्हें दीप्त करता हूँ. तुम्हारी किरणें नवीन हैं. तुम धनसंपन्न होकर जलो, हमारी स्तुतियाँ स्वीकार करो, शत्रुसेना को मारो एवं हमें अन्न दो. (३)

Mandala 5 · Verse 4
य त्वं पूर्वीमीलितो वक्ष्यभः समीधे अग्ने स इदं जुषस्व। स नः स्तिपा उत भवा तनुपा दात्रं रक्षस्व यदिदं ते अस्मे.. (४)

O Agni, who art invoked and worshipped, accept this offering. Be our protector, guarding our bodies and our gifts, and keep us safe.

हे अग्नि! पहले तुम्हें स्तोता वक्ष्यभ ने प्रज्वलित किया था. तुम हमारा स्तोत्र स्वीकार करो. तुम हमारे घर और शरीर के रक्षक बनो. तुमने हमें जो कुछ दिया है, उसकी रक्षा करो. (४)

Mandala 5 · Verse 5
भवा घुम्नी वाक्ष्यस्रोत गोपा मा त्वा तारीदभिमातिर्जनानाम्। शूर इव धृष्णुययवनः सुमित्रः प्र नु वोचं वाक्ष्यस्य नाम.. (५)

May no envious person or enemy of mankind overcome you. Like a brave and steadfast warrior, I now proclaim your name, O Vāk.

हे वक्ष्य द्वारा स्थापित अग्नि! तुम तेजस्वी एवं रक्षक बनो. कोई भी तुम्हारी हिंसा न करे, क्योंकि तुम शत्रु लोगों को पराजित करने वाले हो. तुम शूर के समान शत्रुपुराभकारी एवं शत्रुनाशक बनो. मैं तुम्हारे नामों का वर्णन करता हूँ. (५)

Mandala 5 · Verse 6
समज्या पर्यवाऽवसुनि दासा वृत्राण्यार्या जिगेथ। शूर इव धृष्णुयवनों जनानां त्वमग्ने पूतनायूरभि ध्याः.. (६)

O Agni, you conquer enemies like a hero, protecting people and their possessions. You are the powerful protector of all beings.

हे अग्नि! तुमने मानवहितकारी एवं पर्वत पर उत्पन्न धन को दासों से जीत कर आर्यों को दिया. तुम शूर के समान शत्रुजनों के पराभवकारी एवं नाशक बनो तथा आक्रमणकारियों से भिड़ जाओ. (६)


Mandala 5 · Verse 7
ऊर्ध्वो ग्रावा बृहदग्निः समिद्धः प्रिया धामान्यदितेरूपस्थे. पुरोहिता वृत्त्वा यज्ञे अस्मिन् विदुष्ट्रा द्रविणमा यजेथाम्.. (७)

May the high, blazing fire, fully kindled, and the sacred stones, in the womb of Aditi, serve as priests in this sacrifice, bestowing wealth upon us who worship with knowledge.

हे ऋत्विज् एवं होता! तुम अतिशय विद्वान् हो। तुम उस समय इस यज्ञ के निमित्त धन दो, जिस समय सोम रस निचोड़ने के लिए पत्थर उठाया जाता है, महान् अग्नि को प्रज्वलित किया जाता है एवं देवों के प्रिय यज्ञापत्र धरती के यज्ञस्थान में लाए जाते हैं। (७)

Mandala 5 · Verse 8
तिसो देवीर्बहिर्दिरं वरीया आ सीदत् चक्मा वः स्योनम्. मनुष्यजं सुधिता हवीष्पीळा देवी घृतपदी जुषन्त.. (८)

May the divine mothers, seated in their glorious abode, accept your offerings with pleasure. May these well-prepared oblations, offered with devotion, be pleasing to the goddesses, who are the bestowers of nourishment and prosperity.

हे इडा आदि तीन देवियो! इस अति विस्तृत कुश पर बैठो। हमने इसे तुम्हारे लिए बिछाया है। इडा, तेजस्विनी सरस्वती एवं दीप्त पदों वाली भारती ने जिस प्रकार मनु के यज्ञ में हव्यों का सेवन किया था, उसी प्रकार वे हमारे यज्ञ में भली प्रकार रखे हुए हव्य का सेवन करें। (८)

Mandala 5 · Verse 1
देवानां नु वयं जानां प्र वोचाम विपन्त्या. उक्थेषु शस्यमानेषु यः पश्यादुत्तरे युगे.. (१)

We shall now speak of the gods, as the wise understand them, for those who will see in future ages, when hymns are sung.

हम स्पष्ट शब्दों में देवों की उत्पत्ति का वर्णन करते हैं. ये देव भविष्य में स्तोत्रों के उच्चारण के समय स्तोता को देखेंगे. (१)

Mandala 5 · Verse 2
ब्रह्मणस्पतिं सं कर्मार इवाधमत्. देवानां पूर्वं युगोऽसत्: सजांय.. (२)

The divine craftsman, like a smith, forged the Creator. Before the gods, he was born, the first of all.

लोहार जिस प्रकार यौकनी चलाता है, उसी प्रकार ब्रह्मणस्पति ने देवों को उत्पन्न किया. देवों से पूर्व के समय में असत् से सत् उत्पन्न हुआ. (२)

Mandala 5 · Verse 3
देवानां युगे प्रथमेऽसत्: सजांय.. तदाशा अन्वजायन्त तदुतानपदस्परि.. (३)

In the first age of the gods, there was existence. From that, desires arose, and from them, the universe was born.

देवों की उत्पत्ति से पहले के समय में असत् से सत् उत्पन्न हुआ. इसके बाद दिशाएँ उत्पन्न हुईं. दिशाओं से वृक्ष उत्पन्न हुए. (३)

Mandala 5 · Verse 4
भूर्जस् उत्तानपदो भुष आशा अजायन्त. अदितर्दंक्षो अजायत् दक्षाद्धिदृतिः परि.. (४)

From Bhurjas and Uttanapada, the Asuras were born. From Aditi, Daksha was born, and from Daksha, Driti.

वृक्षों से भूमि उत्पन्न हुई एवं भूमि से दिशाएँ उत्पन्न हुईं. अदिति से दक्ष उत्पन्न हुए और बाद में दक्ष से अदिति उत्पन्न हुईं. (४)

Mandala 5 · Verse 5
अदितिर्हृजनिष्ट दक्ष या दुहिता तव. तां देवा अन्वजायन्त भद्रा अमृतबन्धवः.. (५)

Aditi, daughter of Daksha, gave birth to the gods, who are auspicious and immortal.

हे दक्ष! तुम्हारी पुत्री अदिति ने देवों को उत्पन्न किया. अदिति के पश्चात् प्रशंसनीय एवं अमृत के बंधु देवों ने जन्म लिया. (५)


Mandala 5 · Verse 6
यदेवा अदः सलिले सुसंस्था अतिष्ठत्. अत्रा वो नृत्यतामिव तीव्रो रेणुरपायत्.. (६)

As that which is, well-established in the waters, moved, so did a potent essence arise.

हे देवो! जब तुम इस जल में रहकर अपने को जानते हुए स्थित थे, तब तुम नृत्य सा करने लगे. इससे बहुत धूल उड़ी. (६)

Mandala 5 · Verse 7
यदेवा यतयो यथा भुवनन्यपिन्वत्. अत्रा समुद्र आ गूळ्हमा सूर्यमजभर्त्.. (७)

The yogis, through their practice, filled the worlds with divine essence. The ocean, in its depths, held the sun, bringing forth light.

बादल जिस प्रकार वर्षा द्वारा संसार को भरते हैं, उसी प्रकार देवों ने संसार को ढक लिया. उन्होंने सागर में ढके हुए सूर्य को चमकने के लिए बाहर निकाला. (७)

Mandala 5 · Verse 8
देवाँ उप प्रेप्सप्तभिः परा मार्ताण्डमास्यत्.. (८)

He who desires the gods, surpasses even the sun.

आदिति के शरीर से आठ पुत्र उत्पन्न हुए। उन में से सात के साथ वह देवलोक में चली गई. आठवीं सूर्य आकाश में स्थित हुआ. (८)

Mandala 5 · Verse 1
जनिष्ठा उग्रः सहसे तुराय मन्द्र ओजिष्ठो बहुलाभिमानः, अवधन्विन्द्रं मरुतश्चिन्द्र माता यदीरं धनदृन्निष्ठा.. (१)

The mighty Indra, with the Maruts, the powerful ones, is the source of strength and abundance, bestowing wealth and victory.

गर्भ धारण करने वाली इंद्र की माता ने जिस इंद्र को जन्म दिया, उस समय मरुतों ने वीर इंद्र की प्रशंसा इस प्रकार की—"तुम शक्तिप्रदर्शन और शत्रुनाश के लिए उत्पन्न हुए हो. तुम प्रशंसनीय, ओजस्वी एवं अधिक अभिमानी हो." (१)

Mandala 5 · Verse 2
दुहो निषत्ता पृशानी चिदेवैः पुरू शंसिनं वाववृष्ट इन्द्रम्, अभिर्वतेव ता महापदेन धान्तात्प्रपित्वाद्दुदरन् गर्भाः.. (२)

The mighty Indra, praised by many, has been born, and the divine energies have brought forth the offspring of the earth.

मरुतों के साथ-साथ इंद्र की सेना भी इंद्र के समीप बैठी है. मरुतों ने विशाल स्तोत्रों द्वारा इंद्र को बढ़ाया. जिस प्रकार बंद गोष्ठ के खुलने पर गाएं बाहर निकलती हैं, उसी प्रकार अंधकाररूप मेघ के भीतर से वर्षा का जल बाहर निकला. (२)

Mandala 5 · Verse 3
ऋष्वा ते पादा प्र यजिगास्वर्धन्वाजा उत ये चित्र, त्वमिन्द्र सालावृकान् सहस्रमासुं दधिषे अश्विना वृत्याः.. (३)

O Indra, your powerful feet have brought forth abundant wealth and sustenance. You, with the Ashvins, have indeed established the thousand-souled Salavrikas.

हे इंद्र! तुम्हारे चरण महान हैं. तुम जिस समय चलते हो, उस समय ऋभुगण एवं वहां उपस्थित देव बढ़ते हैं. तुम हजार भेड़ियों को मुख में धारण करते हो तथा अश्विनीकुमारों को घुमा सकते हो. (३)

Mandala 5 · Verse 4
समना तूर्णरूप यासि यजमा नास्त्या सख्याय वक्षि, वसाव्यामिन्द्र धारयः सहस्राश्विना शूर ददतुर्मघानि.. (४)

O Indra, you who are swift and all-pervading, you who are the friend of the sacrificer, bestow upon us abundant riches. May the Ashvins, the powerful ones, grant us wealth.

हे इंद्र! संग्राम की जल्दी होने पर भी तुम यज्ञ में जाते हो. उस समय तुम अश्विनीकुमारों की मित्रता धारण करते हो. हे शूर इंद्र! उस समय तुम हमारे लिए हजार धन धारण करते हो. अश्विनीकुमार हमारे लिए धन दें. (४)


Mandala 5 · Verse 5
मन्दमान ऋताधि प्रजां सखिभिरिन्द्र इषिरेभिरर्थम्। अभिहिं माया उप दस्युगान्निः प्र तमा अवपन्तमासि.. (५)

Indra, with his swift companions, has brought forth sustenance for all beings. He has driven away the deceitful, the plunderers, and the wicked, casting them down into the abyss.

इंद्र यज्ञ में अपने मित्र मरुतों के साथ प्रसन्न होते हुए यजमान के लिए धन देते हैं. इंद्र ने यजमानों के निमित्त असुरों की माया को समाप्त किया, वर्षा की तथा अंधकार को नष्ट किया. (५)

Mandala 5 · Verse 6
सनामाना चिद् धवसो न्यस्मा अवाहिन्निन्द्र उषसो यथा। ऋष्षैर्गाच्छ: सखिभिनिर्कामै: साकं प्रतिज्ञा ह्छ जघन.. (६)

Indra, like the dawn, has brought forth the shining ones, and with his companions, he has come to conquer the enemy.

इंद्र ने वृत्र को मारने के लिए समान नाम वाले शत्रुओं को नष्ट किया. इंद्र ने उषा की गाड़ी के समान ही वृत्र को नष्ट किया. इंद्र दीप्त व वृत्रवध के इच्छुक अपने मित्र मरुतों के साथ वृत्र को मारने गए. हे इंद्र! तुमने शत्रुओं के सुंदर शरीर को नष्ट किया. (६)

Mandala 5 · Verse 7
त्वं जघनन् नमुचिं मखस्युं दासं कृण्वान ऋषये वि मायम्। त्वं चक्रर्थं मनवे स्योनान्पथो देत्राज्जीसेव यानान्.. (७)

You, O Lord, destroyed Namuchi, the enemy of sacrifice, and made him a slave to the sage, dispelling his illusion. You created pleasant paths for Manu, like a chariot for the gods.

हे इंद्र! नमुचि राक्षस तुम्हारे धन की अभिलाषा करता था, इसलिए तुमने उसे मार डाला. तुमने मनु के सामने घातक असुर नमुचि को मायाविहीन किया. तुमने मनु के चलने के लिए मार्ग सुरक्षित कर दिया. वे मार्ग सरलता से देवलोक में जाते हैं. (७)

Mandala 5 · Verse 8
त्वमेतानि पप्रिषे वि नामेशान इन्द्र दधिषे गभस्तौ। अनु त्वा देवा: शक्सा मदन्त्युपरिबुध्वा-न्निन्श्शर्क.. (८)

You, O Lord, have assumed these forms, and in your hand you hold power. The gods rejoice in your strength, and you are above all limitations.

हे इंद्र! तुम इस संसार को जल से पूर्ण करते हो तथा सबके स्वामी बनकर हाथ में वज्र धारण करते हो. तुम शक्तिसंपन्न हो. सभी देव तुम्हारी स्तुति करते हैं. तुम बादलों का मुख नीचे की ओर करते हो. (८)

Mandala 5 · Verse 1
वसूनों वा चक्रुष् इयक्षन्धिा वा यज्ञैर्वा रोदयः। अर्वनन्तो वा ये रयिम्न्तः सातो वनुं वा ये सुश्रुषणं सुश्रुतो धुः.. (१)

Those who offer sacrifices with devotion, or those who are wealthy and generous, bring forth prosperity and are blessed with good fortune.

देवों व मानवों द्वारा धनदान के इच्छुक इंद्र को धनदान के लिए स्तुतियों या यज्ञ द्वारा आकर्षित किया जाता है. संग्राम में धन कमाने के साधन घोड़े इंद्र को आकर्षित करते हैं. यज्ञ का आश्रय लेने वाले अथवा शत्रु का संहार करने वाले लोग इंद्र को आकर्षित करते हैं. (१)

Mandala 5 · Verse 2
हव एषामुरो नक्षत छ्ं श्रवस्यता मनसा निसत क्षाम्. चक्षणा यत्र सुविताय देवा धौर्न वारैभिः कृणवन्त स्वैः.. (२)

May the divine powers, with their radiant light, bestow upon us strength and prosperity, guiding us towards auspicious deeds.

इंद्र को प्रेरणा देने वाला अंगिरागोत्रीय ऋषियों का आह्वान शब्द आकाश को पूर्ण करता है. अन्न की इच्छा करने वाले देवों ने मन से धरती को प्राप्त किया. धरती पर पणिओं द्वारा चुराई गई गायों को देखते हुए देवों ने अपने कल्याण के लिए अपने तेज से इस प्रकार प्रकाश किया, जिस प्रकार सूर्य चमकता है. (२)

Mandala 5 · Verse 3
इयमेषाममृतनां गीः सर्वताता ये कृपणन्त रत्नम्. धियं च यज्ञं च साधन्न्ते नो धान्तुं वस्य१मसामि.. (३)

May this nectar-like speech of the divine, which the devoted cherish as a jewel, grant us wisdom and the means for righteous deeds, so that we may attain prosperity.

यह इन मरणरहित देवों की स्तुति है. वे यज्ञ में सभी प्रकार के रत्न देते हैं. देवगण स्तुति और यज्ञ को सिद्ध करते हुए हमें अधिक धन प्रदान करें. (३)

Mandala 5 · Verse 4
आ तत इन्द्रायवः पन्नन्ताभि य ऊर्व गोमन्तं तितृसान्. सकृत्स्वं १ ये पुरुत्रां मही सहस्रधारां बृहतीं दुदुक्षन्.. (४)

May Indra, the giver of strength, bestow upon us abundant wealth, like a thousand-streamed, vast cow, that we may be satisfied.

हे इंद्र! जो अंगिरावंशी ऋषि पणियों द्वारा चुराई गई गायों का समूह उनसे छीनना चाहते हैं, वे तुम्हारी ही स्तुति करते हैं. एक बार उत्पन्न, अनेक संतान उत्पन्न करने वाली तथा हजारों धाराओं में संपत्तिरूपी दूध दुहाने वाली धरतीरूपी गाय को दुहने के इच्छुक लोग भी इंद्र की स्तुति करते हैं. (४)

Mandala 5 · Verse 5
शचीव इन्द्रमवसे कृणुध्वमनानतं दमयन्तं पूतन्यून्। ऋभुक्षणं मघवानं सुवृतिं भर्तारं यो वज्रं नृं पुरुषुः॥ (५)

Invoke Indra, the mighty wielder of the thunderbolt, for protection and strength, the giver of boons, the sustainer of all beings.

हे यजमानो! कभी न झुकने वाले, शत्रुओं को वश में करने वाले, महान् धनसंपन्न, शोभन स्तुत्युक्त, प्रसिद्ध एवं मानवहितकारी वज्र धारण करने वाले इंद्र की शरण में रक्षा पाने के लिए जाओ। (५)


Mandala 5 · Verse 6
यद्धावान् पुरूतं पुराषाळा वृत्रहेन्द्रो अचेति प्रासहस्पतिस्तुविष्मान् यदीमुश्मसि कर्तवे करतत्.. (६)

Indra, the slayer of Vritra, the mighty and powerful, when he perceives the strength of the Asuras, then the Lord of Strength (Brihaspati) accomplishes the task.

यदावान् पुरूतं पुराषाळा वृत्रहेन्द्रो नामाान्याप्राः। अचेति प्रासहस्पतिस्तुविष्मान् यदीमुश्मसि कर्तवे करतत्.. (६)

Mandala 5 · Verse 7
ऋजीत्येनीं रुशतीं महित्वा परि जयांसि भरते रजांसि. अदब्धा सिन्धुरूपसामपस्तमाश्वा न चित्रा वपुषीव दर्शिता.. (७)

By Your greatness, You conquer the swift, shining, and vast realms, O Lord, like beautiful, radiant horses displaying their forms.

सीधी बहने वाली, श्वेत-वर्णा और दीप्त सिंधु नदी का वेगशाली जल चारों ओर बहता है. बहने वाली नदियों में सिंधु सबसे तेज है. यह घोड़ी के समान विचित्र और मोटे शरीर वाली नारी के समान दर्शनीय है. (७)

Mandala 5 · Verse 8
स्वस्था सिन्धुः सुरखा सुवासा हिरण्ययी सुकृता वाजिनीवती. ऊर्णवतिं युवतिः सीलमावत्युताधि वस्ते सुभगा मधुवम्.. (८)

The radiant, well-adorned, and prosperous river, rich in strength and adorned with wool, is clothed by the youthful, fortunate one with sweetness.

स्वस्थ सिन्धु: सुरखा (अच्छी रक्षा करने वाली) सुवासा (अच्छे वस्त्रों वाली) हिरण्ययी (स्वर्णमय) सुकृता (अच्छे कर्मों वाली) वाजिनीवती (अश्वों से युक्त) ऊर्णवतिं (ऊन से युक्त) युति (युवती) सीलमावत्युताधि (सील से युक्त) वस्ते (वस्त्र धारण करती है) सुभगा (सौभाग्यवती) मधुवम् (मधु से युक्त).

Mandala 5 · Verse 1
आ व ऋञ्जस ऊर्जा व्युष्टिष्विन्द्रं मरुतो रोदसी अनन्तकं । उभे यथा नो अहनी सचाभुवा सदो वरिवस्यत उद्दिदाः ।। (१)

May Indra and the Maruts, along with the heavens and earth, bestow upon us boundless energy and strength, so that both day and night may be filled with their divine presence and support.

हे पत्थर! अन्न वाली उषा के आते ही मैं तुम्हें भली प्रकार तैयार करता हूँ. तुम सोम रस द्वारा इंद्र, मरुत् और द्यावा-पृथ्वी को प्रसन्न करो. ये देव हम में से प्रत्येक के घर जाकर सेवा ग्रहण करें एवं घर को धन से पूर्ण कर दें. (१)

Mandala 5 · Verse 2
तदु श्रेष्ठं सवनं सुनोतनात्यो न हसतयो अद्रिः सोतरिः । चिददृश्यों अभिमूर्ति पौस्यं महो रायै चित्रतते यदर्वतः ।। (२)

The most excellent offering is poured forth by the pressing stones, which are swift and never weary. This radiant, unseen power, the source of abundant wealth, is the one that moves like swift steeds.

हे पत्थरो! तुम उत्तम सोम रस प्रस्तुत करो. तुम हाथ से पकड़े जाने पर रोके हुए घोड़े के समान हो जाते हो. सोम निचोड़ने वाला यजमान शत्रु को हटाने वाला बल प्राप्त करता है. यह पत्थर महान् धन पाने के लिए घोड़े भी देता है. (२)

Mandala 5 · Verse 3
तदिद्वस्य सवनं विवरोपो यथा पुरा मनवे गातुमश्रुतं . गोअर्णसि त्वार्षे अश्विनिर्जिं प्रेमध्वरेष्वश्रंअशिश्रयुः.. (३)

The divine offering is like the dawn, bringing forth the unheard path for humanity. The Asvins, with their golden chariot, have always been present in sacrifices.

Mandala 5 · Verse 4
अप हत रक्षसो भङ्गुरावत: स्कभायत निर्ऋतिं सेधतामतिम् . आ नो रयिं सर्ववीरं सुनोतन देवाव्यं भरत श्लोकमद्रयः.. (४)

Drive away the demons, O mighty ones, and banish misfortune. Bring us abundant wealth, O sons of men, and offer praise to the divine.

हे पत्थरो! तोड़फोड़ करने वाले राक्षसों का नाश करो. पाप को दूर करो और दुष्टबुद्धि को हटाओ. हमें समस्त संतान से युक्त धन दो एवं देवों को प्रसन्न करने वाली स्तुतियों का निर्माण करो. (४)

Mandala 5 · Verse 5
दिवृश्चिदा वोऽमवन्तरेभ्यो विश्वना चिदाश्वपस्तरेभ्यः . वायोश्रृदा सोमभरस्तरेभ्योऽग्नेश्रृदा पिृतकृतरेभ्यः.. (५)

May the mighty ones, the swift ones, the Soma-bearers, and the ancestors be pleased with us.

आदित्स से भी शक्तिशाली, सुधन्वा से शीघ्र कार्य करने वाले, सोमाभिषव हेतु वायु से भी अधिक वेगयुक्त एवं अग्नि से भी अधिक अन्नसाधक पत्थरों की तुम पूजा करो. (५)

Mandala 5 · Verse 6
प्र यद्धघ्वे मरुतः पराकाढ्यं महः संवरणस्य वस्तः. विदानासो वसो राध्यस्याराचिद्धं द्रेषः सनुतर्युयोन.. (६)

O Maruts, you who are swift and powerful, you have brought forth the great, all-encompassing light, dispelling darkness and hatred.

हे मरुतो! तुम बहुत दूर से संग्रह करने योग्य धन वहन करके लाते हो. तुम उपभोग- योग्य धन को प्राप्त करके शत्रुओं को दूर से ही अलग कर देते हो. (६)


Mandala 5 · Verse 7
य उद्घि यजे अधरेष्ठा मरुद्भ्यो न मानुषो ददाशत्. रेवत्सो वयो दधते सुवीरं स देवानामिपि गोपीथे अस्तु.. (७)

May he who, with great effort, offers sacrifices to the Maruts, the supreme among mortals, and bestows upon them, be protected by the gods, possessing abundant wealth and heroic offspring.

यज्ञ में बैठने वाला जो यजमान यज्ञ की समाप्ति पर मरुतों को दान करता है, वह अन्न, धन और सेवकों का स्वामी बनकर देवों के साथ सोमरस पीता है. (७)

Mandala 5 · Verse 8
ते हि यज्ञेषु यजियां उमा आदित्येन नाम्ना शम्भविष्टाः. ते नोडवन्तु रथर्मीणीषां महश्र यामन्त्रधरे चकानाः.. (८)

May those who are worshipped in sacrifices, named Uma and Aditya, protect us, who are the upholders of great glory and the bearers of the divine chariot.

यज्ञ के अधिकारी एवं रक्षक मरुत्, आकाश के जल द्वारा सुख देते हैं, तेज चलने वाले रथ से आकर हमारी बुद्धि की रक्षा करते हैं एवं महान् हवि की अभिलाषा करते हुए यज्ञ में आते हैं. (८)

Mandala 5 · Verse 9
विप्रासो न मन्मभिः स्वाद्ध्यो देवाव्योऽ न यज्ञैः स्वप्रसः. राजानो न चित्राः सुसन्दृशः क्षितीनां न मर्या अरेपसः.. (९)

The learned, with their hymns, and the gods, with their sacrifices, are ever-present. Kings, brilliant and beautiful, protect the earth, free from blemish.

Mandala 5 · Verse 10
yo me dhenūnāṁ śataṁ vaidadaśvir yathā dadat | taranta iva maṁhanā

Mandala 5 · Verse 11
ya īṁ vahanta āśubhiḥ pibanto madiram madhu | atra śravāṁsi dadhire

Mandala 5 · Verse 12
yeṣāṁ śriyādhi rodasī vibhrājante ratheṣv ā | divi rukma ivopari

Mandala 5 · Verse 13
yuvā sa māruto gaṇas tveṣaratho anedyaḥ | śubhaṁyāvāpratiṣkutaḥ

Mandala 5 · Verse 14
ko veda nūnam eṣāṁ yatrā madanti dhūtayaḥ | ṛtajātā arepasaḥ

Mandala 5 · Verse 15
yūyam martaṁ vipanyavaḥ praṇetāra itthā dhiyā | śrotāro yāmahūtiṣu

Mandala 5 · Verse 16
te no vasūni kāmyā puruścandrā riśādasaḥ | ā yajñiyāso vavṛttana

Mandala 5 · Verse 17
etam me stomam ūrmye dārbhyāya parā vaha | giro devi rathīr iva

Mandala 5 · Verse 18
uta me vocatād iti sutasome rathavītau | na kāmo apa veti me

Mandala 5 · Verse 19
eṣa kṣeti rathavītir maghavā gomatīr anu | parvateṣv apaśritaḥ

Mandala 5 · Verse 1
ṛtena ṛtam apihitaṁ dhruvaṁ vāṁ sūryasya yatra vimucanty aśvān | daśa śatā saha tasthus tad ekaṁ devānāṁ śreṣṭhaṁ vapuṣām apaśyam

Those who are worthy of worship, those who are seen with reverence, and householders who are respected, are all free from sin.

पूजनीय व दर्शीय तथा गृहस्वामी मान्यों के समान पापरहित होते हैं.. (१)

Mandala 5 · Verse 2
अन्न्ने ये भाजासा रुक्मवक्षसो वातासो न स्वयुजः सधउतयः:। प्रज्ञातातारो न ज्येष्ठा: सुनीतयः: सुशर्माणो न सोमं ऋतं यते.. (२)

May the radiant, strong, and well-guided beings, who are the protectors of truth, bring us auspiciousness and nourishment.

मरुदगण अग्नि के समान तेज से सुशोभित, स्वर्णालंकारों से युक्त वक्षःस्थल वाले, वायु के समान स्वयं मिलने वाले व शीघ्र गतिशाली, उत्तम ज्ञानीयों के समान पूज्य तथा शोभन नयन एवं मुख वाले सोम के समान यज्ञ में जाते हैं.. (२)

Mandala 5 · Verse 3
वातासो न ये धुन्यो जिगत्त्वोडङ्ग्नीनां न जििह्वा विरोकिणः:। वर्मण्वन्तो न योधा: शिमीवन्तः: पितृणां न शंसा: सुरातायः.. (३)

May we not be tossed by the winds of change, nor consumed by the flames of desire; may we not be like warriors without armor, nor like those who lack the wisdom of our ancestors.

मरुदगण वायु के समान शत्रुओं को कंपित करने वाले व गतिशील, अग्नि की ज्वालों के समान सुंदर मुख वाले, कवचधारी योधाओं के समान शौर्य कर्म करने वाले एवं पितरों के वचनों के समान शोभन दानी हैं.. (३)

Mandala 5 · Verse 4
रथानां न येश्रा: सनाभ्यो जिगीवांसो न शूरा अभिधेवः:। वरेयवो न मर्या घुतप्रुबोधिस्वर्तारो अर्क्नं सुष्भः.. (४)

May the victorious warriors, skilled in chariots and brave in battle, awaken to the praise of the divine, their strength flowing like rivers.

मरुदगण रथ के पहियों के अरों के समान एक आश्रय से संबंधित, जयशील शूरों के समान दीप्ति वाले, दान करने वाले मान्यों के समान जल गिराने वाले एवं शोभन स्तोत्र करने वालों के समान उत्तम शब्द वाले हैं.. (४)


Mandala 5 · Verse 5
अश्वासो न ये ज्येष्ठास आशावो दिधिषुवो न रथ्यः: सुदाानवः:। अपो न निन्नेरुदभिजिगत्त्वो विश्वरूपा अज्ज्रसो न सााम्भॏ:.. (५)

May the swift, life-giving waters, like the best of steeds, bring us abundant nourishment and victory.

मरुदगण घोड़ों के समान प्रशंसनीय एवं शीघ्रगति वाले, धन धारण करने वाले रथस्वामीयों के समान शोभन दानयुक्त, सरिताओं के समान जल लेकर जाने वाले तथा अनेक रूपधारी अंगीरागोत्रीय ऋषियों के समान सामगान करने वाले हैं.. (५)

Mandala 5 · Verse 6
ग्रावाणो न सूरूयः: सिन्धुमातार आद्रेरासो अद्र्यो न विश्वहा.। शिशुला न क्रील्यः: सुमातातरो महाग्रामो न यामुत्त्विषा.. (६)

The stones are not like the sun, nor are the rivers like the mother of the ocean; the mountains are not like the world. The young are not for play, nor are the great ones for desire.

मरुदगण जल बरसाने वाले, मेघों के समान नदियों के निर्माता, ध्वंसक वज्र के समान सदा शत्रुनाशक्कर्ता, शोभन माताओं वाले, बच्चों के समान क्रीड़ाशील एवं विशाष जलसमूह के समान चलते समय दीप्ति से युक्त हैं.. (६)

Mandala 5 · Verse 7
उषासा न केतेवोऽध्वरश्रियः: शुंभ्यंवो नाजिजिभ्यिष्त्वन्.। सिन्धो न ययियियो भाज्दृष्यः: परावतो न योजनानॏ ममिरे.. (७)

The dawn, like the adornments of sacrifice, shines forth, and the swift ones, like the rivers, move onward, their brilliance reaching far.

मरुद्गण उषओं की किरणों के समान यज का आश्रय लेने वाले, कल्याण की कामना करने वाले, वरों के समान आभूषणों से सुशोभित, नदियों के समान गतिशील एवं चमकीले आयुधों व दूर जाने वाले पथिकों के समान दूर देश तक जाने वाले हैं। (७)

Mandala 5 · Verse 8
सुभागाद्वा देवाः कृणुता सुरन्नान्स्स्तोतृन्मृतो वावृधानाः। अधि स्तोत्रस्य सख्यस्य गात सनाद्धि वो रत्नधेयानि सन्ति.. (८)

O gods, grant us blessed and abundant sustenance, and may our praises, ever growing, reach you. May you accept our hymns and songs, for you possess eternal treasures.

हे देव मरुतो! तुम स्तुतियों से बढ़कर हम स्तुति करने वालों को शोभन धन एवं रत्नों से युक्त करो तथा हमारे सखा रूप स्तोत्र को स्वीकार करो। तुम सदा से हमें रत्न दान करते आए हो. (८)

Mandala 5 · Verse 9
अपश्यमस्य महतो महित्वममर्त्यस्य मर्त्यासु विश्वं। नाना हन् विभृते सं भरते असिन्वन्ती बप्सती भूर्यन्तः.. (९)

I have seen the greatness of this infinite, immortal Being within mortal beings, encompassing the universe. He sustains and supports all, the devourer and the nourisher, filling everything.

मैं मरने वाली प्रजाओं में मरणरहित अग्नि का महान् महत्त्व देखता हूं. इनके दोनों जबड़े अलग-अलग एवं दांतों से भरे हुए हैं. ये जबड़े स्तोता को न चबाकर लकड़ियों का भक्षण करते हैं. (९)

Mandala 5 · Verse 1
ṛtasya gopāv adhi tiṣṭhatho rathaṁ satyadharmāṇā parame vyomani | yam atra mitrāvaruṇāvatho yuvaṁ tasmai vṛṣṭir madhumat pinvate divaḥ

The Father, Vishwakarma, who invokes Agni, offered the entire world into the fire, and then seated himself within it. Desiring wealth through praise, he first became the covering of the fire and then entered into it.

अग्नि का आह्वान करने वाले हमारे पिता विश्वकर्मा सारे संसार को अग्नि में हवन के लिए डालकर स्वयं भी उसीमें बैठ गए। वे स्तुतियों द्वारा धन की कामना करते हुए पहले अग्नि का आच्छदन बने और बाद में उसीमें प्रवेश कर गए। (१)

Mandala 5 · Verse 2
किं स्विद् आसीदधिष्ठानमारम्भणं कतमत्त्वत्कृतं यतो भूमं जनयन्विश्वकर्मा वि. विश्वचक्षाः.. (२)

What was the foundation, what the beginning, that You, the all-seeing Vishvakarma, brought forth this vast universe?

सृष्टि बनाते समय विश्वकर्मा का आधार क्या था? उन्होंने सृष्टि का आरंभ कहाँ और किस प्रकार किया? विश्व को देखने वाले विश्वकर्मा के किस स्थान पर स्थित होकर धरती के बाद आकाश को बनाया? (२)

Mandala 5 · Verse 3
विश्वतश्चक्षुत विश्वतोमुखो विश्वतोबाहुहूत विश्वतस्पात्. सं बाहुभ्यां धमति सं पतत्रैर्वाभुमी जनयन्देव एकः.. (३)

The One God, with eyes, faces, arms, and feet everywhere, creates the earth and sky with His mighty arms and wings.

विश्वकर्मा की आँखें, मुख, बाहु एवं चरण सब और फैले हुए हैं. उस देव ने अकेले ही बाहुओं और चरणों से भली-भाँति गति करके द्यावा और भूमि को बनाया. (३)

Mandala 5 · Verse 4
किं स्विद्नं क उ स वृक्ष आस यतो द्यावापृथिवी निष्टक्षुः. मनीषिणो मनसा पृच्छतेदु तदध्यक्षष्ठुवनानि धारयन्.. (४)

Who is the knower? What is the tree from which the heavens and earth were fashioned? The wise, through their minds, seek to understand this, for He sustains all these worlds.

वह कौन सा वन एवं वृक्ष है, जिसने द्यावा-पृथिवी को निष्पादित किया. हे विद्वानो! अपने से यह पूछो कि ईश्वर भुवनों को धारण करके किस पर स्थित होता है? (४)

Mandala 5 · Verse 5
या ते धामानि परमाणि यावमा या मध्यमा विश्वकर्मनुतेमा. शिक्षा सखिभ्यो हविषि स्वधावः स्वयं यजस्व तन्वं वर्धमानः.. (५)

O Vishwakarma, may your supreme, highest, and middle abodes be revealed to your friends through offerings. May you yourself be worshipped, growing in strength.

हे हव्यरूप अन्न धारण करने वाले विश्वकर्मा! तुम्हारे जो परम धाम अथवा उत्तम, मध्यम एवं साधारण शरीर हैं, उन्हें हव्य प्राप्त करके हमें दो. तुम अपने शरीर को बढ़ाते हुए स्वयं यज्ञ करो. (५)

Mandala 5 · Verse 6
विश्वकर्मन् हविषा वावृधानः स्वयं यजस्व पृथिवीमुत घाम्. मुह्यन्त्वन्ये अभितो जनास इहास्माकं मधवा सुरिरस्तु.. (६)

O Vishwakarma, nourished by offerings, may you yourself perform the sacrifice for Earth and Sky. Let others be bewildered; here, may our wealth and sustenance be abundant.

हे विश्वकर्मा! तुम हव्य से बढ़कर स्वयं धरती एवं द्यौ को पूजित करो, इस यज्ञ में यज्ञ न करने वाले लोग मूर्च्छित हों एवं धनस्वामी विश्वकर्मा स्वर्गफल देने वाले हों. (६)


Mandala 5 · Verse 7
वाचस्पतिं विश्वकर्मणमुतये मनोजुवं वाजे अद्धा हवम. स नो विज्ञाने हवनानि जोषिद्विश्भभूरवसे साधुकर्मा.. (७)

May the Lord of Speech, the divine architect, swift as thought, accept our invocation. May He, the all-pervading and righteous doer, bless us with knowledge and protection.

Mandala 5 · Verse 1
चक्षुषः पिता मनसा हि धीरो घृतमनेऽजनन्नमानने। यददन्तददृहन्त पूर्वं आदिद् द्यावापृथिवी अप्रथेताम्.. (१)

The wise one, father of the eye, by the mind, having poured ghee, brought forth the unmoving. Then the heaven and earth expanded.

शरीर को उत्पन्न करने वाले, स्वयं को अद्वितीय समझने वाले एवं धीर विश्वकर्मा ने सबसे पहले जल को उत्पन्न किया। इसके पश्चात् जल में इधर उधर चलने वाले द्यावा-पृथ्वी का निर्माण किया. विश्वकर्मा ने द्यावा-पृथ्वी को प्राचीन एवं अंतिम भागों को दृढ़ करके प्रसिद्ध किया. (१)

Mandala 5 · Verse 2
विश्वकर्मा विमना आद्धिधया धाता विधाता परमोत संदृक्. तेषामिहानि समिषा मदन्ति यत्रा सप्तऋषीन्नपर एकमाहुः.. (२)

The divine architect, the thoughtful creator, the ordainer, the supreme seer, are all one. In them, the seven sages find their sustenance, for none can surpass them.

विशाल मन वाले विश्वकर्मा स्वयं महान हैं. वे सृष्टि का निर्माण करने वाले वृष्टिकर्ता, श्रेष्ठ एवं सब कुछ देखने वाले हैं. विद्वान् लोग कहते हैं कि सप्तर्षियों से भी ऊँचे स्थानों को वे अकेले ही देखते हैं. उन सप्तर्षियों की अभिलाषाएँ हव्यदान द्वारा पूर्ण होती हैं. (२)

Mandala 5 · Verse 3
यो नः पिता जनिता यो विधाता धामानि वेद भुवनानि विश्व. यो देवानां नामधा एक एव तं सम्प्रश्नं भुवनया.. (३)

He who is our Father, Creator, and Ordainer, who knows all worlds and abodes, and is the sole name-giver to the gods, to Him we offer our salutations.

जो विश्वकर्मा हमारा पालन करने वाले, उत्पन्न करने वाले व विश्व के उत्पादक हैं तथा देवों के तेज एवं सभी भुवनों को जानते हैं. जो एकमात्र देवों का नाम रखने वाले हैं, सब प्राणी उन्हीं के विषय में जानना चाहते हैं. (३)

Mandala 5 · Verse 4
त आयजन्त् द्रविणं समस्मा ऋषयः पूर्वं जरितारो न भूना. असूते सूतं रजसि निषष्ते ये भूतानि समकृण्वन्निमानि.. (४)

The ancient sages, the first singers, invoked wealth for Him, the creator of these beings, who fashioned them in the primal dust.

जिन ऋषियों ने स्थावर और जंगमरूप विश्व का निर्माण हो जाने पर सभी प्राणियों को बनाया, उन्हीं ऋषियों ने प्राचीन स्तोताओं के समान धन व्यय करके यज्ञ किया. (४)

Mandala 5 · Verse 5
परो दिवा पर एना पृथिव्या परो देवेभिरसुरैर्यदस्ति. कं स्विद्गर्भं प्रथमं दध आपो यत्र देवाः समपश्यन्त विश्वे.. (५)

The waters, the primordial source, first held the seed from which all existence, including the gods and demons, was born. This origin is beyond the heavens, beyond the earth, and beyond all that is.

वह ईश्वर द्युलोक, धरती, देवों व असुरों से महान् हैं. जलों ने वह कौन सा गर्भ धारण किया था, जहाँ सभी देवों ने स्वयं को परस्पर मिला हुआ देखा. (५)

Mandala 5 · Verse 6
अजस्य नाभावธ्येकमपितं यस्मिन्निश्श्रुतानि भुवनानि तस्थुः..(६)

Upon the navel of the unborn, the One is established, from whom all worlds are supported and abide.

जल ने उन्हीं विश्वकर्मा को गर्भ में धारण किया था, वहीं सब देव एक-दूसरे से मिले। उस जन्मरहित की नाभि में ब्रह्मांड स्थित है, उसीमें सारा संसार स्थित है। (६)

Mandala 5 · Verse 7
न तं विदाथ य इमा जजान्युष्मकमन्तरं बभूव. नीहारेण प्रावृत्ता जल्या चासुतृतृप उक्थशासश्रन्ति.. (७)

You do not know Him who created you; He is within you. Like those who are thirsty and parched, you wander, covered by mist, seeking Him with words.

न तं विदाथ य इमा जजान्युष्मकमन्तरं बभूव। नीहारेण प्रावृत्ता जल्या चासुतृतृप उक्थशासश्रन्ति.. (७)

Mandala 5 · Verse 1
यस्ते मन्थोऽविद्धड्रज् सायक् सह ओजः पुष्यति विश्वमानुषक्. साह्राम् दासमार्यं त्वया सहसकृतेन सहसा सहस्वता.. (१)

May that invigorating draught, which bestows strength and vitality upon all humanity, empower you to conquer all adversaries, both enslaved and free, with your might and swiftness.

हे वज्र के समान सारपूर्ण एवं बाण के समान शत्रुनाशक मन्यु! जो यजमान तुम्हारी पूजा करता है, वह ओज एवं बल धारण करता है एवं संग्राम में सभी शत्रुओं को जीतता है. तुम्हारी सहायता से हम दास और आर्य दो प्रकार के शत्रुओं को हरावें, तुम शक्ति के उत्पादक एवं शक्तिशाली हो. (१)

Mandala 5 · Verse 2
मन्युरिन्द्रो मन्युर्देवा मनुर्हन्ता वरुणो जातवेदाः. मन्युं विश्वं ईळते मानुषीयाः पाहि नो मन्यो तपसा सजोषाः.. (२)

O Wrath, O Indra, O divine Wrath, O slayer, O Varuna, O Jatavedas, the entire world praises Wrath. Protect us, O Wrath, with your radiant power.

मन्यु इंद्र है, मन्यु ही देव है, मन्यु वरुण, होता और जातवेद अग्नि हैं. सभी मानव प्रजाएं मन्यु की स्तुति करती हैं. हे मन्यु! तुम हमारे पिता तप के साथ मिलकर हमारी रक्षा करो. (२)

Mandala 5 · Verse 3
अभिहि मन्यो तवसस्तीयन्तायुसा युजा वि जहि शत्रून्. अमित्रहा वृत्रा हसुहा च विश्वा वसून्या भरा त्वं नः.. (३)

O wrathful one, with your mighty weapons, strike down the enemies with your companions. O destroyer of foes and slayer of Vritra, bring us all wealth.

हे अतिशय शक्तिशाली मन्यु! तुम हमारे यज में आओ. तुम मेरे पिता तप से मिलकर शत्रुओं को मारो. हे शत्रुनाशक वृत्रवधकर्ता एवं राक्षसों को मारने वाले मन्यु! तुम सब प्रकार का धन हमारे लिए लाओ. (३)

Mandala 5 · Verse 4
त्वं हि मन्यो अभिमभ्यूजाः स्वयम्भूभार्मो अभिमातिबाहः. विश्वचर्षणिः सहुरिः सहावानस्मास्वोजः पूतNASA धेहि.. (४)

You, O Wrath, are self-created and all-pervading, the vanquisher of enemies. Grant us strength, O powerful one, that we may be pure and victorious.

हे मन्यु! तुम शत्रुओं को हराने वाली शक्ति से संपन्न स्वयं ही उत्पन्न कृद्ध

Mandala 5 · Verse 5
अभागः सन्नप परतो अस्मि तव कृत्वा तविष्स्य प्रचेतः। तं त्वा मन्यो अक्रतुर्जिहीळाहं स्वां तनूनर्लदेयाय मेहि.. (५)

Though I am without fortune, I am yours, O powerful and wise one, having made you my refuge. I approach you, O wrathful one, with a mind devoid of understanding, offering myself for your acceptance.

हे उत्तम ज्ञान वाले मन्यु! तुम्हारे यज्ञकर्म में भाग न लेने के कारण मैं युद्ध में शत्रुओं से हारकर दूर आ गया हूं. मुझ यजंरहित ने तुमको कुछ कर दिया है. तुम शक्ति देने के निमित्त मेरे शरीर में आओ. (५)

Mandala 5 · Verse 6
अयं ते अस्यूप मेहर्वाड् प्रतीचीनः सहुरे विश्वधायः। मन्यो वज्रिभिभि मामा ववृस्व हनाव दस्युंरूत बोध्यापे... (६)

May this sharp, swift, all-sustaining weapon be yours, O mighty one. With it, strike down the enemy and be victorious.

हे शत्रुओं को सहनशील एवं विश्व के धारक मन्यु! मैं तुम्हारा यज्ञ करने वाला सेवक हूं. तुम मेरे पास आओ. हे वज्रधारी मन्यु! तुम मेरे पास आकर बढ़ो. तुम मुझे अपना बंधु समझो. हम दोनों शत्रुओं को मारें. (६)

Mandala 5 · Verse 1
ā cikitāna sukratū devau marta riśādasā | varuṇāya ṛtapeśase dadhīta prayase mahe

Through sacrifice, the gods are sustained, and Soma resides in the heavens.

किया है. यज्ञ के द्वारा देवता स्थित हैं एवं सोम द्युलोक में स्थित हैं. (१)

Mandala 5 · Verse 2
सोमेनदित्या बलिनः सोमेन पृथिवी मही. अथो नक्षत्राणामेषामपस्थे सोम आहृतः.. (२)

The moon nourishes the strong and makes the earth great. In its embrace, the essence of these stars is brought forth.

देगण सोम के कारण ही शक्तिशाली बनते हैं एवं सोम से ही धरती महान् बनी है. सोम इन नक्षत्रों के समीप स्थित हैं. (२)

Mandala 5 · Verse 3
सोमं मन्यते पपिवा NSSं पिबन्त्ये षोषधम्. सोम यं ब्रह्माणी विदुर्ना तस्याश्रति कश्चन.. (३)

Those who drink the Soma they believe to be the herb, do not truly drink it. Only those who know Soma through Brahman (divine knowledge) truly partake, and none can reach them.

लोग जब सोमलता को पीसाते हैं तभी समझ लेते हैं कि हमने सोम रस पी लिया. ब्राह्मण लोग जिसे सोम समझते हैं, उसे कोई भी नहीं पी सकता. (३)

Mandala 5 · Verse 4
आच्छेद्दिनां गुर्पितो बाहतेः सोम रक्षितः. ग्राव्णामिच्छन्त्वन्तिष्ठसि न ते अभ्राति पार्थिवः.. (४)

You, the protector of Soma, rise with the pressing stones, and though you are the lord of the earth, you do not lack brothers.

हे सोम! छिपाने के साधन जानने वाले स्तोता लोग तुम्हें छिपाकर सुरक्षित रखते हैं. तुम पत्थरों का शब्द सुनते हो. धरती पर रहने वाला कोई भी मनुष्य तुम्हें नहीं पी सकता. (४)

Mandala 5 · Verse 5
यत्त्वा देव प्रपिबन्ति तत आ प्यायसे पुनः: वायुः सोमस्य रक्षिता समानां मास आकृतिः.. (५)

The divine essence that you drink, from that you are replenished again; the wind protects Soma, and the moon's form is the month.

हे सोम! लोग तुम्हें तीनों सवनों में पीते हैं, इससे तुम बार-बार बढ़ते हो. वायु उसी प्रकार सोम की रक्षा करते हैं, जिस प्रकार वायु के समान आकार वाले मास, वर्ष की रक्षा करते हैं. (५)


Mandala 5 · Verse 6
रैभ्यासीनुदेयी नाराशंसि न्योचनी. सूर्याया भद्रमिद्रासो गाथयैति परिष्कृतम्.. (६)

The radiant Sun, praised by hymns, brings auspiciousness and is adorned with songs.

सूर्यपुत्री सूर्या के विवाह के समय रंभी नामक ऋचाएंं उसकी सखियां बनी थीं तथा नाराशंसि नामक ऋचाएंं उसकी दासियां बनीं. सूर्या का पूरा कल्याणकारी वस्त्र गाथा के द्वारा ही बनाया गया था. (६)

Mandala 5 · Verse 1
वि हि सोतोरुक्षत नेन्द्रं देवममंसत. यत्रामददृष्वाकपिरयः पुष्टेषु मत्स्खा विश्वास्मादिन्द्र उत्तरः.. (१)

They did not consider Indra, the divine, to be the source of their strength. But Indra, the most powerful, is superior to all, even to those who are strong and boastful.

जो सोमरस निकालने वाले (ऋत्विजों) ने इन्द्र को देव नहीं माना, और जहाँ वृषाकपि ने पुष्ट (पशुओं) में मत्सर (ईर्ष्या) की, वहाँ इन्द्र ने उत्तर दिया।

Mandala 5 · Verse 2
नो अह प्र विन्दस्यन्यत्र सोमपीतये विश्वास्मादिन्द्र उत्तरः.. (२)

No one finds anything beyond the enjoyment of Soma, for Indra is superior to all.

सोमपान के अतिरिक्त मुझे (इन्द्र को) कहीं भी (देवता) नहीं मिला, वहाँ इन्द्र ने उत्तर दिया।

Mandala 5 · Verse 3
किंमयं त्वां वृषाकपिश्वकार हरितो मृगः. यस्मा इ rửaसीदु न्शयाँ वा पुष्टिमदृसु विश्वास्मादिन्द्र उत्तरः.. (३)

What has the spotted deer, the swift one, done to you, O Indra? From whom has this prosperity come to us, and from whom will it come? You are the supreme one.

यह वृषाकपि ने हरे रंग के मृग (हिरण) के समान तुम्हारा क्या प्रिय किया है, जिसके लिए तुम पुष्ट (पशुओं) में (उदार बनकर) अन्न देते हो? वहाँ इन्द्र ने उत्तर दिया।

Mandala 5 · Verse 4
यमिमं त्वां वृषाकपिं प्रियमिन्द्राभिरक्षसि. श्र्वास्य जम्भदिपि कर्णे वराहयुर्विश्वास्मादिन्द्र उत्तरः.. (४)

Indra, you protect this beloved Vrishakapi, who is like a boar in his strength and ferocity. Indra is superior to all.

हे इन्द्र! जिस प्रिय वृषाकपि की तुम रक्षा करते हो, उसके कान को कुत्ते की अभिलाषा करने वाला कुत्ता काटे। वहाँ इन्द्र ने उत्तर दिया।

Mandala 5 · Verse 5
प्रिया तइषानि मे कपिव्यर्का व्यदृदुषत्. शिरो न्स्वस्य रविषं न सुगं दुष्कृते भुवं विश्वास्मादिन्द्र उत्तरः.. (५)

May the divine sun, the source of all, grant us strength and protection. May we be free from suffering and evil deeds, for Indra, the supreme Lord, is beyond all.

हे इन्द्रानी! यह कहा—"यजमानों द्वारा मेरे लिए निर्मित प्रिय हवि वृषाकपि ने दूषित कर दिए। मैं शीघ्र ही इसका सिर काट डालूंगी। मैं इस दुष्कर्म करने वाले का सुख नहीं चाहती। इन्द्र सबसे श्रेष्ठ हैं।" (५)

Mandala 5 · Verse 1
रक्षोहणं वजिनमा जिधर्मि मित्रं प्रथिष्ठमुप यामि शर्मं। शिशानो अग्निः कृतुभिः समिद्धः स नो दिवा स रिषपः पातु नक्तम्।.. (१)

May the radiant Agni, sharpened by His powers and fully ignited, protect us day and night from evil and harm, bringing us boundless refuge and friendship.

मैं राक्षसों के हंता शक्तिशाली यजमानों के मित्र और अधिक स्थूल अग्नि का घृत से हवन करता हूं एवं अग्नि के घर के पास जाता हूं. ज्वालाओं को तेज करने वाले अग्नि यजमानों द्वारा प्रज्वलित होते हैं. वे हमें हिंसक राक्षसों से रात-दिन बचावें. (१)

Mandala 5 · Verse 2
अयोदंष्ट्रोऽर्चिषा यातुधानानुप स्पृश जातवेदः समिद्धः। आ जिह्वा मूर्देवान्भस्व ऋव्यादो वृक्तव्यप्सु धत्स्यसान्।। (२)

O Agni, the consumer of flesh, with your blazing jaws, consume the Rakshasas, and with your radiant tongue, seize and destroy the flesh-eating demons in the waters.

हे जातवेद! तुम प्रज्वलित होकर एवं लोहे के समान तेज दांतों वाले बनकर अपनी ज्वालाओं से राक्षसों को जलाओ. तुम अपनी जीभ के समान ज्वालाओं से हिंसक राक्षसों को मारो एवं मांसभक्षी राक्षसों को काटकर अपने मुंह में रख लो (२)

Mandala 5 · Verse 3
उभौयाविद्रुपे धेहि दंष्ट्रा हिंसः शिशानाऽवरं परं च। उत्तान्तExi परि याहि राज्ञ्जम्भैः सं धेह्याभि यातुधानान्.. (३)

O powerful one, with sharpened fangs, devour both the low and the high. With your mighty jaws, seize and consume the demons.

हे दोनों जभड़ों में दांतों वाले एवं राक्षसहिंसक अग्नि! तुम अपनी दोनों ओर की दाढ़ें तेज करते हुए वधयोग्य राक्षसों पर जमा दो. हे दीप्त अग्नि! तुम आकाश में स्थित राक्षसों के समीप जाओ एवं अपने दांतों से भक्षण करो. (३)


Mandala 5 · Verse 4
यज्ञैरिषुः संमनमानो अग्ने वाचा शल्यां अशनिभिर्दिहानः। ताभिर्विध्य हृदये यातुधानान् प्रतीचो बाहन्प्रति भङ्ग्ध्येषाम्.. (४)

O Agni, with sacrifices and arrows, you pierce the hearts of demons with your words and weapons. With these, strike down the obstructing forces, breaking their arms.

हे अग्नि! तुम हमारे यज्ञों और स्तुतियों के द्वारा बाणों को झुकाते हुए एवं उनके फलों को वज्रों के द्वारा तेज करते हुए उन बाणों से राक्षसों के हृदयों को वेधो तथा उनकी भुजाओं को तोड़ दो. (४)

Mandala 5 · Verse 5
अग्ने त्वचं यातुधानस्य भिन्धि हिंस्ाशनिहसा हन्तवेनम्। प्र पर्वाणि जातवेदः शृणीहि ऋव्यात्क्रविष्ुवि चिनोतु वृक्णम्.. (५)

O Agni, tear away the skin of the demon, and with your thunderbolt, strike and kill him. O Jataveda, break his joints and limbs, and let the flesh be consumed by the devourer.

हे जातवेद अग्नि! राक्षसों की खाल को काट डालो. हिंसक वज्र उन्हें ताप से मारे. तुम राक्षसों के शरीर के भाग अलग-अलग कर दो. मांस की इच्छा करने वाले मांसाहारी जंतु इनके छिन्ना-भिन्न शरीरों को खावें. (५)

Mandala 5 · Verse 1
इन्द्रं स्तोवा नृतमं यस्य महा विबबाधे रोचना वि जमो अन्तान्. आ यः पर्वा वर्णोद्धरोभिः प्र सिन्धुभ्यो रिचिानो महिस्वा.. (१)

Praise the most excellent Indra, whose greatness dispels darkness and expands the horizons. He, with his mighty powers, fills the rivers and the vast expanse.

हे स्तोता! नेताओं में श्रेष्ठ इंद्र की स्तुति करो. उनके महत्त्व से दूसरों के तेज हार जाते हैं. उनकी महिमा सारी धरती को पराभूत करती है. वे मानव प्रजा को धारण करते हैं. उनका महत्त्व सागर से भी बड़ा है तथा वे अपने तेज से द्यावा-पृथ्वी को पूर्ण करते हैं. (१)

Mandala 5 · Verse 2
स सूर्यः पर्यूरुं वरास्येन्द्रो वृत्यादथ्ये चक्रा. अतिष्ठन्तमपस्यंशनं सर्गं कृष्ना तमांसि त्वष्या जघान.. (२)

Indra, the radiant sun, with his divine might, shattered the darkness and vanquished the obstructing forces.

सारथि जिस प्रकार रथ का पहिया घुमाता है, उसी प्रकार शोभन वीर्य वाले इंद्र अपने अधिक तेज को चारों ओर घुमाते हैं. इंद्र अपने तेज से शीघ्र गति वाले एवं कार्यकुशल विश्व के समान अंधकार को नष्ट करते हैं. (२)

Mandala 5 · Verse 3
समानमस्मा अनपावदच क्षमया दिवो असमं ब्रह्म नव्यम्. वि यः पृषेव जनिनमार्यं इन्द्रश्रि काय न सखायमीषे.. (३)

He who is equal, unblameable, and patient like the sky, the new, unequalled Brahman, and who, like a father, cherishes the worshipper, him, O Indra, we praise as our friend.

हे स्तोता! तुम मेरे साथ उन इंद्र के लिए निष्कृष्ठता रहित द्यावा-पृथ्वी में अद्वितीय एवं नए स्तोत्र को बोलो जो यज्ञों में उत्पन्न स्तोत्रों को सुनने के लिए उतने ही इच्छुक हैं, जितने कि शत्रुओं को देखने के लिए हैं. वे अपने मित्रों का बुरा नहीं चाहते. (३)

Mandala 5 · Verse 4
इन्द्राय गिरो अनिशितसर्गा अपः प्रेयं समरस्य बुभ्नात. यो अक्षेणैव चकिया शचीभिविर्धत्स्तम्भं पृथ्वीमुत घाम्.. (४)

Praise Indra, whose boundless waters flow, and whose might sustains the battlefield. He, with his strength, upholds the earth and sky.

मैंने इंद्र के लिए सर्वोच्च स्तुतियां की हैं. इन स्तुतियों द्वारा मैंने अंतरिक्ष के जल को बरसने के लिए प्रेरित किया है. वे इंद्र अपने कर्मों द्वारा द्यावा और पृथ्वी को इस प्रकार धारण करते हैं, जिस प्रकार धुरा पहियों को धारण करता है. (४)

Mandala 5 · Verse 1
सहस्रशीर्षा पुरुषः सहस्राक्षः सहस्रपात्। स भूमिं विश्वतो वृत्वात्यतिष्ठद्दशाङ्गुलम्.. (१)

The Supreme Being, with a thousand heads, a thousand eyes, and a thousand feet, pervades the entire earth, extending beyond it by ten fingers' breadth.

विराट पुरुष के हजार शीर्ष, हजार आँखें और हजार चरण हैं. वह धरती को चारों ओर से घेरकर उससे दस अंगुल अधिक स्थित है. (१)

Mandala 5 · Verse 2
पुरुष एवेदं सर्वं यद्भूतं यच्च भव्यम्। उतामृतत्वस्येशानो यदन्नेनातिरोहति.. (२)

This entire universe, both what has been and what will be, is verily the Supreme Being. He is the Lord of immortality, by whom this existence grows.

जो कुछ हो चुका है अथवा होने वाला है, वह सब विराट पुरुष ही है. वह अमृत का स्वामी है, क्योंकि वह कारण अवस्था छोड़कर जगत् अवस्था को धारण करता है. इस प्रकार प्राणी उसको भोगते हैं. (२)

Mandala 5 · Verse 3
एतावानस्य महिमातो ज्यायाँश्च पुरुषः। पादोऽस्य विश्वा भूतानि त्रिपादस्यामृतं दिवि.. (३)

This is His glory, and He is greater than this. All beings are but one foot of His; three feet of His are immortal in the heavens.

यह सारा ब्रह्मांड विराट पुरुष की महिमा है. वे स्वयं इससे बड़े हैं. सभी प्राणी उनके चौधाई अंश हैं. इनके तीन मरणरहित अंश दिव्यलोक में रहते हैं. (३)


Mandala 5 · Verse 4
त्रिपादूर्ध्व उदैत्पुरुषः पादोऽस्येहाभवत्पुनः। ततो विश्वङ् व्यक्रामत्साशनाऽशने.. (४)

From Him, the Purusha, three-fourths ascended, and one-fourth became manifest here again. From this, the universe, both animate and inanimate, spread forth.

तीन चरणों वाले विराट पुरुष ऊपर उठे. उनका केवल एक चरण यहां स्थित रहा. इसके पश्चात् वे भोजन करने वाली एवं भोजन न करने वाली वस्तुओं के रूप में व्याप्त हुए. (४)

Mandala 5 · Verse 1
सं जाग्वृद्धिर्ज्जरमाण इष्यते दमे दमना इष्पन्नृष्पदे. विश्वस्य होता हविषो वरेण्यो विभुर्विभावा सुखखी सखीयते.. (१)

The awakened one, growing and ever-youthful, is desired in the home, the sustainer of all, the most worthy recipient of offerings, the radiant and all-pervading, who is cherished as a friend.

हे जागरणशील स्तोताओं द्वारा प्रशंसित अग्नि! तुम प्रज्ज्वलित होते हो. दानशील अग्नि

Mandala 5 · Verse 2
स दर्शत्शिरतिरतिग्गृह्णे वनेवने श shí श्रये तक्वीव.। जनज्जनं जन्यो नाति मन्यते विश आ क्षिति विश्योऽ विशंविशम्.. (२)

He who sees the divine in all beings, and all beings in the divine, attains liberation and is no longer bound by the cycle of birth and death.

दर्शनीय शोभा वाले, अतिथि एवं मानहितैषी अग्नि यजमानों के घरों और वनों में निवास करते हैं. वे गतिशिल के समान किसी व्यक्ति को नहीं छोड़ते. प्रजाहितकारी अग्नि मानवों के पास जाते हैं एवं सभी प्रजाओं का आश्रय लेते हैं. (२)

Mandala 5 · Verse 3
सुदक्षो दक्षः क्रतुनासि सुक्रतुर्अग्ने कविः काव्येनासि विश्ववित्तम्. वसुर्वनं क्षयसि त्वमेक इद् द्यावा च यानि पृथिवी च पुष्यतः... (३)

You are skillful, O Agni, the doer of great deeds, the wise poet, the knower of all. You alone dwell in the forest, and heaven and earth nourish you.

हे सर्वज्ञ अग्नि! तुम शक्ति द्वारा सर्वश्रेष्ठ शक्तिशाली, कर्म के द्वारा शोभन कर्म वाले एवं बुद्धि के कारण बुद्धिमान् हो. तुम अकेले ही सब धर्मों का आश्रय बनते हो. द्यावा-पृथिवी जिन धर्मों का संवर्धन करते हैं, तुम उन्हें धारण करते हो. (३)

Mandala 5 · Verse 1
यज्ञस्य वो रथं विशपातिं विश्रां होतारमंकोरोतिंर्तिं विभावसुम्। शोचञ्च्छुककासु हरिणीषु जभ्रुरदवषा केतुर्यजतो घामशायत.. (१)

The divine chariot of sacrifice, the radiant and all-pervading, is honored by the people. The brilliant flame, the messenger of the gods, shines brightly, illuminating the sacred space.

हे देवो! तुम यज्ञ के नेता, मानव प्रजाओं के पालक, देवों का आह्वान करने वाले, रात के अतिथि एवं विविध दीप्ति वाले अग्नि की सेवा करो. सूखी लकड़ियों को जलाने एवं हरी लकड़ियों का भक्षण करने वाले अभिलाषापूर्वक यज्ञ के ज्ञापक एवं यजनीय अग्नि स्वर्ग में सोते हैं. (१)

Mandala 5 · Verse 2
इममज्जास्मभये अकृण्वत धर्मणमग्निं विदथस्य साधनम्। अर्तुं न यइमुग्रसः पुरोहितं तनूनपातमरुषस्य निस्ते.. (२)

The gods, in their wisdom, established the radiant Agni as the sustainer of sacrifice and the divine priest. He, the unblemished, is the powerful leader, the protector of all beings.

देव और मानव दोनों ने शक्ति द्वारा रक्षण करने वाले व सबके धारक अग्नि को यज्ञ का साधन बनाया. वायु के पुत्र महान् और पुरोहित अग्नि को उषार् सूर्य के समान चूमती हैं. (२)

Mandala 5 · Verse 3
बळस्य नीथा वि पणेइ मन्मे वया अस्य प्रहुता आसुरतवे. यदा घोरसो अमृतत्वमाशातादिज्जनस्य दैव्यस्य चकिरन्.. (३)

The strength of the wise is revealed in their actions, their offerings are made with devotion. When they seek immortality, they embrace the divine nature of humanity.

यज्ञ घोरसो अमृतत्वमाशातादिज्जनस्य दैव्यस्य चकिरन्.. (३)

Mandala 5 · Verse 1
yad adya sthaḥ parāvati yad arvāvaty aśvinā | yad vā purū purubhujā yad antarikṣa ā gatam

O priests, praise with devotion the mighty Rudra, who grants refuge and destroys enemies, accompanied by those Maruts who, with the powerful God, spread His glory and serve the sacrificers from the heavens.

हे ऋत्विजो! जिन आने वाले मरुतों के साथ शक्तिशाली अपनी कीर्ति विस्तृत करने वाले एवं सुखकारक ईश्वर द्युलोक से यजमानों की सेवा करते हैं, आज यज में उन्हीं निश्चित अभिलाषा वाले मरुतों से युक्त, शत्रुनाशक व शरण देने योग्य रुद्र को नमस्कार के साथ स्तोत्र बनाओ. (१)

Mandala 5 · Verse 2
यज्ञेयज्ञे स मत्स्यो देवान्त्स्पर्यति. यः: सुमैर्दीर्घश्रुतम् आदिवासात्येनान्.. (२)

In every sacrifice, that fish (Vishnu) protects the gods, and through profound knowledge and ancient wisdom, he sustains them.

वह मनुष्यों के सभी यज्ञों में देवों की सेवा करता है एवं यजमान अनेक शास्त्रों को सुनकर सुखकारी हव्यों से देवों की परिचर्या करता है. (२)

Mandala 5 · Verse 3
विश्वेभामिरज्यवो देवानां वार्महः. विश्वे हि विश्वमहसो विश्वे यज्ञेषु यज्रियाः.. (३)

All the gods are worthy of praise, for they are the great ones of the universe and are honored in all sacrifices.

हे सकल भुवनों के स्वामी देवो! तुम्हारा वर्णनीय धन महान् है. तुम सब व्याप्त तेज वाले एवं यज्ञों के अधिकारी हो. (३)

Mandala 5 · Verse 4
ते घा राजानो अमृतस्य मन्द्रा अर्यमा मित्रो वरुणः परिजमा. कद्रुद्रो नृणां स्तुतो मरुतः पूषणो भगः.. (४)

These kings, joyful and immortal, are Aryama, Mitra, Varuna, and Parjama. Rudra, praised by men, along with Maruts, Pushan, and Bhaga.

अर्थमा, मित्र, सर्वत्रगामी वरुण अन्य देवों के ऋत्विजों द्वारा प्रशंसित रुद्र, पूषा, मरुत् एवं भग अमृत सदृश हवि के स्वामी, सबके स्तुतियोग्य एवं मानवों को सुख देने वाले हैं. (४)

Mandala 5 · Verse 5
उत नो नक्तमपां वृषन्वासु सूर्यमासा सदनय सधन्या. सचा यत्साहएषामहिर्बुधनेषु बुध्यः.. (५)

May the powerful Sun, the lord of days and nights, lead us to prosperity, just as the wise serpent, Budhya, awakens in the celestial depths.

हे अश्विनीकुमारो एवं समान धन वाले सूर्यचंद्र! अंतरिक्ष में स्थित मेघों में जो अहिर्बुध्य स्थित हैं, उनके साथ जल बरसाओ. (५)

Mandala 5 · Verse 6
उत नो देवावश्ना शुभस्पती धामभिमित्रवरुणा उरुष्यताम्। महः स राय एषतेऽति धन्वेव दुरिता.. (६)

May the divine lords of sustenance, Mitra and Varuna, protect us from all evils and grant us abundant wealth, like a swift arrow piercing through obstacles.

हे कल्याण के स्वामी अश्विनीकुमारो! मित्र एवं वरुण! अपने तेज से हमारी रक्षा करें, इनके द्वारा रक्षित यजमान अधिक धन पाता है एवं मरुस्थल के समान विस्तृत पापों से बच जाता है. (६)

Mandala 5 · Verse 7
उत नो रुद्रा चिन्मुळतामश्विना विश्वे देवासो रथस्पतिभर्गः। ऋभुर्वाज ऋभुक्षणः परिजमा विश्ववेदसः...(७)

May Rudra, the Ashvins, all the gods, the lord of the chariot, Bharga, Ribhu, Vajra, Ribhukshana, Parjama, and Vishvavedasa be pleased with us.

रुद्रपुत्र अश्विनीकुमार हमारी रक्षा करें. समस्त देव रथ के स्वामी पूषा, भग ऋभु, अन्न के स्वामी भग एवं गतिशील अन्य सब देव हमें सुख दें. (७)

Mandala 5 · Verse 8
ऋभुर्वा ऋभुक्षणं ऋभुविधतो मद आ ते हरी जुजुवानस्य वाजिना। दुष्टरं यस्य साम चिद्धयज्ञो न मानुषः...(८)

The swift steeds, O Indra, are yoked for you, the powerful, the giver of strength, the bestower of riches. Your song is irresistible, even the gods' sacrifice is not beyond your might.

हे महान् इंद्र! तुम एवं तुम्हारी सेवा करने वाले यजमान का हर्ष यज्ञ से सुशोभित होता है. यज्ञ के प्रति तुम शीघ्र आते हो एवं तुम्हारे घोड़े शक्तिशाली हैं. तुम्हारे लिए गाया जाने वाला साम राक्षसों द्वारा दुस्तर है. तुम्हारा दिव्य यज्ञ मानवों द्वारा साध्य नहीं है. (८)

Mandala 5 · Verse 9
कृधी नोऽहयो देव सवितः स च स्तुषे महोनाम्। सहो न इन्द्रो वह्निभिन्र्ष्यां चर्षणोनां चक्रं रश्मं न योधुवे.. (९)

O Savitr, the divine illuminator, grant us strength and glory. May Indra, the powerful, bestow upon us the might to overcome our adversaries, like the sun's rays conquering darkness.

हे सविता देव! हमें लज्जारहित बनाओ. धनी यजमानों के स्तोता तुम्हारी स्तुति करते हैं. हमारे बल के समान इंद्र हम मानवों के यज्ञ में आने के लिए अपने पहियों वाले रथ में वायु के समान वेग वाले घोड़ों को जोड़कर शीघ्र पधारे. (९)

Mandala 5 · Verse 10
एषु द्यावापृथिवी धांतं महदस्मे वीरेषु विश्वचर्षणि श्रवः। पृक्षं वाजस्य सातये पृक्षं रायोतं तुर्वणे.. (१०)

May the vast heavens and earth bestow upon us, our heroes, and all-seeing beings, abundant glory and sustenance for victory and prosperity.

हे द्यावा-पृथिवी! तुम हमारे वीरपुत्रों को अनेक सेवाओं से युक्त महान् यश दो. तुम उन्हें बलप्राप्ति व शत्रुनाश के लिए धन के साथ पालक अन्न दो. (१०)

Mandala 5 · Verse 1
सुक्त—१४ प्रेते वदन्तु प्र वयं वदाम ग्रावभ्यो वाचो वदता वददभ्यः. यदद्रयः पर्वताः साकमाशावः श्लोकं घोषं भरथेन्द्राय सोमिनः.. (१)

Let us speak to the departed, and let the eloquent speak to the eloquent. O mountains, you who are mighty, carry the praise of Soma to Indra.

ये पत्थर शब्द करें, हम इन पत्थरों की स्तुति करें. हे ऋत्विजो! तुम शब्द करने वाले पत्थरों की स्तुति करो. हे आदरणीय दृढ़ एवं सोमरस निचोड़ने में शीघ्रता करने वाले पत्थरो! तुम एक इंद्र के लिए सुनने योग्य शब्द करो. हे सोमरसयुक्त पत्थरो! तुम सोम से तृप्त बनो. (१)

Mandala 5 · Verse 2
एते वदन्ति शतवसहस्रवदभि क्रन्दन्ति हरितेभिरासभिः. विइवी ग्रावाणः सुकृतः सुकृत्या होतुर्हविष्मते हविरेधमाशत.. (२)

They speak with a hundred thousand voices, crying out with green mouths. The stones, well-fashioned and well-worked, have come to the Hotri for the offering, increasing the oblation.

ये पत्थर सैकड़ों अथवा हजारों लोगों के समान शब्द करते हैं. ये सोमलता के कारण

Mandala 5 · Verse 3
एते वदन्यविद्वन्न मधु न्यूङ्खयन्तेऽधि पक्व आम्रभिः । वृक्षस्य शाखांरुगस्य बप्पस्तते सुभर्वा वृक्षाः प्रेमरविपुः.. (३)

The wise, like bees, are drawn to the sweet nectar of knowledge, which flourishes on the branches of the tree of life.

ये पत्थर लाल रंग के पेड़ की शाखा को खाने वाले सुभक्षण बैलों के समान शब्द करते हैं, मांसभक्षी मांस पकाने पर जैसी हर्षध्वनि करते हैं, उसी प्रकार का शब्द ये पत्थर नशीला सोम सुख से पीते समय करते हैं. (३)

Mandala 5 · Verse 4
वृद्धदन्ति मदिरेण मन्दिनेन्द्रं क्रोशन्तोऽविद्वन्न मधुः । संस्था धीराः स्वस्मृभिरनतिपुराघोषयन्तः पृथिवीमुपद्धिभिः.. (४)

The ignorant, like intoxicated elephants, cry out to the Lord of the senses, while the wise, with their self-knowledge, proclaim His presence throughout the earth.

नशा करने वाले एवं निचोड़े जाते हुए सोम के द्वारा इंद्र को पुकारने वाले ये पत्थर महान् शब्द करते हैं, ये पत्थर अपने मुख से नशीला सोमरस प्राप्त करते हैं, ये पत्थर निचोड़ने के काम में चंचल होकर भी धीर रहते हैं एवं अपने शब्दों से धरती को गुंजित करते हुए उंगलियों के साथ नाचते हैं. (४)


Mandala 5 · Verse 5
सुपूर्णा वाचमक्रतोप ध्याखरे कृष्पा इषिरा अनर्तिषुः । न्यङ्ऽङ्नि यन्तुपरस्य निष्कुतं पुरू रेतो दधिरं सूर्यश्रितः.. (५)

The wise, with full speech, have praised the radiant, life-giving, and ever-moving divine powers. They have placed the seed of creation, sustained by the sun, within the vast expanse.

इन पत्थरों का शब्द सुनकर ऐसा लगता है, जैसे आकाश में उड़ने वाले पक्षी शब्द कर रहे हों, ये पत्थर जंगल में घूमने वाले कृष्णसार हरिण के समान नाचते हैं, ये पत्थर पिसे हुए सोम को नीचे गिराते हैं एवं सूर्य के समान श्वेत वर्ण के जल को अधिक मात्रा में धारण करते हैं. (५)

Mandala 5 · Verse 6
उग्राऽऽव प्रवहन्तः समायमुः सांकं युक्ता वृष्पो विभ्रतो धुरः । यच्छ्वसन्नो जगसाना अरावषः श्रुष्ण एषां प्रोथयो अवर्तामि.. (६)

The powerful, flowing ones, united, have come, bearing their yokes. As they breathe, the mighty ones, the swift ones, have come forth.

उग्रायव प्रवहन्तः समायमुः सांकं युक्ता वृष्पो विभ्रतो धुरः । यच्छ्वसन्नो जगसाना अरावषः श्रुष्ण एषां प्रोथयो अवर्तामि.. (६)

Mandala 5 · Verse 7
दशावन्निभ्यो दशक्षयेभ्यो दशयोक्त्रेभ्यो दशयो जनेभ्यः । दशाभीशुभ्यो अर्चताऽरेभ्यो दश धुरो दश युक्ता वहृश्यः.. (७)

May the ten powers, ten dissolutions, ten yokes, ten generations, ten rays, ten enemies, ten burdens, and ten harnessed draught animals be auspicious.

दशावन्निभ्यो दशक्षयेभ्यो दशयोक्त्रेभ्यो दशयो जनेभ्यः । दशाभीशुभ्यो अर्चताऽरेभ्यो दश धुरो दश युक्ता वहृश्यः.. (७)

Mandala 5 · Verse 8
ते अद्रयो दशयन्त्र-त्रास आश्रवस्तेषामधायं पर्यते हर्यतम्. त ऊ सुतस्य सोम्स्यन्धांसोऽशोः पीयूषं प्रथ मस्य भजिर.. (८)

The mountains, like ten machines, inspire awe and are the abode of the divine. They are the vessels for the Soma juice, the nectar of the gods, which is to be savored.

वे पत्थर दस इन्द्रियों के दास बनकर जल्दी-जल्दी काम करते हैं. इनके द्वारा निर्मित सोम रस हरे रंग का होकर निकलता है. ये पत्थर ही निचोड़े गए सोम के रसमय अंश को अमृत अन्न के समान पहले ग्रहण करते हैं. (८)

Mandala 5 · Verse 9
ते सोमादो हरी इन्द्रस्य निंसतंडुं दुहन्तो अध्यास्ते गति. तेभिर्दुग्धं परिवाण्सोभ्यं मधिन्द्रो वर्धते प्रथते वृषायते.. (९)

The two Soma-drinking horses of Indra, drawing forth the essence, carry him onward. With their milk, Indra grows strong, expands, and becomes mighty.

ये सोम रस का भक्षण करने वाले ये पत्थर इंद्र के घोड़ों को प्राप्त करते हैं. इनका रस निकलकर गोचर्म के ऊपर जाता है. इन पत्थरों द्वारा निकाले हुए मधुर सोम रस को पीकर इंद्र बढ़ते हैं, विस्तृत होते हैं एवं सांड के समान शक्ति दिखाते हैं. (९)

Mandala 5 · Verse 10
वृषा वो अंशुर्न किला रिषाथनेळावन्त: सदमित्स्थनाशिताः. रेवत्येव महसा चारवः स्थान यस्य ग्रावाणो अजुषध्वम्.. (१०)

May you be strong and uninjured, O drinkers of Soma, always nourished. May you be joyful and beautiful in your greatness, O you who have enjoyed the pressing stones.

हे पत्थरो! सोमलता का खंड तुम्हें यज में रस देगा. तुम निराश मत बनो. तुम अन्न वालों के समान सदा भोजन प्राप्त करो. तुम धनी लोगों के समान सदा तेजयुक्त होकर कल्याणकारी बनो एवं यजमान के यज का सेवन करो. (१०)

Mandala 5 · Verse 1
हेये जाये मनसा तिष्ठ घोरे वचांसि मिश्रां कृणवावहै नु। न नौ मन्त्रान् अनुदितास एते मयस्करन्परतरे चनाहन्.. (१)

Let us not utter words that are mixed and disturbing, but rather remain steadfast in our minds. May these teachings, not yet fully understood, bring us profound peace and joy.

पुरूरवा ने कहा—"हे दुःख देने वाली पत्नी! अनुरागपूर्ण मन से क्षण भर मेरे समीप ठहरो. हम आज शीघ्र ही कथोपकथन करें. आज यदि हमारी बातें अनकही रह गई तो आने वाले दिन सुखकारक नहीं होंगे." (१)

Mandala 5 · Verse 2
किमेता वाचा कृणवा तवाहं प्राक्रमिष्मभ्सामगियेव। पुरूरवः पुनरस्तं परहि दुराप ना वाडवाहमस्मि.. (२)

What can I do with these words, Pururavas? I have already departed, like a fleeting wind. You cannot reach me now, for I am no longer mortal.

उर्वशी ने कहा—"केवल बातों से क्या होगा? पूर्ववर्ती उषओं के समान मैं तुम्हारे पास से चली गई हूं. हे पुरूरवा! तुम अपने घर को पुनः चले जाओ. मैं वायु के समान दुर्लभ हूँ." (२)

Mandala 5 · Verse 3
इष्पुर्निं श्रिय इष्धधरसना गोषाः शत् NSA न रंहिः। अवीरे क्रतौ वि दविद्युत्नोरा न मायुं चितयन्त धुनयः.. (३)

May the divine powers, like a swift arrow, bestow wealth and strength, and may our efforts in righteous deeds be illuminated, dispelling darkness and ignorance.

पुरूरवा ने कहा—"तुम्हारे बिना मैं विजय पाने के लिए तरकस से बाण नहीं निकाल पाता और न सैंकड़ों गायों को वेधपूर्वक शत्रुओं से छीन पाता हूं. वीरविहीन राज्यव्यवस्था में मेरा सामर्थ्य प्रकाशित नहीं होता. शत्रु को कंपित करने वाले मेरे वीर संग्राम में सिंहनाद नहीं करते. (३)

Mandala 5 · Verse 4
सा वसु दधती श्रुशूराय वय उषो यदि वष्ट्यन्तिगृह्‌आत्। अस्तं ननक्षे यस्मिञ्छाकन्दिवा नतं श्रथिता वैतसेन.. (४)

She, the Dawn, bearing wealth, who is to be served, if she desires, from the house. The sun has reached its setting, in which the sky is bright, and the night is loosened from the darkness.

Mandala 5 · Verse 5
त्रिः स्म मादृक् श्रथयो वैतसेनोत स्म मेऽव्यत्यै ष्पणासि. पुरुखवोऽनु ते केतमायं राजा मे वीर तन्वःस्तदासीः..(५)

You have thrice loosened my grip, O Vaitasena, and you have also grasped me for my sustenance. I have followed your wisdom, O king, and your body has become strong.

हे पुरुखवा! तुम दिन में तीन बार पुरुष इन्द्रिय द्वारा ताडित करते थे. किसी宋त के साथ मेरी होड़ नहीं थी. मैं प्रतिदिन तुम्हारे शयनकक्ष में आती थी. हे वीर राजा! तुम मेरे शरीर को सुख देते थे.” (५)

Mandala 5 · Verse 6
या सुजूर्णः श्रेणिः सुम्नआपिहेदचक्षुं ग्रन्थिनी चरण्युः. ता अजय्योऽरुणयो न सस्ुः श्रिये गावो न धेनोवऽऽनन्वन्त.. (६)

She who is well-formed, radiant, and a source of nourishment, with eyes that see and a gait that moves, is unattainable and ever-youthful, like cows following a calf for prosperity.

पुरुखवा ने कहा—“मेरे महल में तुम्हारे आने के बाद सुजूर्ण, श्रेणि, सुम्न, आपि, हृदयेचक्षु, ग्रन्थिनी, चरण्यु आदि अप्सराएँ गोष्ठ में जाने वाली गायों के समान शब्द करती हुई नहीं आती थीं.” (६)

Mandala 5 · Verse 7
समस्मिज्जयमान आस्तग्ना उत्तमेवध्नश्चः स्वगुतीः. मह यत्त्वा पुरुखवो रुणायवधंन्दस्युहृत्याय देवाः...(७)

The gods, having conquered, have established their supreme dominion, and the divine powers are in their rightful place.

उर्वशी ने कहा—“पुरुखवा के जन्म के समय देखने के लिए देवपत्नियां भी एकत्रित हुई तथा स्वयं बहने वाली नदियों ने भी उसे आश्रित बनकर बढ़ाया. देवों ने युद्ध में शत्रुहनन करने के लिए तुम्हारी अत्यंत वृद्धि की.” (७)


Mandala 5 · Verse 8
सचा यदासु जहतीष्क्कममाणुषु मानुषो निष्वे. अप स्म मतरस्न्ती न भुज्युस्ता अत्रसत्रस्पर्शो नाश्नाः..(८)

When humans, abandoning their earthly desires, depart from this world, they are no longer subject to the touch of fear or hunger.

पुरुखवा ने कहा—“मानव रूपधारी पुरुखवा जब अमानुष रूपधारिणी अप्सराओं के सामने गए, तब वे इस प्रकार भाग गईं, जिस प्रकार हिरनी व्याध से दूर भागती है अथवा रथ में जुते हुए घोड़े भागते हैं. (८)

Mandala 5 · Verse 9
यदासु मतोऽमृतासु निस्पृक्सां क्षीणीभिः क्रतुभिंन पृङ्क्ते. ता आतयो न तन्वः शुभ्वात स्वा अश्वासो न क्रीळयो दन्दशानाः..(९)

When the mortal, indifferent to the immortal, is not satisfied by sacrifices, then afflictions, like untamed horses, consume his body.

जब मानव पुरुखवा ने मरणरहित अप्सराओं को विशेषरूप से स्पर्श करते हुए वचन और कर्म से उनके साथ संपर्क स्थापित किया, तब वे क्रीड़ा रत अश्वों के समान शब्द करके भाग गईं और दिखाई नहीं दीं. (९)

Mandala 5 · Verse 1
प्र ते महे विदथे शंसिषं हरी प्र ते वन्वे वणुपो हर्यतं मदम्। घृतं न यो हरिभिरु सेचत आ त्वा विशन्तु हरिवर्पसँ गिरः.. (१)

May I praise you, O Indra, with hymns, and may I praise your exhilarating intoxication. May your divine radiance flow like ghee, and may your glorious praises enter you.

हे शत्रुहिसक इंद्र! मैं यज्ञ में तुम्हारे घोड़ों की विशेष प्रशंसा करता हूं एवं तुमसे प्रसन्न होने की प्रार्थना करता हूं. तुम अपने हरि नामक घोड़ों द्वारा आकर हमें घी से सींचो. हे शुभवर्ण इंद्र! मेरी स्तुतियां तुम्हें प्राप्त हों. (१)

Mandala 5 · Verse 2
हरिं हि योनिभि ये समस्वरन्निहन्न्तो हरिं दिव्यं यथा सदः। आ यं पूणन्ति हरिभं धेनव इन्द्राय शुष्ं हरिवन्तमर्चत.. (२)

Worship Indra, the mighty and glorious, who is the source of all, and whom the cows nourish with their milk.

हरि हि योनिभि ये समस्वरन्निहन्न्तो हरिं दिव्यं यथा सदः। आ यं पूणन्ति हरिभं धेनव इन्द्राय शुष्ं हरिवन्तमर्चत.. (२)

Mandala 5 · Verse 3
घुम्नी सुशिप्रो हरिमन्युसायक इन्द्रं नि रूपा हरितो मिमिक्षिरे.. (३)

The swift, sharp arrows of Indra, with their green shafts, pierced the enemy.

इंद्र का वज्र लोहे का बना हुआ, सुंदर, शत्रुनाशक एवं हाथों में धारण करने योग्य है। धनी, शोभन नासिका वाले, क्रोध में भरकर बाण द्वारा शत्रुनाश करने वाले इंद्र को हरे रंग के सोम द्वारा सींचा गया. (३)

Mandala 5 · Verse 4
दिवि न केतुराध धायि हर्यतो विव्यचच्छ्छो हरितो न रंहा. तुददहहं हरिशिप्रो य आयसः सहस्रशोका अभवदृरिमभरः.. (४)

The radiant sun, like a banner in the sky, shines with golden rays, its brilliance overwhelming all. The iron-clad chariot of the sun, with its swift horses, scatters darkness and brings forth a thousand dawns.

दिवि न केतुराध धायि हर्यतो विव्यचच्छ्छो हरितो न रंहा। तुददहहं हरिशिप्रो य आयसः सहस्रशोका अभवदृरिमभरः.. (४) स्तोताओं ने आकाश में सूर्य के समान इंद्र के वज्र को स्थिर किया. उस वज्र ने अपने वेग से सारी दिशाओं को व्याप्त कर लिया. हरी नासिका वाले एवं सोमपानकर्ता इंद्र ने वज्र से शत्रु को मारते समय हजारों प्रकार की दीप्ति धारण की. (४)

Mandala 5 · Verse 5
त्वंत्त्वमर्यहथा उपस्थितः पूर्वभिरिन्द्र हरिकेश यजभ्भिः. त्वं हर्यासि तव विश्वमुख्खय्सामि राधो हरिजात हर्यतम्.. (५)

You, O Indra, are present as you were before, with your golden hair, to be worshipped. You are the remover of obstacles, the source of all, the giver of wealth, the one who delights all.

त्वंत्त्वमर्यहथा उपस्थितः पूर्वभिरिन्द्र हरिकेश यजभ्भिः। त्वं हर्यासि तव विश्वमुख्खय्सामि राधो हरिजात हर्यतम्.. (५) हे हरे केशों वाले इंद्र! तुम प्राचीन यजमानों द्वारा प्रशंसित होकर हवि की कामना करते थे. हे हरे रंग वाले इंद्र! तुम्हारा समस्त अन्न व्याप्त, प्रशंसनीय, असाधारण एवं सुंदर है. (५)

Mandala 5 · Verse 1
मनै नु बह्मामहं शतं धामानि सप्त च.. (१)

I am the mind, the Brahma, the hundred, and the seven abodes.

मैंने नु बह्मामहं शतं धामानि सप्त च.. (१)

Mandala 5 · Verse 2
शतं वो अम्बाऽऽमानि सहस्रमुत वो रहः। अथा शतक्रत्वो यूयमिं मे अगदं कृत्.. (२)

May a hundred mothers and a thousand confidantes be yours; may you, O Indra, make me free from disease.

शतं वो अम्बाऽऽमानि सहस्रमुत वो रहः। अथा शतक्रत्वो यूयमिं मे अगदं कृत्.. (२)

Mandala 5 · Verse 3
औषधी: प्रतिमोदध्वं पुष्पवती: प्रसूवरी:। अश्चाऽऽइव सञ्जितीर्वीरुधः पारियिष्वः.. (३)

May the plants, rich with flowers and fruits, rejoice and flourish, like well-trained horses, bringing forth abundance.

हे फूल और फल वाली औषधियो! तुम इस रोगी के प्रति प्रसन्न बनो. तुम अश्वों के समान जयशील, उत्पन्न होने वाली एवं रोगियों को रोगों से पार करने वाली हो. (३)

Mandala 5 · Verse 4
औषधीरतिं मातरस्तद्दे वी रूपं ब्रुवे। सनेयमंश्ं गां वास आत्मानं तव पुरुष.. (४)

O Mother, I shall speak of your divine form, the essence of all herbs. Grant me a portion of your essence, O Purusha, that I may dwell within you.

हे माता के समान दिव्य औषधियो! मैं तुम्हारे संबंधी वैद्य से इस प्रकार कहता हूं—"हे चिकित्सक! मैं तुम्हें घोड़ा, गाय, वस्त्र एवं स्वयं को दे सकता हूं." (४)

Mandala 5 · Verse 5
अश्चत्थे वो निषदनं पर्ण वो वसतिकृत्ता। गोभ्राज इन्द्रक्लिासथ यत्सनवथ पूरुषम्.. (५)

In the Ashvattha tree is your dwelling, its leaves your shelter. You, Indra, shine like the sun, when you are worshipped by men.

अश्चत्थे वो निषदनं पर्ण वो वसतिकृत्ता। गोभ्राज इन्द्रक्लिासथ यत्सनवथ पूरुषम्.. (५)

Mandala 5 · Verse 1
इष्कृतीनां वो माताथो यूयं स्थ निष्कृतीः सीराः पतत्रिणीः स्थन यदामयति निष्कृथः ।। (१)

You are the mother of the skilled artisans, and you yourselves are skilled artisans. You are the plowshares, the winged ones, when you fashion the earth.

हे ओषधियो! तुम्हारी माता का नाम इष्कृति अर्थात् रोगविनाशिका है, इसलिए तुम भी इष्कृति हो. तुम रोग को बाहर निकालने वाली एवं पतनयुक्त हो. तुम रोगी को स्वस्थ करो.


Mandala 5 · Verse 2
आ देवो दूतो अजिरश्रृक्किल्वन्तदेववापे अभिम मागगच्छत्। प्रतीचीनः प्रति मामा वृतस्व दधामि ते घुमतीं वाचमास्न्.. (२)

May that divine messenger, swift and powerful, come to me. I embrace you, and I place sweet words in your mouth.

हे देवाधि! कोई ज्ञानी एवं गतिशील देवदूत बनकर तुम्हारे पास से मेरे समीप आवे. हे बृहस्पति! तुम मेरी ओर उन्मुख होकर मेरे पास आओ. मैं तुम्हारे लिए दीप्ति युक्त स्तुति अपने मुख में धारण करता हूं. (२)

Mandala 5 · Verse 3
अस्मे घेहि घुमतीं वाचमास्न् बृहस्पते अनमीवामभिशिरामम्। यया वृष्टिं शन्ततवे वनाय दिवो द्रप्सो मधुमो आ निवेश.. (३)

O Brihaspati, grant us a flowing, healthy, and auspicious speech, through which the rain, like a sweet drop from heaven, may nourish the forest.

हे बृहस्पति! तुम एक दीप्तिशालिनी, दोषरहित एवं गमनशील स्तुति को मेरे मुख में धारण करो. उसी स्तुति द्वारा शंतनु के लिए आकाश से वर्षा आवे तथा मधुयुक्त रस टपके. (३)

Mandala 5 · Verse 4
आ नो द्रप्सो मधुमन्तो विशन्तिन्द्रं देवाहधिरथं सहसम्। नि ष्ीद होत्रमूतथा यजस्व देवान्देवायपि हविषा सपर्य.. (४)

May the sweet, life-giving drops enter us, and may the gods, with Indra at their head, grant us strength. May the sacred rites be established, and may we worship the gods with offerings.

आ नो द्रप्सो मधुमन्तो विशन्तिन्द्रं देवाहधिरथं सहसम्, नि ष्ीद होत्रमूतथा यजस्व देवान्देवायपि हविषा सपर्य.. (४)

Mandala 5 · Verse 5
आहिंषेणो होत्रमृषिभिर्निषीदनं देवापिर्दैवसुमतिं चिकित्वान्। स उत्तरस्मादधरं समुद्रमो दिव्या असुजदृष्पा अभि.. (५)

The wise one, with divine intellect, sits with the Rishis, offering oblations, and the divine waters, with their life-giving power, ascend from the lower to the upper ocean.

ऋषभेण के पुत्र देवापि ऋषि देवों के प्रति शोभन वृद्धि से युक्त स्तुति करके यज करने बैठे। उस समय वे ऊपर वाले समुद्र अर्थात् अन्तरिक्ष से नीचे वाले सागर में जल ले आए एवं दिव्य जल चारों ओर बरसा। (५)

Mandala 5 · Verse 6
अस्मिन् समुद्रा अध्युत्तरस्मिन्त्रापो देवेभिनिवृता अतिष्ठन्। ता अदन्नृषभेणेण सुष्टा देवापिना प्रेषिता मृक्षणीषु.. (६)

The waters, dwelling in this northern ocean, were established by the gods. They were nourished by the strong bull, sent by the divine father, and moved through the heavens.

जिस ऊपर वाले सागर अर्थात् आकाश में देवों ने जल को रोक रखा है, उस जल को ऋषभेण के पुत्र देवापि ने बरसाया. वह जल स्वच्छ स्थानों पर बहने लगा. (६)

Mandala 5 · Verse 7
ये देवापिः शन्तनोवे पुरोहितो होत्राय वृतः कृपयत्रदीधत्. देवश्रुतं वृष्णिं रराणो बृहस्पतिमयस्मा अयच्छत्.. (७)

The divine priest, chosen for the sacred rite, bestowed upon Shantanu the power of the gods. Brihaspati, the wise, granted him strength and divine hearing.

जब देवापि ने शंतनु का पुरोहित बनकर एवं अग्निहोत्र के लिए वरूण प्राप्त करके मेघों द्वारा सुनने योग्य एवं वर्षायाचक स्तोत्र बोला, तब बृहस्पति ने उन्हें बोलने की शक्ति दी. (७)

Mandala 5 · Verse 8
यं त्वा देवापिः शुशुचानो अगन आर्षिबेणो मनुष्यैः సమీधे. विश्वेभिवैर्देवमधमानः प्र पर्जन्यमीया वृष्णिमन्तम्.. (८)

The radiant divine being, sought by gods and men, is invoked with reverence. May this powerful, life-giving deity, like the thunderous rain-giver, be approached and appeased.

हे अग्नि! ऋषभेण के पुत्र देवापि मनुष्य ने पवित्र होकर तुम्हें भली प्रकार जलाया. तुम सभी देवों से प्रेरित होकर वर्षा वाले बादल को प्रेरणा दो. (८)

Mandala 5 · Verse 9
त्वां पूर्वं ऋषयो गीर्भिरायन्त्वामधरेषु पुरूहुत विश्वे. सहसाण्याधिरथ्यन्यसे आ नो यजं रोहिदश्वीप याहि.. (९)

O greatly invoked, all-pervading One, may the sages approach You with hymns, and may You, the red-horsed, come to us with offerings.

हे अग्नि! पूर्ववर्ती ऋषि स्तुतियां बोलते हुए तुम्हारे समीप आए हैं. हे बहुतों द्वारा बुलाए गए अग्नि! इस समय सब यजमान यज्ञों में तुम्हारे पास जाते हैं. राजा शंतनु ने यज्ञ में मुझे हजारों प्रकार की संपत्ति दक्षिणा के रूप में दी. हे रोहित अश्व वाले अग्नि! तुम यहां आओ. (९)

Mandala 5 · Verse 1
इन्द्र दृह मघवन्त्वावदिद्ब्रज इह स्तुतः। सुतपा बोधि नो वृधे. देवभिनः सविता प्रावतु श्रुतमा सर्वतातिमदितिं वृणीमहे.. (१)

May Indra, the powerful and generous, praised here, awaken us for our growth. May Savitr, the divine, protect us; may we choose the all-encompassing Aditi.

हे धनस्वामी इंद्र! तुम हमारी भोगप्राप्ति के लिए अपने समान बली शत्रु को मारो. तुम इस यज्ञ में स्तुतियां सुनकर एवं सोमंरस पीकर हमारी उन्नति का निश्चय करो. प्रेरक इंद्र अन्य देवों के साथ हमारे यज्ञ की रक्षा करें. मैं सबकी रक्षा करने वाली देवमाता अदिति का वरण करता हूं. (१)

Mandala 5 · Verse 2
भराय सु भरत भागमूर्त्यं प्र वायवे शुचिपे क्रन्ददिष्ये. गौरस्य यः पयसः पीतिमान्श आ सर्वतातिमदितिं वृणीमहे.. (२)

We choose the all-encompassing Aditi, who is the nourisher and sustainer, the embodiment of Bharata, the pure wind, and the drinker of the milk of the Earth.

हे ऋत्विग्जो! तुम समय-समय पर सबके पोषक इंद्र का भोग भली प्रकार पूरा करो. तुम सोमंरस पीने वाले एवं शब्दसहित गमन वाले वायु के लिए भाग दो. वायु देव गौरवण वाले पशु का दूध पीते हैं. मैं सबकी रक्षा करने वाली देवमाता अदिति का वरण करता हूं. (२)

Mandala 5 · Verse 3
आ नो देवः सविता साविष्द्रय ऋजुयते यजमानाय सुन्वते. यथा देवान्प्रतिभूंषम पाक्वदा सर्वतातिमदितिं वृणीमहे.. (३)

May the divine Savitr, the impeller, grant us strength and prosperity, so that we may attain all-pervading divinity and boundless sustenance.

सविता देव हमारे ऋजुकामी एवं सोमंरस निचोड़ने वाले यजमान को पक्का हुआ अन्न सामने से प्रस्तुत करें. उससे हम देवों को भूषित करें. मैं सबकी रक्षा करने वाली देवमाता अदिति का वरण करता हूं. (३)


Mandala 5 · Verse 4
इन्द्रो अस्मे सुमना अस्तु विश्वहा राजा सोमः सुवितस्याध्येटुं नः। यथायथा मित्रधुतानि संदुधुरा सर्वतातिमदितिं वृणीमहे.. (४)

May Indra be ever well-disposed towards us, and may King Soma preside over our prosperity. As we embrace the boundless Aditi, may we overcome all divisions and discord.

इंद्र हमारे प्रति अनुग्रहपूर्ण चित्त वाले बनें. सब दिनों में दीप्तिशाली सोम हमारे स्तोत्र को प्राप्त करें. इंद्र ऐसी कृपा करें कि हम मित्रों में निहित धन पा सकें. मैं सबकी रक्षा करने वाली देवमाता अदिति का वर्ण करता हूं. (४)

Mandala 5 · Verse 5
यज्ञो मनुः प्रमर्तिनः पिता हि कमा सर्वतातिमदितिं वृणीमहे.. (५)

We choose Yajna, Manu, Pramarti, and Kama as our father, and seek the all-encompassing Aditi.

ये इंद्र प्रशंसनीय बल द्वारा हमारे यज्ञ को धारण करते हैं. हे बृहस्पति! तुम मेरी आयु बढ़ाने वाले बनो. मनुष्युक्त एवं उत्तम बुद्धिवाला यज्ञ हमारा पालक बनकर हमें सुख प्रदान करे. मैं सबकी रक्षा करने वाली देवमाता अदिति का वर्ण करता हूं. (५)

Mandala 5 · Verse 6
इन्द्रस्य नु सुकृतं दैव्यं सहोऽग्निगृहं जरिता मघिरः कविः। यज्ञश्च बुद्धिदथ चारुन्तम आ सर्वतातिमदितिं वृणीमहे.. (६)

We choose Indra's divine strength, the fire's home, the wise and mighty singer, the sacrifice that bestows wisdom, and the all-encompassing Aditi.

देवों का बल इंद्र भली प्रकार संपादित करके एवं हमारी यज्ञशाला में वर्तमान है. अग्नि देवों को बुलाने वाले बुद्धिमान्, विद्वान् व यज्ञ के पात्र एवं यज्ञ में हमारे सेव्य हैं. (६)

Mandala 5 · Verse 7
न वो गुहा चक्रुम भूरि दुष्कृतं नाविवश्चं वासवो देवहेळनम्. माकिनो देवा अनृतस्य वर्ष आ सर्वतातिमदितिं वृणीमहे.. (७)

We do not seek to commit great sins, nor to offend the gods. We choose truth, prosperity, and boundless nourishment.

हे देवो! हम तुम्हारे प्रच्छन्न स्थान में पाप न करें. हे वासदाता देवो! हम तुम्हारे क्रोध के निमित्त द्रोह न करें. हमें झूठे रूप की प्राप्ति न हो. मैं सबकी रक्षा करने वाली देवमाता अदिति का वर्ण करता हूं. (७)

Mandala 5 · Verse 8
अपामावां सविता साविषन्श्यगरीय इ Dadurch सेधन्तव्यः। ग्रावा यत्र मधुपुच्छ्यते बृहदा सर्वतातिमदितिं वृणीमहे.. (८)

May Savitr, the divine impeller, bestow upon us the waters that nourish and sustain, and may we embrace the boundless, all-encompassing Mother.

सवित्ता देव हमारे रोगों को दूर करें तथा शक्तिशाली पाप को नीचे गिरावें. जिस स्थान पर सोम रस निचोड़ा जाता है, उस स्थान पर पाप नष्ट हो. मैं सबकी रक्षा करने वाली देवमाता अदिति का वर्ण करता हूं. (८)

Mandala 5 · Verse 9
ऊर्ध्वो ग्रावा वासवोऽस्तु सोतरि विश्वा द्वेषसि सनुतर्युयोत. स नो देवः सविता पायुरीड्य आ सर्वतातिमदितिं वृणीमहे.. (९)

May the divine Sun, the sustainer and worthy of praise, protect us from all evil and grant us boundless prosperity and freedom.

हे देवो! मुझ सोम रस निचोड़ने वाले का पत्थर ऊंचा हो. तुम उसी पत्थर से सब छिपे हुए शत्रुओं को हमसे अलग करो. वे सविता देव हमारे पालक एवं प्रशंसनीय हैं. मैं सबकी रक्षा करने वाली देवमाता अदिति का वर्ण करता हूं. (९)

Mandala 5 · Verse 10
ऊर्जं गावो यवसे पीवो अतन्न ऋतस्य याः सदने कोशेऽडध्वै. तन्नूरेव तन्वो अस्तु भेषजमा सर्वतातिमदितिं वृणीमहे.. (१०)

May the cows, nourished by fodder, bestow strength and sustenance upon us. May their essence become our healing, and may we embrace boundless nourishment and divine grace.

हे गायो! तुम घास वाले स्थान में बढ़ा हुआ रस भक्षण करो। जो घास यज्ञशाला अथवा दुहने के स्थान में उगी हुई हो, उसे तुम खाओ। तुम्हारा दूध ही हमारे शरीर की औषधि हो। मैं सबकी रक्षा करने वाली देवमाता अदिति का वरण करता हूं। (१०)

Mandala 5 · Verse 1
उदबुध्यध्वं समनसः सखायः समग्निमिन्धं बहवः सनीळाः. दधिक्रामग्निमृप्सं च देवीमिन्द्रावतोऽवसे नि हव्ये वः.. (१)

Awaken, O friends of one mind, many together, tending the fire, dwelling in one home. May the divine powers, Indra and Agni, protect you in this offering.

हे सखा ऋत्विजों! समान मन वाले बनकर जागो। तुम अनेक होकर भी एक स्थान में रहने वालों के समान अग्नि को प्रज्वलित करो। मैं अपनी रक्षा के लिए दधिका, उष्ा, अग्नि एवं इंद्र को बुलाता हूं। (१)

Mandala 5 · Verse 2
मन्द्रा कृष्णधं धिय आ तणुधं नाबमरिस्त्ररपणीं कृष्णधम्. इष्कृणधंमायुधारे कृष्णधं प्राञ्चं यं प्रययता सखायः.. (२)

O friends, strengthen your minds with devotion to the dark-hued Lord, and with His grace, let us move forward, holding His divine weapons.

हे मित्र स्तोताओं! तुम मादक स्तुतियाँ करो, कृषि आदि कर्मों का विस्तार करो, डांड के द्वारा पार लगाने वाली नाव बनाओ, हल एवं जुए आदि उपकरणों को सजाओ तथा यज्ञपात्र अग्नि को भली प्रकार लाओ। (२)


Mandala 5 · Verse 3
अन्तर्युद्धं जिघांसतो वज्रमिन्द्राभिदासतः। दासस्य वा मधुवनायस्य वा सनुत宇या वधम्.. (३)

To one who desires to kill the inner enemy, the thunderbolt of Indra is a weapon. Similarly, the destruction of a slave or Madhuvan is also a form of slaying.

हे इंद्र! हमें मारने के इच्छुक शत्रुओं पर वज्र चलाओ. हे धनस्वामी! हमारा शत्रु दास हो या आर्य तुम गुप्त रूप से उसे मारो. (३)

Mandala 5 · Verse 4
उदनी हृदमपिब्जहृषणः कूटं स्मं तृहृदभिमतितमेति। प्र मुष्क्भारः श्रव इच्छमानोऽजिरं बाहू अभरसिषानन्.. (४)

The one who desires to hear, embracing the heart of the waters, carries the strength of his arms to the swift, desired goal.

इस बैल ने अत्यंत प्रसन्न होकर जल पिया है. यह अपने सींगों से मिट्टी के ढेर को खोदता हुआ शत्रु की ओर जाता है. लटकते हुए भारी अंडकोशों वाला यह बैल अन्न की इच्छा करता हुआ गमनशील शत्रु की बाहों पर प्रहार करता है. (४)

Mandala 5 · Verse 5
न्यक्रन्दन्त्युपयन्त एनममेह्यनृवृषभं मध्य आजेः। तेन सुभर्वं शत्वत्सहस्रं गवां मुदगलः प्रथने जिगाय.. (५)

Mudgala, the strong, conquered a thousand cows in battle, by means of this invincible one, who roared and advanced.

इस बैल के समीप जाते हुए मनुष्यों ने इसे गर्जन करने के लिए प्रेरित किया तथा युद्ध के बीच में इससे पेशाब कराया. इस बैल की सहायता से मुद्गल ने उत्तम आहार करने वाली सैकड़ों एवं हजारों गायों को जीता. (५)

Mandala 5 · Verse 6
कर्कर्दवे वृषभो युक्त आसीदवावत्सारथिरस्य केशी। दुर्घयुक्तरस्य द्रवतः सहानस ऋच्छन्ति ष्मा निष्पदो मुद्गलांनीम्.. (६)

The bull, yoked to the crab, was ready, and the horseman's horse was swift. The swift-moving ones, without feet, approached the muddy ground.

बैल को शत्रूनाश के काम में लगाया गया. इसकी रस्सी थामने वाली मुद्गलानी गरजनें लगी. न रुकने वाले रथ में जुड़े हुए एवं रथ के साथ दौड़ने वाले उस बैल के पीछे चलने वाले सैनिक मुद्गलानी के पीछे चले. (६)

Mandala 5 · Verse 1
येन जिगाय शतवत्सहस्रं गवा मुदगलः पूतनाज्येषु.. (१)

By whom the demoness Putana, who had drunk poison in the guise of milk, was conquered, along with thousands of cows.

जिससे मुद्गल ने सौ-सौ वर्षों के बछड़ों के साथ गायों को जीता। (१)

Mandala 5 · Verse 2
सङ्क्रन्दनेनानिमिषेण जिष्षुना युत्त्वाकरणं दुश्यवनेन धृष्णुना. तदिन्द्रण जयत तत्सहश्वं युधो नर इष्हुस्तेन वृष्णा.. (२)

With the thunderous roar of the unblinking, victorious Indra, the brave warriors, armed with arrows, conquer all battles.

सङ्क्रन्दनेनानिमिषेण जिष्षुना युत्त्वाकरणं दुश्यवनेन धृष्णुना। तदिन्द्रण जयत तत्सहश्वं युधो नर इष्हुस्तेन वृष्णा.. (२)

Mandala 5 · Verse 3
स इषुहस्तैः स निषङ्गिभिरशी संसृष्टजिप्तोमा बाहुशुर्ध्वग्रधन्वा प्रतिहिताभिरस्ता.. (३)

He, with arrows in hand and quiver, his bow strung and ready, stood firm, his weapons poised.

सबको वश में करने वाले इंद्र हाथ में बाण धारण करने वाले तथा तूणीरधारी लोगों से युक्त होकर युद्ध करते हैं एवं शत्रुसमूह से भिड़ जाते हैं। युद्ध में भिड़ने वालों को जीतने वाले, सोमपानकर्ता, भुजबल युक्त एवं उद्यत धनुष वाले इंद्र अपने बाणों से शत्रुओं का नाश करते हैं। (३)

Mandala 5 · Verse 4
बृहस्पति परि दीया रथेन रक्षोहामित्रों अपबाधमानः। प्रभञ्जन्तेसेनाः प्रमृणो युधा जयनस्माकेम्यधिविता रथानाम्.. (४)

May Brihaspati, the divine charioteer, protect us, driving away enemies and demons. May our armies, empowered by him, conquer in battle and triumph with our chariots.

बृहस्पति परि दिया रथेन रक्षोहामित्रों अपबाधमानः। प्रभञ्जन्तेसेनाः प्रमृणो युधा जयनस्माकेम्यधिविता रथानाम्.. (४) हे राक्षसहंता बृहस्पति! तुम शत्रुओं को जीतते हुए रथ पर बैठकर हमारे पास आओ। तुम शत्रुसेनाओं का नाश करो, वि<bos> योद्धओं को मारो एवं हमारे रथों की रक्षा करके वृद्धि पाओ। (४)

Mandala 5 · Verse 5
बलविजाय स्थविरः प्रवीरः सहस्वान्वासी सहमान उग्रः। अभिवीरो अभिसत्त्वा सहोजा जत्रिमन्द्र रथमा तिष्ठ गोवित्.. (५)

The mighty, victorious, and powerful hero, possessing immense strength and ferocity, stands firm in his chariot, ready to conquer and protect.

हे सब प्राणियों का बल जानने वाले, महान् उत्तम वीर, सामर्थ्यशाली, शीघ्र गति वाले, शत्रुप्रभवकारी, उग्र, शक्तिशाली वीर पुत्रों वाले, बल प्राप्तकर्ता एवं शक्ति से उत्पन्न गायों को प्राप्त करने वाले इंद्र! तुम विजय प्राप्त करने वाले रथ पर चढ़ो। (५)

Mandala 5 · Verse 1
असावि सोम: पुरुहूतं तुभ्यं हरिभ्यां यजमुप याहिंTuyम. तुभ्यं गिरो विप्रवीरा इयाना दधन्वि-र इन्द्र पिबा सुतस्य.. (१)

O Indra, the Soma is poured for you, the invoked one, come with your tawny steeds. To you, O hero, the hymns are sung; drink the pressed juice.

हे बहुतों द्वारा बुलाए गए इंद्र! तुम्हारे लिए सोम रस निचोड़ा गया है. तुम अपने घोड़ों द्वारा जल्दी यज्ञ में आओ. श्रेष्ठ ब्राह्मणों ने स्तुतियां करते हुए तुम्हारे लिए यह सोम रस दिया है. तुम इसे पिओ. (१)

Mandala 5 · Verse 2
अस्तु धूतस्य हरिषः पिबेह नृभिः सुतस्य जठरं पूणस्व, मिभिर्धमद्रय इन्द्रं तुभ्यं तेभिर्वर्धस्व मदमुक्वाहः...(२)

May the one who has shed his impurities drink this nectar, and may the son's belly be filled. May you grow with these, O Indra, and be filled with intoxicating joy.

हे हरि नाम के घोड़ों वाले इंद्र! यज्ञकर्म करने वाले मनुष्यों द्वारा निचोड़े गए और जलों में स्वच्छ किए गए सोमरस को पियो तथा अपना पेट भरो. पत्थरों ने तुम्हारे लिए जो सोम सींचा है, उससे अपना मद बढ़ाओ तथा स्तुतियों को स्वीकार करो. (२)

Mandala 5 · Verse 3
प्रोग्रां पीतिं वृष्पा इयर्मि सत्यां प्रये सुतस्य हर्ष्व तुभ्यम्, इन्द्र धेनाभिरिह मादयस्व धीभिविर्धस्वाभिः शच्या गुणानः...(३)

O Indra, be pleased with this offering, rejoice in the Soma, and be invigorated by our hymns and strength.

हे हरि नाम घोड़ों वाले एवं वर्षकर्ता इंद्र! तुम्हारे पीने के लिए निचोड़े गए सोम को यज्ञ में तुम्हारे आने का निश्चय जानकर तुम्हें भेंट करता हूं. तुम शक्ति से युक्त एवं प्रशंचित होकर इस यज्ञ में समस्त स्तुतियों एवं कर्मों से प्रसन्न बनो. (३)

Mandala 5 · Verse 4
ऊती शचीवस्त्व वीर्येण वयो दधाना उशिश ऋतज्ञाः, प्रजावदिन्द्रं मनुष्यो दुरोणे तस्थुर्गृणन्तः साधमाघसः...(४)

The wise, knowing the truth, and strong in their might, praise Indra in their homes, bringing forth progeny and prosperity.

हे शक्तिशाली इंद्र! तुम्हारी रक्षा से अन्न धारण करने वाले एवं प्रजाओं को धारण करने वाले उशिजवंशी यज्ञ करने की अभिलाषा से यजमानों के घरों में स्थित हुए. वे तुम्हारी स्तुति के साथ-साथ प्रसन्न हो रहे थे. (४)

Mandala 5 · Verse 5
प्रणीतिभिर्ह हर्ष्व सुष्टोः सुपुमस्य पुरुषो जनासः, महिंष्ठमूर्ति विविरे दधानाः स्तोतार इन्द्र तव सुन्नताभिः...(५)

The people, filled with joy and praise, have chosen your most magnificent form, O Indra, through their devoted hymns.

हे हरि नामके घोड़ों के स्वामी, शोभन स्तोत्र वाले, सुंदर धन वाले व विशाल दीप्ति वाले इंद्र! तुम्हारी शोभन स्तुतियों द्वारा स्तोताओं ने अपनी तथा दूसरों की रक्षा की है. (५)

Mandala 5 · Verse 6
उप ब्रह्मणो हरिषो हरिभ्यां सोमस्य याहि पीतये सुतस्य, इन्द्र त्वा यज्ञः क्षममाणमानड् दाक्षां अस्यध्वरस्य प्रकेत:...(६)

O Hari, come to the Soma libation, to drink the pressed Soma juice. Indra, this sacrifice, enduring and attentive, has brought you to its essence.

हे हरि नाम के घोड़ों वाले इंद्र! तुम अपने घोड़ों द्वारा यज्ञों में निचोड़े हुए सोमरस को पीने जाओ. शक्तिशाली इंद्र को ही यज्ञ प्राप्त करते हैं. तुम यज्ञ का विषय समझकर दान करते हो. (६)

Mandala 5 · Verse 7
सहसवाजभिमतिपाहां सुतेरणां मधवानं सुवृक्तिम्, उप भूपन्ति गिरो अप्रतीतमिनं नमस्या जरितुः पन्नन्त:..(७)

The wise, praising the mighty Indra with eloquent words, bow down to him, the unconquerable, who bestows abundant wealth.

हे असीम अन्न वाले, शत्रुपराजयकारी, सोमरस में रमण करने वाले, धनयुक्त, शोभन स्तुति वाले एवं युद्ध में अन्यो द्वारा न ललकारे गए इंद्र को सुशोभित करते हैं. स्तोता नमस्कार पूर्वक इंद्र की स्तुति करते हैं. (७)


Mandala 5 · Verse 8
सप्तापो देवी: सुरुणा अमृतका याभि: सिन्धुमतइन्द्र पूभिः। नवन्ति स्रोत्या नव च स्रवन्तीदेव्यो गातुं मनुषे च विन्दः..(८)

The seven divine waters, radiant and immortal, flow through the great rivers, bringing forth nourishment and life. These flowing goddesses guide humanity to prosperity and well-being.

हे इन्द्र! तुम सात नदियाँ हो, जो अमृत से परिपूर्ण हैं, और जो नित्य बहती हुई हैं, वे मनुष्यों के लिए मार्ग प्रशस्त करती हैं।

Mandala 5 · Verse 9
अपो महीरभिशस्तरमुच्चोऽजागरस्वधि देव एकः। इन्द्र यास्त्वं वृत्रतूर्ये चक्रर्थं तभिर्विश्रयुस्तन्नं पुपुष्याः..(९)

O powerful, awakened God, you alone, through your mighty deeds in slaying Vritra, have brought forth abundance and sustenance.

हे इन्द्र! तुमने वृत्र के पास से बहुत जल गिराया। इन मुक्त जल के प्रति एकमात्र तुम्ही सावधान थे। तुमने वृत्र को मारकर प्राप्त किए गए जल से सारे संसार के प्राणियों का शरीर पुष्ट किया था. (९)

Mandala 5 · Verse 1
कदावसो स्तोत्रं हर्यत आव शमशा रुद्राः. दीर्घं सुतं वातावष्याय.. (१)

The hymn of Hari, sung by the Rudras, brings lasting peace and prosperity.

हे निवासस्थान देने वाले इन्द्र! हमारा स्तोत्र तुझ कामना करने वाले को कब रोकेगा? जिस प्रकार खेत की नालियाँ जलपूर्ण होती हैं, उसी प्रकार जल प्राप्त करने के लिए अधिक सोमरस निचोड़ा गया है. (१)

Mandala 5 · Verse 2
हरी यस्य सुयुजा विव्रता वेरवन्तानू शेपा. उभा रजी न केशिना पतितर्न्.. (२)

The Lord, whose chariot is yoked with divine steeds, swiftly traverses the heavens, his horses adorned with manes.

हरि नामक दो घोड़े दौड़ने में कुशल ठीक-ठीक से सिखाए गए एवं श्वेत केशों वाले हैं. इन घोड़ों के स्वामी इंद्र दान करने आवें. (२)

Mandala 5 · Verse 3
अप योरेन्द्रः पापज आ मतो न शश्रमाणो बिभीवान्। शुभे यद्युयुजे तविबीवान्.. (३)

The powerful one, born of sin, is not considered to be trembling or fearful when he is engaged in battle, for he is strong.

हे इन्द्र! पाप से रहित होकर, न थके हुए और न भयभीत हुए, शुभ कार्य के लिए बलवान् होकर युद्ध में प्रवृत्त हुए। (३)

Mandala 5 · Verse 4
सचायोरेन्द्रऋषभ ऑं उपानसः सपर्यन्. नदयोविव्रतयोः शूर इन्द्रः.. (४)

Indra, the mighty hero, is praised and worshipped by the righteous, like a bull among cows, his strength resounding.

सच्चे इन्द्र, वृषभ, उपानस, सपर्यन्, नदयोविव्रतयोः, हे शूर इन्द्र! (४)

Mandala 5 · Verse 5
अधि यस्तस्थौ के शवन्ता व्यवस्वन्ता न पुष्ट्ये. वनोति शिप्रभ्यां शिप्रणीवान्.. (५)

He who stands firm, possessing strength and sustenance, is not weakened by desire, but leads with swiftness and purpose.

जो केशवान् और व्यवस्वान् होकर पुष्ट होने के लिए स्थित हुआ, वह शिप्र (वेगवान्) और शिप्रवान् (वेगवान्) घोड़ों को प्राप्त करता है. (५)

Mandala 5 · Verse 6
प्रास्तौद्यूौजा ऋषभिस्ततक्ष शूरः शवसा. ऋभुर्न क्रतुभिमतिरिक्षा.. (६)

The powerful Ribhu, skilled in his crafts, fashioned and shaped with his intellect, surpassing all others.

दर्शनीय शक्ति वाले एवं शूर इंद्र शक्ति के द्वारा मरुतों के साथ यजमान की प्रशंसा करते हैं. ऋभु के रथनिर्माण के समान इंद्र ने अनेक वीरकर्म किए हैं. (६)

Mandala 5 · Verse 7
वज्रं यश्चक्रे सुहनाय दस्यवे हिरिमशो हिरिमान्. अरुतहुरदृुतं न रजः.. (७)

He who forged the thunderbolt for the wicked Dasyu, brilliant and strong, has not been harmed by the dust.

हरी दाढ़ी वाले एवं हरे रंग के घोड़ों वाले इंद्र ने दस्यु को मारने के लिए वज्र तैयार किया. सुंदर जębड़ों वाले इंद्र आकाश के समान विचित्र हैं. (७)

Mandala 5 · Verse 8
अव नो वृजिना शिशिहृचा वनेमानूच. नाब्रह्मा यज्ञा ऋधग्जोषति त्वे.. (८)

May we be protected from sin and evil, and may our sacrifices be pleasing to you, O divine one, for without you, they are not truly fulfilled.

हे इंद्र! हमारे पापों को समाप्त करो, जिससे हम तुम्हारी स्तुतियों द्वारा स्तुतिहीन लोगों को मार सकें. स्तुतिरहित यज्ञ तुम्हें स्तुति वाले यज्ञ के समान प्यारा नहीं होता. (८)

Mandala 5 · Verse 9
ऊर्ध्वा यन्ते त्रेतिनी भूयजस्य धूर्षु सघन्. सजुर्नार्वा स्वयंशसं सचायोः.. (९)

The divine chariot, drawn by swift steeds, ascends to the heavens, carrying the righteous and the devoted.

हे इंद्र! तुम्हारे ऋत्विजों ने यज्ञशाला में जिस समय तुमसे संबंधित यज्ञाकिया आरंभ की, उस समय तुमने यजमान के साथ एक नाव पर सवार होकर उसका उद्धार किया. (९)


Mandala 5 · Verse 10
श्रिये ते पृष्ठरूपसेचनी भूच्छिये दर्विरेपाः. यया स्वे पात्रे सिञ्चच उत्.. (१०)

May you be adorned with prosperity, like the divine waters that cleanse and purify. May you be blessed with abundance, as the sacred ladle pours forth offerings into the sacred vessel.

हे इंद्र! दूध देने वाली गाय तुम्हारे सोम हेतु दूध दे. तुम करछुली के द्वारा अपने पात्र में मधु लेते हो. वह स्वच्छ एवं कल्याणकर हो. (१०)

Mandala 5 · Verse 1
उभा उ नूनं तदिदर्थयेथे वि तन्वाथे धियो वस्त्रापसेव. सग्रीचीना यातवे प्रेमजीगः सुदिनेव पृष्ठ आ तंnpyये.. (१)

Both of you now truly strive for this, spreading your thoughts like weavers of cloth. Moving together in unison for the journey, you are embraced like the sun on the back of the sky.

हे अश्विनीकुमारो! तुम हमारे हव्य की कामना करते हो. जुलाहा जिस प्रकार कपड़ा बुनता है, उसी प्रकार तुम हमारी स्तुतियों को बढ़ाते हो. यजमान तुम दोनों के एक साथ आने के लिए स्तुति करता है. तुम सूर्य एवं चंद्रमा के समान अन्न को अलंकृत करो. (१)

Mandala 5 · Verse 2
उषारेव फर्वरेषु श्रयेथे प्रायोगेव श्त्रात्रा श्नासुरेथः. दूतेव हि छों यशसा जनेषु माप स्थांत महिबेवावापनात्.. (२)

Like the dawn, you are sought in the sacrifices; like the messenger, you are praised with glory among people. May you not be separated from us, as the earth is not separated from the sky.

बैल जिस प्रकार घास के मैदान में चरते हैं, उसी प्रकार तुम यजकर्त्ता लोगों के पास आते हो. रथ को चलाने वाले शीघ्रगामी अश्व के समान तुम धन देने के लिए स्तोता के पास आते हो. तुम दूत के समान यशस्वी बनो. जैसे भैंसे तालाब को नहीं छोड़ते, उसी प्रकार तुम भी सोमपान को मत छोड़ना. (२)

Mandala 5 · Verse 3
सांक्युजा शकुनस्येव पक्क्षा पश्वेव चित्रा यजura गमिष्टम्. अग्निरेव देवयोर्दीदिवांसा परिजमानवे यजथः पुरुत्रा.. (३)

The bird's wings, like the spotted deer's hide, carry us to the sacrifice. Agni, the divine, shines brightly, inspiring many offerings.

हे अश्विनीकुमारो! तुम चिड़ियों के पंखों के समान एक-दूसरे से मिले रहते हो. तुम इस यज में दो विचित्र पशुओं के समान आए हो. तुम यजमान के यज में अग्नि के समान दीप्तिशाली हो तथा पुरोहितों के समान स्थानों में देवों की पूजा करते हो. (३)

Mandala 5 · Verse 1
आविर्भून्महि माधोन्मेषां विश्वं जीवं तमसो निर्मोचि। महि ज्योतिः पितृभिर्दत्तमागादुरुः पन्था दक्षिणाया अदार्शी.. (१)

The great light, bestowed by the ancestors, has appeared, freeing the universal soul from darkness. The path of the South has been revealed.

Mandala 5 · Verse 2
उच्चा दिवि दक्षिणावन्तो अस्थुर्यं अस्थुर्यः सह ते सूर्यण। हिरण्यदा अमृतत्वं भजन्ते वासोदाः सोमं प्र तिंरन्त आयुः.. (२)

Those who give generously ascend to the heavens, united with the sun. Those who give gold attain immortality, and those who give garments prolong life.

Mandala 5 · Verse 3
देवीं पूर्ददक्षणा देवयज्या न क्वारिभ्यो नहि ते पूणन्ति। अथा नरः प्रयत्दक्षणासोऽवधभिया बहवः पूणन्ति.. (३)

Those who offer gifts to the gods with a desire for reward do not truly please them. But those who offer with selfless devotion, fearing the consequences of inaction, truly satisfy the divine.

Mandala 5 · Verse 4
शतधारं वायुमर्कं स्वर्विं नृक्ष्ससते अभं चक्षते हविः। ये पूणन्ति प्र च यच्छन्ति सङ्गेमे ते दक्षिणां दुहते सप्तमातरम्.. (४)

Those who offer the sun's thousand-rayed light and the divine wind, and who give and receive with devotion, these indeed milk the seven mothers, bestowing abundant blessings.

Mandala 5 · Verse 5
इमा गावः सरमे या ऐच्छः परि दिवो अन्तान्सुभगे पतन्ती. कस्त एना अव सुजादयुध्युतास्माकायुधा सन्ति तिग्मा.. (५)

These cows, O Sarama, which you sought, are falling from the ends of the sky. Who will protect them from us, whose weapons are sharp?

Mandala 5 · Verse 6
असेन्या वः पणयो वचांस्यनिषृष्यास्तन्तवः सन्तु पापीः. अदृष्टो व एतवा अस्तु पन्था बृहस्पतेर् उभया न मृळात्.. (६)

May your words be unassailable, your threads unbreakable, and your deeds free from sin. May the path ahead be unseen by your enemies, and may Brihaspati grant you well-being from all sides.

सरमा बोली—“हे पणियो! तुम्हारी बातें सैनिकों की बातों के समान नहीं हैं. तुम्हारे पापी शरीर कहीं इंद्र के बाणों के शिकार न हो जावें? कहीं तुम्हारा मार्ग आक्रमकारी देवों द्वारा पददलित न हो जाए? मेरी बात न मानने पर कहीं बृहस्पति तुम्हें कह न दे.” (६)

Mandala 5 · Verse 7
अयं निधिः सरमे अद्रिबुध्नौ गोभिरश्रैभिर्वसुभिन्युष्टः. रक्षन्ति तं पणयो ये सुगोपा रेकु पदमल्कम जगन्थ.. (७)

This treasure, guarded by cows and horses, is enriched by wealth, and protected by vigilant guardians who have reached the highest abode.

पणियों ने कहा—“हे सरमा! हमारी गायरूपी संपत्ति पर्वतों द्वारा सुरक्षित है. यह गायों, घोड़ों और धनों से प्राप्त है. रक्षणसमर्थं पाणी इस संपत्ति की रक्षा करते हैं. गायों के रंभाने के शब्द से सुशोभित हमारे इस स्थान पर तुम व्यर्थ आई हो.” (७)

Mandala 5 · Verse 8
एह गमनृष्यः सोमशिता अयास्यो अङ्गिरसो नवग्वाः. त एतम्पूर्व वि भजन्न्त गोनामथैतद्वचः पणयो वमन्ति.. (८)

These Angirasas, the Navagwas, who are sons of Soma and Ayasya, first divided the cows, and then the Panis devoured this word (or knowledge).

सरमा बोली—“सोमपान करके मतवाले अंगिरागोत्रीय अयास्य ऋषि एवं नवगु ऋषियों का समूह यहां आएगा. वे इस गोधन का विभाग करके ले जावेंगे. उस समय तुमको यह अभिमान भरा वचन छोड़ना पड़ेगा.” (८)

Mandala 5 · Verse 1
तेऽवदन प्रथमा ब्रह्मकिलिबेऽकूपारः सलिली मातुरिश्वा. वीळूहुरास्तप उग्रो मयोभूरूपो देवीः प्रथमजा ऋतेन.. (१)

The great ocean, the mother of the universe, spoke first, and the mighty cosmic breath, the source of all joy, brought forth the primal goddesses through the eternal order.

बृहस्पति द्वारा पत्नीत्यागरूपी पाप किए जाने पर आदित्य, वरुण, वायु, जलती हुई अग्नि, सुखदायी सोम, दिव्य जल एवं प्रजापति द्वारा पहले उपादित संतानों ने कहा. (१)

Mandala 5 · Verse 2
सोमो राजा प्रथमो ब्रह्माजायां पुनः प्रायच्छदहणीयमानः. अन्वर्वित्ता वरुणो मित्र आसीदग्निहॊता हस्तगृहा निनाय.. (२)

Soma, the first king, gave his daughter, the unconsumable, back to Brahma. Varuna, the wealthy, and Mitra, the friend, took her by the hand and led her away.

राजा सोम ने लज्जा का त्याग करके बृहस्पति जुहू को सबसे पहले उसे दिया. मित्र और वरुण इस में मध्यस्थ बने. देवों को बुलाने वाले अग्नि उसे हाथ पकड़कर लाए. (२)

Mandala 5 · Verse 3
हस्तनैव ग्राह्य आधिरस्या ब्रह्माजायेयमिति चेदवोचन्. न दूताय प्रहे तस्थ एषा तथा राष्ट्रं गुर्पितं क्षत्रियस्य.. (३)

The wife of Brahma, saying "I shall be born," was taken by the hand. She is not sent as a messenger, but is entrusted to the Kshatriya as the nation.

उन लोगों ने बृहस्पति से कहा—“यह तुम्हारी विवाहीता पत्नी है. तुम्हें इसका शरीर हाथ से ग्रहण करना चाहिए. इन्हें खोजने को दूत गया था, उसके प्रति इसने समर्पण नहीं किया था. यह शक्तिशाली राजा के राष्ट्र के समान सुरक्षित है. (३)

Mandala 5 · Verse 4
देवा एतस्यामवदन् पूर्वं सप्तऋषयस्तपसे ये निषेदूः. भीमा जाया ब्राह्मणस्योपनीता दुर्घा दधाति परमे व्योमन्.. (४)

The gods and the seven sages, who meditated here before, declared that the wife of the Brahman, though a difficult burden, is borne by the supreme being.

देवा एवं तपस्या के लिए बैठे हुए सप्तऋषियों ने इस पत्नी की पवित्रता के विषय में कहा है. बृहस्पति द्वारा विवाहीता यह नारी शुद्ध चरित्र वाली है. तप का प्रभाव बुरे पदार्थ को भी आकाश में पहुंचा देता है. (४)

Mandala 5 · Verse 5
ब्रह्मचारी चरति वेविवृद्धिः स देवानां भवतीकमङ्ग्म्. तेन जायामन्वविन्दद् बृहस्पतिः सोमेन नीतां जुहृवः न देवाः.. (५)

Through disciplined celibacy, one grows in spiritual strength, becoming a divine offering. Thus, Brihaspati found his consort, as the gods offered Soma.

स्त्री के अभाव में ब्रह्मचर्य का पालन करने वाले जैसे बृहस्पति ने देवों की सेवा करके यज्ञ के एक भाग के रूप में इसे प्राप्त किया, उसी प्रकार इस समय देवों से पाया. (५)

Mandala 5 · Verse 6
पुनर्वै देवा अददुः पुनर्नमुष्या उत. राजानः सत्यं कृण्वानो ब्रह्माजायां पुनर्ददुः.. (६)

The gods, having given again, and the princes also, making truth, gave the Brahmanas again.

Mandala 5 · Verse 1
मनीषिभिः प्र भरध्वं मनीषां यथायथा मतयः सन्ति नृणाम्। इन्द्रं सत्यैररयामा कृतेभिः स हि वीरो गर्वणस्युविदानः.. (१)

With wisdom, let us offer our intellects, for as humans have diverse thoughts, so Indra, the powerful, is pleased by true and righteous deeds.

हे स्तोताओं! ज्यों-ज्यों तुम्हारी बुद्धि का उदय हो, वैसे-वैसे ही तुम स्तुतियां पढ़ो. सत्यकर्मों के अनुष्ठान द्वारा हम इंद्र को बुलाते हैं. वीर इंद्र स्तुतियों को जानकर स्तोताओं को प्यार करते हैं. (१)

Mandala 5 · Verse 2
ऋतस्य हि सदसो धीतिरघौत्स गाईयो वृष्भमो गोभिरानट्. उदतिष्ठत्विषेण महन्ति चित्सं विव्याचा रजांसि.. (२)

The mind, fixed on the divine order, has attained the strength of the mighty bull, nourished by the cows of light. May it rise with vigor, expanding the vast realms of existence.

जल के आधार आकाश को धारण करने वाले इंद्र प्रकाशित होते हैं. तुरंत जन्मा बछड़ा जिस प्रकार गाय से मिला रहता है, उसी प्रकार इंद्र सर्वत्र व्याप्त हैं. इंद्र महत् शब्द के साथ उत्पन्न होते हैं तथा विस्तृत जल का निर्माण करते हैं. (२)

Mandala 5 · Verse 3
इन्द्रः किल श्रुत्या अस्य वेद स हि जिष्णुः पधिकृतस्युर्यय. आत्मेनां कृणवन्त्रच्युतो भुदगोः पतित्दिवः सनजा अप्रतीतः.. (३)

The Indra, who is the victorious one, knows this through scripture, and by his own self, he makes the imperishable one, who has fallen from heaven, to be born again.

इंद्र ही इस स्तुति को सुनना जानते हैं. जयशील इंद्र ने सूर्य का मार्ग बनाया है. अच्युत इंद्र ने सेना को प्रकट किया है. इंद्र गायों और स्वर्ग के प्रति सनातन एवं विरोधरहित हैं. (३)

Mandala 5 · Verse 4
इन्द्रो म्हा महतो अर्णवस्य व्रतामिनादङ्गिरोभिर्गुणाः। पुरुषि चिन्निं तताना रजांसि दाधार यो धरुण सत्यताता.. (४)

He who is the great sustainer, the source of all, with the Angirasas, has established the vast realms, holding them firm with His unbreakable vows.

अंगिरागोत्रीय ऋषियों द्वारा प्रशंसित होकर इंद्र ने अपनी महिमा से विशाल मेघ का कार्य समाप्त किया था. उन्होंने अनेक जल बनाए तथा सत्यस्वरूप स्वर्ग में बल संचार किया. (४)

Mandala 5 · Verse 5
इन्द्रो दिवः प्रतिमानं पृथिव्या विश्वा वेद सवना हन्ति शुष्णाम्। मही चिदधामातनोत्स्येण चास्कम्भने स्कभीयान्.. (५)

Indra, the measure of the heavens and the earth, knows all sacrifices and destroys obstacles. The great Earth, with its vastness, supports all beings without support.

छावा-पृथ्वी के बराबर इंद्र सभी सोम यज्ञों को जानते एवं सबका संताप नष्ट करते हैं. उन्होंने सूर्य के द्वारा विस्तृत आकाश को प्रकाशित किया. अतिशय धारणकर्ता इंद्र ने खंभा

Mandala 5 · Verse 6
वज्रेण हि वृत्रं वृत्रमस्तदेवस्य शुशुवानस्य मायाः। वि धृष्णो अत्र धृष्टता जघन्यथाभावो मधवन्-बाहूजाः.. (६)

With the thunderbolt, Indra, the slayer of Vritra, destroyed the illusions of the powerful Vritra. O mighty Indra, your strength and prowess have vanquished the enemy.

हे इंद्र! तुमने वज्र से वृत्र को मारा. यज्ञविरोधी कार्य करने वाले वृत्र की सारी मायाओं को भयानक वज्र से समाप्त किया. हे धनस्वामी इंद्र! इसके बाद तुम अधिक शक्तिशाली बने. (६)


Mandala 5 · Verse 7
सचन्त यदृषषः: सूर्योण चित्रांमस्य केतवो रामविन्दन्. आ यन्नक्षत्रां दृशे दिवो न पुनर्यतो नकिरदृज्ञा नु वेद.. (७)

The Rishis, seeing the sun's brilliant rays, have discovered the stars. They ascend to the heavens, and though they return, no one truly knows their origin.

जब उषएं सूर्य से मिलीं, तब इसकी किरणों ने विचित्र शोभा प्राप्त की. आकाश में जब कोई नक्षत्र दिखाई नहीं दिया था, तब सूर्य की सर्वगामी किरणों को कोई नहीं जान पाया. (७)

Mandala 5 · Verse 8
दूरं किल प्रथमा जग्मुरासामिन्द्रस्य याः प्रसवे ससुरारः। क्व स्विद्रं क्व बुद्धन आसामापो मध्यं क्व वो नूनमन्तः.. (८)

Where did the waters go, the first ones that accompanied Indra's birth with the gods? Where are they now, and where is their end?

इंद्र की आज्ञा से पहली बार जो जल बहा था, वह बहुत दूर गया. उस जल का अग्रभाग एवं मस्तक कहां है? हे जलो! तुम्हारा मध्य भाग कहां है? (८)

Mandala 5 · Verse 9
सुजः सिन्धुर्यहिना जग्रसाणों आददिताः प्र विविजे जवेन. मुमुक्षमाणा उत या मुमुचेऽधदेता न रमन्ते नि्तिकाः.. (९)

Those who are liberated by the Supreme Being, the ocean of bliss, do not find joy in worldly pleasures, even when they are offered.

हे इंद्र! तुमने मेघ के द्वारा ग्रसित जल को छुड़ाकर वेग से बहाया. इंद्र ने जब जलों को मुक्त करने की इच्छा की, उस समय अत्यंत शुद्ध जल एक स्थान पर नहीं रहे. (९)

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Amaranath Amar


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